कविता और कहानी
आओ करे ये सतत प्रतिज्ञा
नारी को सम्मान नहीं तो बताओ क्या दोगे बेटी को घर में मान नहीं तो बतलाओ क्या दोगे एक घर सुधरने से बोलो क्या बदलेगा हर सोच बदलने का प्रण बोलो कब लोगे 🌹☘️ जब तक सारी कायनात ना बदले तो सब बेकार जब तक अर्न्तमन ना स्वीकारे हर तरफ है हार हर तरक्की हर…
मेरे गोपाल : अर्चना त्यागी
एक छोटे से गांव में मोहन अपनी मां के साथ रहता था। एक छोटा सा खेत था उनके पास। उसमें फसल उगाकर मां मोहन की परवरिश कर रही थी। मोहन एक होनहार छात्र था। कक्षा में हमेशा प्रथम आता।मेहनत से पढ़ाई करता। जो समय बचता उसमें मां की काम में सहायता कर देता। पिता का…
आजादी के साथ अमर है पन्द्रह अगस्त का शुभ दिन
डॉक्टर सुधीर सिंह आजादी के साथ अमर है पन्द्रह अगस्त का शुभदिन,असंख्य कुर्बानी के उपरांत ही गया गुलामी का दुर्दिन। भारतमाता के उन सपूतों को नमन कर रहा हिंदुस्तान,स्वतंत्रता की बलिवेदी पर जो मुस्कुराकर हुए कुर्बान। उनके त्याग-तपस्या का ही फल है पवित्र आजादी,संकल्प के साथ करें उसकी अस्मिता की रखवाली। आजादी का मतलब है…
रक्षाबंधन का त्योहार
रक्षाबंधन का त्योहार लाया खुशियां हजार बहना आए भैया द्वार इसको मनायें धूमधाम से रक्षाबंधन का त्योहार ।। प्यारी बहना राखी लाई भैया प्यारे की कलाई सजाई बहना करती है मनुहार खुशियां आएं भैया द्वार इसको मनाएं धूमधाम से भैया माथे तिलक सजाएं अक्षत भी माथे पर लगाएं घेवर फैनी की मिठास दिन होता प्यारा…
भांग धतूरा
असुरों ने सर्वदा की देवों से लड़ाई एकता समुद्र मंथन ने दोनों में कराई। देवी लक्ष्मी विलुप्त हुई क्षीर सागर में समुद्र मंथन किया गया था लक्ष्मी पाने। सागर मंथन से उत्पन्न हुआ जो विष दृष्टि बचाने को इसे पी गए थे शिव। महादेव का गला नीला हो गया शिव ने विष गले में ही…
शिव का सावन
शिव शंकर भोले भंडारी , तेरी महिमा ही बड़ी निराली, मस्तक पर है त्रिनेत्र, कहते इनको त्रिपुरारी । विषधर नीलकंठ में शोभा पाते, हिमकर जटा में सजाते, गले में मुण्ड माल है पहनते, कैलास में ये वास करते । सावन माह है अति पावन , शक्ति ने किया शिव वरण, शक्ति शंकर को है अति…
राखी का पर्व
राखी का त्योहार है प्यारा भाई बहन का रिश्ता न्यारा I राखी के धागे में बंधता भाई बहन का प्यार सारा। खुशी चहक चहक के कहती है बयार सुगंधित बहती है। मिष्ठान्न थाली में रख लाती भाई को प्रेम से खिलाती माथे ऊपर तिलक लगाती नारियल भी साथ में लाती। भाई देता है आशीष और…
खुलेआम जनमत की खिल्ली उड़ रही है
संसद के अंदर जब शोर-शराबा होता है, अनर्गल ही घात-प्रतिघात होने लगता है। मेहनती जनता की कमाई की बर्बादी पर, जनप्रतिनिधियों का ध्यान नहीं जाता है। संसद में एक मिनट के बहस में व्यय, सुनते हैं उनत्तीस हजार रुपये हो जाता है। सुविधाभोगी जननेता ईमानदारी से सोचें, खर्च होने वाला सब धन कहां से आता…
अँधेरे और उजाले
गंगा के किनारे, यूँ हीं नहीं लगी है भीड़ साहब। लोगों ने पाप किये होंगे शायद बेहिसाब।। और वो कहता है मुझको, आओ कभी मेरे भी द्वार। गर करते हो मुझे से प्यार, बिना किसी दरकार।। काश! वो तो, मेरी हैसियत ना पूछता। अच्छा होता, गर वो मेरी खैरियत को पूछता।। उनका पैग़ाम नफ़रत था,…
