Latest Updates

विकार

समाज सहता प्रहार इतने  बहुत जगह वे गड़े मिलेंगे ।  कहीं खुले तो छिपे कहीं पर  दुखी हृदय भी पड़े मिलेंगे ।।  सदा रहा आन बान जग में  सभी तरफ घोष थी जय जय।  पड़ा उसी पर कभी अँधेरा  किताब में वह जड़े मिलेंगे।।  कभी अँधेरा कभी उजाला  चले सतत यह समय निरन्तर।  समय सदा…

Read More

साबरमती के संत

अब तो रह-रह के राजघाट कसमसाने लगा,मुझको साबरमती के संत तू याद आने लगा। गूंथ कर हार भ्रष्टाचार के गुलाबों का,तेरी तस्वीरों पै बेखौफ डाला जाने लगा। तेरे चित्रों से छपे कागजों के टुकड़ों पर,बड़े बड़ों का भी ईमान बेचा जाने लगा। पहले कातिल बने फिर धनी फिर मसीहा बने,ऐसे जन सेवकों का राजतिलक होने…

Read More

आगमन संदेश प्रिय के

साँवरी भूरि धरा पर,  नथ सजा जौ की सुनहरी,  चाँद की बिछिया बना कर भेंटता फागुन ,  लाल दुल्हन की चुनर मे,  पीत स्वर मंगल-ध्वनि मे,  नील डोली की गति मे ,  घोलता फागुन,  चटक नारंगी पुहुप के,  सरस वंदनवार बनकर नव – वधु के आगमन पर डोलता फागुन ,  श्यामवर्णी कोकिला और,  हरित शुक…

Read More

“राखी”

        राखी नाम की एक दुबली-पतली बीमार -सी ,साँवले रंग की एक लड़की,उम्र यही तेरह- चौदह की साल रही होगी । वह आठवीं कक्षा में पढ़ती थी । राखी कक्षा में बिलकुल पीछे बैठती थी। वह हमेशा चुपचाप बैठी रहती शायद इसी लिए उसकी कोई  सहेली भी नहीं बनी थी । हाँ अगर शिक्षिका कक्षा…

Read More

सौंदर्य

सौंदर्य केवल वस्तुओं में नहीं है सौंदर्य केवल मनुष्य में नहीं है सौंदर्य केवल प्रकृति में नहीं है सौंदर्य सर्वत्र व्याप्त भी नहीं है वास्तविक सौंदर्य देखने वाले की आँख में है इस प्रकार सत्यम्-शिवम्-सुंदरम् की परिभाषा अमूल्य, अजान और अमान्य जान पड़ती है जो लोग खोजते हैं सौंदर्य को ईश्वर में जो लोग खोजते…

Read More

यूं तो जरा भी देर न लगी

भावनाओं को कविता का रूप दिया, लेकिन आज क्यों शब्द भी थम से गए, जब से प्रभु श्री राम का नाम लिया। कितनी पवित्र होगी वो स्याही, जो लिखेगी मेरे प्रभु श्री राम का नाम, उस कागज में भी जान आ जाएगी, जिसमें रघुवर के होंगे गुणगान। राम नाम जपता ये जग सारा, पर राम…

Read More

राष्ट्रमुकुट की प्रतीक्षा

कर कर के युग प्रतीक्षा थक जाऊंगी। क्या पता राष्ट्रभाषा कब बन पाऊंगी। मेरी आत्मा से वे चलचित्र बनाते, मेरे वाक्यों से अरबों रोज कमाते, मेरा अधरों पर नाम तक नहीं लाते, उस फिरंगिनी बोली को गले लगाते। सब देशों की प्रिय भाषा बन जाऊंगी, क्या पता राष्ट्रभाषा कब बन पाऊंगी। शिशुओं की मुझसे दूरी…

Read More

मेरा मन

छाया चंहुं ओर अंधेरा है  जन-जन को भय ने घेरा है  धुआं धुआं सा तन मेरा धधक रहा है मेरा मन। माता की छाती छलनी है पापा की पगड़ी उछली है राक्षसों ने नोच-नोच खाया कह रहा भारत मां का क्रंदन। रोता है मेरा रोम रोम चीत्कार करें पृथ्वी व्योम हे धरती मां तू फिर…

Read More

भारत वन्दना

हे जन्मभूमि भारत वन्दन करूंगा तेरा, है कर्मभूमि भारत वन्दन  करूंगा तेरा।          तू चेतना  की  देवी          तू कर्मणा की  देवी          तू भावना की  देवी          तू साधना  की देवी हे कर्षभूमि भारत  वन्दन करूंगा तेरा, हे धर्मभूमि भारत  वन्दन करूंगा तेरा।           तू  एकता  सिखाती           तू  नेकता   दिखाती           तू  नीति  …

Read More

आत्महत्या कोई विकल्प नहीं

नीट की परीक्षा उत्तीर्ण ना कर पाने के कारण स्वाति बहुत उदास हो गई थी। कुछ नंबर की ही कमी रह गई वरना पेपर निकल जाता। यह उसका तीसरा प्रयास था उसे पूरी उम्मीद थी कि इस बार क्वालीफाई कर लेगी। ऊपर से समाचारों में नीट की पारदर्शिता पर उठे सवालों से उसका मन और…

Read More