कविता और कहानी
ना दिख मजबूर
रूह की गर्त पर एक नकाब लपेटे हूँ। टूटे सपनो में अब भी आश समेटे हूँ।। दुखों की कड़कड़ाती धूप बहुत है। खुशी की सर्द हवा की उम्मीद समेटे हूँ।। क्यूँ हुआ तू किनारे , सोचता है क्यूँ भला। देख पीपल के नीचे रखे भगवान का नजारा, टूट जाये अगर भगवान की मूरत का कोना,…
नही है कोई रक्षक तेरा ऐ भारत की नारी
नही है कोई रक्षक तेरा ऐ भारत की नारी। करनी होगी तुझ को खुद ही अब अपनी रखवारि। वन कालका या बन चंडी कौइ भी रूप अपना। हाथों मे हथिआर लेकर, तू दैत्य संहार कर डाल। कोई नही आयेगा आगे,कभी तुझ को बचाने। पर आ जायेगें कैई राक्षस ,तुमको जिन्दा जलाने । बंद कर दे…
ऐसे सुधरेगा वहशी समाज
सुबह जैसे ही टी वी खोलते ही लोगों ने हैदराबाद के चारों बलात्कारियों के एन्काउन्टर में मारे जाने का समाचार सुना,तो पूरे देश में खुशी व उल्लास का वातावरण छा गया। ऐसे वीभत्स कांड के इतनी जल्दी पटाक्षेप ने जन मानस में आशा का संचार कर दिया। 16 दिसम्बर को निर्भया कांड को सात साल…
टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी से पस्त जनता !
पहले आम जनमानस को सस्ते काल दर और सस्ती इंटरनेट सेवाओं की लत लगाई फिर धीरे- धीरे दरो को महंगा करते गए और आज हालात ये हो गए है कि आम जनता खुद को ठगा महसूस कर रही । विगत दो साल से जिस तरह टेलीकॉम कम्पनियों ने जनता को लूटा है वो आक्रोश पैदा…
नशे की जद में भामाशाह की नगरी
” लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है “ आज में जिस विषय पर लिख रहा हूँ उस विषय पर बशीर बद्र साहब की यह पंक्तियां एकदम सटीक बैठती नजर आती हैं माफ करना आज में जो लिख रहा हूँ वो शायद आपको बुरा लग सकता है?…
हैदराबाद के दरिंदों को सख्त से सख्त सजा मिले
डॉक्टर सुधीर सिंह हैदराबाद के दरिंदों को सख्त से सख्त सजा मिले,‘डा.दिशा’ के परिवार को शीघ्रातिशीघ्र इंसाफ मिले.बलात्कार के गुनाहगारों को फाँसी मिले चोराहे पर,खौल रहा है खून लोगों का दोषियों की बर्बरता पर.हैवानों की हैवानियत पर शर्मसार है आज मानवता,हृदय विदारक घटनाओं से हतप्रभ हैं भारत माता.कितनी मजबूर ‘निर्भया’की निर्ममता से हत्या होगी?बेमहफूज बेटियों…
रिटायरमेंट-नये जीवन की नई शुरुआत
सेवानिवृत्ति या रिटायरमेंट जीवन का एक अनमोल क्षण होता है।सर्विस के शुरू में ही रिटायरमेंट की तिथि तो तय ही होती है। पर हम पचास नहीं बल्कि पचपन वर्ष की उम्र के बाद ही थोड़े से सावधान होते हैं कि कैसे समय बिताएंगे,कैसे रहेंगे,क्या करेंगे। कुछ तो रिटायरमेंट के बाद ही सजग होते हैं।चाहे कुछ…
जेएनयू की साख बनी रहने दो!
जेएनयू को जनतांत्रिक शिक्षण संस्कृति के लिए जाना जाता है। जेएनयू की एक पूरी सांस्कृतिक विरासत है। जिसके निर्माण के पीछे एक विचार था देश में एक ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना का जिसमें बौद्धिक खुलेपन, विकास-विवाद, सहमति-असहमति और स्वतंत्र जीवन शैली की पूरी गुंजाइश हो, जहाँ पैसे की तंगई प्रतिभाओं के आड़े न आएं।…
फ़िट इँडिया-हिट इँडिया
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होए माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होए कबीर जी के दोहे में धैर्यशीलता का कितना खूबसूरत सँदेश छिपा है।बात केवल इतनी सी है कि किसी भी सोच विचार के बीज को बो देने भर से फ़सल के इँतज़ार में हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाने भर…
वह कौन था!
लघु कथा, 👉वह कौन था!— बात उस समय की है जब वही अपना देश आजाद हुआ था।लोगों मेंईमानदारी तो थी ही पर संसार में बेईमानों की कोई कमी नहीं होती ।एक गाँव था जिसका नामधर्मराजपुर था उसी गाँव के निवासी थे भोला पंडित ।उससमय भोला पंडित के पास खेती करने लायक जमीन तो थी ही…
