कविता और कहानी
प्रधानमंत्री जी की मुरीद सारी दुनिया है
प्रधान मंत्री जी का मुरीद सारी दुनिया है,एक-एक इंसान उनको नमन कर रहा है.जो लोग विश्व-हित में शुभ-कार्य करते हैं,इतिहास उनको युगों तक याद रखता है. ‘कोरोना’ के जाल मेंआज फंसा है संसार,उससे उबर जाना अब बहुत ही जरूरी है.अन्यथा प्रगति की गति ही रूक जायेगी,विकास से सबकी तकदीर जुड़ी रहती है. संकट की घड़ी…
💐 जिन्दगी-अनबूझ पहेली 💐
जिन्दगी इतनी सरल तो कभी भी नहीं थी,कठिनया ऋजु भी रही।लोगों के लिये तो यह ऐसी पहेली जिसको सब ने अपने अपने ढंग से हल करना चाहा,पर वो बिना हल हुएफिसलती रही,मचलती रही।जिन्दगी के अर्थ कोजिसने भी सिर्फ अर्थ में ही ढूंढना चाहा,उसकी जिन्दगी अर्थहीन हो कररह गई।जिन्दगी के अर्थ का वास्तविक मज़ा तोसन्तुष्टि में…
“समय है सतर्क रहने का “
दूर से ही करबद्ध प्रणाम करेंजिम्मेदार बनेकेवल घर परिवार के लिए ही नहींजिसको जहां आवश्यकता हैसहयोग करें समाज औरदेश के साथ खड़े होकरइंसानियत का फर्ज़ निभाए” कोरोना” नाम की महामारी कोआस पास ना और बढ़ाएडरना नहीं समझना है जरूरीघर में रहना ना बाहर जानासावधानी , स्वच्छता का हैपाठ पढ़ना और पढ़ानाहाथो को धोना , चहेरा…
युद्ध जीतने के लिए योजना बहुत जरूरी है
Doctor Sudhir Singh युद्ध जीतने के लिए योजना बहुत जरूरी है,इसके साथ जोश-जुनून ,विवेक भी चाहिए.धीरज का आकलन भी समर में ही होता है,जंग में जागरुकऔर सावधान रहना चाहिए.संकल्प के अभाव में जीतना संभव ही नहीं,सत्प्रयास संकल्प को सदा जीवंत रखता है.‘कोरोना’से महायुद्धआज कर रहा है इंसान,सामूहिक साधना से ही युद्ध जीता जाता है.‘कोरोना’ जानता…
बाहर काल है
विपदा आई जग पर भारी, विष हर ओर है घुल रहा। तांडव फिर से मचा रही, जग में सुरसा मुख खुल रहा। कठिन समय यह जग पर भारी, जब लॉक डाउन सफल बनेगा । संकल्प के अस्त्र से ही बंधु , देश – दुनिया करोना मुक्त बनेगा । लांघो न तुम लक्ष्मणरेखा, घर अपने और…
घर पर खाली समय में क्या करें
मन को फिर बच्चा बनाये कागज़ की नाव बनाये, दूर तलक मनकी पींगें जाए सपनों के आओ महल बनाये।। बुन ले सपनों की दुनिया, मन उलझाके मन सुलझाये। खोलकर मन की अलमारी को, भावों के कपड़ों को जांचे। बदल-बदल कर उन कपडों को, खुद में खुद को पहचाने।। खाली समय में क्या करें, मन की…
प्रकृति का रंग
Dr Rajni Yadav प्रकृति का ये रंग लाजवाब था इंसान घरो में कैद और बेजुबान आज़ाद था हवाएँ यू महकने लगी कोयले पेड़ो पर चहकने लगी नदिया इतनी साफ थी जमीन को आसमान से मिलने की आस थी जो डर अब तक मुर्गियों,मछलियों और बेजुबानो कीआंख में था उसकी झलक इंसानो में साफ़ थी यू…
कहानी : सड़क दुर्घटना
अंधेरी रात और लगभग 9 बजे का समय, मै और मेरा बॉस (राज) उनकी कार से घर लौट रहे थे। हम दोनों एक ही गाव के निवासी थे। वह मुझसे किराया तो नहीं लेता था परन्तु किराए की एवज में मुझे उसकी हां मे हां मिलनी पड़ती थी। उसकी झूठी तारीफ भी करनी पड़ती थी…
