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हिन्दी की व्यथा

ये अंधेरा क्यों है? आज तो बत्ती जला दो, वैसे तो कोई आता नहीं मेरे घर, शायद आज कोई भूले भटके आ जाये  आज “हिन्दी दिवस  है न किसी न किसी को तो मेरी याद आ ही जायेगी। सूना रहता है मेरा आंगन, मेहमान क्या…कोई कौवा भी                                                 मेरी मुंडेर पर नहीं बैठता है। क्या मैं…

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वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर तार्किक है

नवीन चौबे (गाडरवारा) भारतीय भाषाओं की वर्णमाला विज्ञान से भरी है। वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर तार्किक है और सटीक गणना के साथ क्रमिक रूप से रखा गया है। इस तरह का वैज्ञानिक दृष्टिकोण अन्य विदेशी भाषाओं की वर्णमाला में शामिल नहीं है। जैसे देखे*  क ख ग घ ड़ – पांच के इस समूह को…

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हिंदी की दिव्य-ज्योति से हिंद जगमगाता कहे

डॉक्टर सुधीर सिंह पंजाब से पूर्वांचल,कश्मीर से कन्याकुमारी,विचार-विनिमय का  सरल माध्यम है हिंदी.राष्ट्रभाषा हिंदी  यहां जन-जन की भाषा है,राष्ट्रीयअस्मिता का अनुपम आँचल है हिंदी. हम हमेशा आर्यभाषा हिंदी का सम्मान करें,उसके प्रचार-प्रसार हेतु हम सभी सजग रहें.जनभाषा हिंदी  के संरक्षण,संवर्धन के लिये;130करोड़ हिंदुस्तानी एकजुट रह शपथ लें. बचपन से सभी बच्चों को हिंदी से लगाव…

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हिन्दी दिवस (गीत)

बाज उठी होठों पर, आज मेरी हिन्दी। ममता के ऑचल में, माथे की बिन्दी। गाती है गली गली ,सावनी सुहानी। फागुनी हवा में ,रंग घोल रही पानी। सरमाते अगहन की, मुस्कान मंदी।                बाज उठी———— छायी मायुसी में ,रंग भर देती है। रूठे हुए नैनों में,ठंढ भर देती है। बहके हुए मन में,प्यार की कालिंदी।…

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मेरी भाषा, मेरा अभिमान

सुमित को नौकरी मिल गई थी। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था। आज सुबह ही उसे फोन के माध्यम से सूचना मिली थी। वह एक माह पूर्व इस नौकरी  के साक्षात्कार के लिए गया था, अपने दोस्त अमित के साथ। साक्षात्कार की उसने बहुत तैयारी की थी। अपने विषय की पढ़ाई करने के साथ साथ…

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आओ-आओ गजानन गणेश

आओ-आओ गजानन गणेश,देवा मेरे घर आओघर आओ देवा घर आओ -2आओ-आओ गजानन ———–देवा मेरे घर आओ लाल सिंदूर तुमको है प्यारा -2फूलों से महका दरबार तुम्हाराप्रथम पूजें तुमको सब गणेश -2गजानन मेरे घर आओआओ-आओ गजानन ————+ सुख वैभव के तुम ही स्वामीमहिमा जग ने तेरी जानीमूषक सवारी करके गणेशगजानन मेरे घर आओआओ-आओ गजानन गणेशदेवा मेरे…

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आंधे की माक्खी राम उड़ावै

हमारी बोलचाल, प्यार, उलाहनों और कहावतों में रचे बसे है श्रीराम    — डॉo सत्यवान सौरभ,   राम-राम जी। हरियाणा में किसी राह चलते अनजान को भी ये ‘देसी नमस्ते’ करने का चलन है। यह दिखाता है कि गीता और महाभारत की धरती माने जाने वाले हरियाणा के जनमानस में श्रीकृष्ण से ज्यादा श्रीराम रचे-बसे हैं।…

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कोरोना काल!कैसा हाल!!

बड़ी अजीब विडम्बना है, जब चार माह पूर्व जब कोरोना शुरुआती चरण में था तो लोग सजग थे,  पूरी सावधानी बरत रहे थे पर अब जब कोरोना ने विकराल रूप धारण कर लिया है,24 लाख से ऊपर केस हो गये, रोज़ पचपन-साठ हज़ार केस आ रहे हैं,यही हाल रहा तो दिसम्बर आते आते यह संख्या…

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करते सिक्के शोर !

क़तर रहे हैं पंख वो, मेरे ही लो आज ! सीखे हमसे थे कभी, भरना जो परवाज़ !! आखिर मंजिल से मिले, कठिन साँच की राह ! ज्यादा पल टिकती नहीं, झूठ गढ़ी अफवाह !! अब तक भँवरा गा रहा, जिसके मीठे राग ! वो तितली तो उड़ चली, कब की दूजे बाग़ !! वक्त-वक्त…

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लघुकथा – 15 अगस्त और दादी माँ की आशाएं

          पंकज की दादी 15 अगस्त की सुबह जल्दी से ही तैयार हो गयी थी।जैसा कि उसे मालूम था कि 15 अगस्त पर सभी टीवी के समाचार चैनलों पर भारत देश के सैनिकों को दिखाया जाता है।हर बार की तरह वह भी अपने पोते पंकज की एक झलक पाने के लिए टीवी के सामने बैठ…

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