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‘मजदूर-दिवस’ यही सबको सिखाता है

Doctor Sudhir Singh कर्म ही पूजा है और श्रम ही साधना है; ‘मजदूर-दिवस’ यही सबको सिखाता है. जो भी जीवन जीता हैअकर्मण्य रहकर, संपूर्ण देश के साथ वहअन्याय करता है. 1मई सबों को यह याद दिलाने आता है, सभी लोग क्ष्रमिक हैं;सब क्ष्रम-साधक हैं, संसार में जितने भी विकास कार्य हुए हैं, सबके लिए मजदूर…

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फ़क़ीर (कविता)

श्वेत वसन दाढ़ी सफ़ेद खाली दिखते हाथ चेहरे पर हैं झुर्रियां दीखे मलिन सी गात काम क्रोध मोह लोभ से इसका क्या सरोकार ये तो एक फ़क़ीर है जग इसका परिवार पाकर चंद सिक्के ही दे झोली भर आशीष ये दुनिया तो फ़ानी है देता सबको ये सीख सब धरा रह जाएगा मोह न किसी…

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कविता– “कोरोना”

हिन्दू है न ये मुसलमान कोरोना, रक्तबीज राक्षस विषाणु कोरोना। जो ग्रास बने हैं उन्हें उपचार चाहिए, सबका इस व्याधि से बचाव चाहिये। साबुन से हाथ धुलें मास्क लगाएं, छींकें मुह ढ़क सामाजिक दूरी बनाये। संक्रमण बचाना ही अचूक है इलाज, जन जागरण से ही बचेगा ये समाज। न हो सामूहिक पूजा न समूह में…

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कोरोना

कोरोना ने आज करा दिया सबको ये एहसास। धन दौलत सब मिथ्या,ना रहेगा कुछ भी पास।। जीवन मे सब कर लो , अब प्रभु से ये अरदास। सबको रखना सुरक्षित,सबको अपनो के पास।। सबकुछ अब तुम त्याग दो,करो घर मे निवास। कोरोना अगर हो गया , कोई ना आयेगा पास।। आपस की दूरी बढ़ी ,…

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प्रधान मंत्री जी की ललाट पर चिंता की रेखाएं

Doctor Sudhir Singh प्रधानमंत्री जी की ललाट पर चिंता की रेखाएं,130करोड़ जनता की परेशानी बयां करती हैं,दूरदर्शी राष्ट्रनायक  चुनौतियों से घबराता नहीं,खतरों से खेल लेने की उनकीआदत हो गई है. दुनिया के लिए ‘कोरोना’आज गंभीर खतरा है,धर्म-जातिऔर सरहद से उसका नहीं वास्ता है.जाल में वह फंसाता हैअमीर-गरीब सबको ही,असावधान इंसान का ही वह शिकार करता…

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गीत – मुझे न भुलाना

अगर छोड़कर चल दिए हम जमाना। मेरे दोस्तो तुम मुझे न भुलाना। अगर छोड़ दें साथ साँसे भी मेरा। कहाँ फिर रहे साथ मेरा और तेरा।। मेरे जीते जी साथ कुछ पल बिताना। मेरे दोस्तो तुम मुझे न भुलाना। हम रहे न रहे जिंदा बातें रहेंगी। हम बसते थे दिल में तब यादें बसेंगी।। भुला…

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हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने

हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने और पूछती हूं आपसे एक सवाल क्या यह अंत है या मचा हुआ है कोई और बवाल क्या इंसान अपनी करनी पर पछताएगा या बिना पश्चाताप किए ही मर जाएगा क्या कुछ ऐसा है जिसे आप बता रहे हो या फिर बिना कुछ कहे ही दुनिया को डरा…

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डरना नही

  मुसीबतें तो  आएगी   पर फिसलना तुम नहीं।   जिन्दगी तो ये सतायेगी   मगर तुम डरना  नहीं।  बड़े बड़े चले आते यहां  कष्टों केभी पहाड़ कभी।  दोस्ती को भुला कर के  साधते हैं दुश्मनी सभी।  लेता है जीवन परीक्षाएं   कभी तो बड़ी से बड़ी।  जूझते रह जाते उनसे  अड़चनें जो आन पड़ीं।  जिन्दगी…

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स्वयं को पहचान लो

 कुछ ठान लो अपने मन में,                 आ स्वयं को पहचान लो।  भीड़ भरी इस दुनिया में,             तुम भीड़ नहीं हो जान लो।  चलो प्रकृति की गोद में,             फिर खुशियों की कुटी छवायें।  वादियों के आँगन में,     …

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आश्चर्य (लघुकथा)

आज सुबह जितेश का फ़ोन आया; हिमांशु ने फ़ोन रिसीव किया बोला: हेल्लो, क्या हालचाल जितेश, कैसे हो ?जितेश बोला; क्या भाई तबियत खराब है ?”भाई जितेश तुम अब बार-बार बिमार कैसे हो जाते हो ?” हिमांशु ने पूछा ! “भाई याद है मुझे आज भी वह दिन जब मै बच्चा था,और गाँव में रहता था…

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