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“माँ तुझे सलाम “

सीमा गुप्ता (मशहूर शायरा एवं समाजसेवी) लबो पर उसके कभी बद्दुआ नहीं होती बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती “  देश के मशहूर शायर मुनव्वर राना  जी का ये शेर माँ शब्द के आस्तित्व को पूरी तरह  से सार्थक करता  है. माँ जो इस धरती पर खुद भगवन का ही  स्वरुप है…

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सम्मान की धज्जियां उड़ाता लूटतंत्र !

खुला समाज कभी खुला नही होता, रैपर में बंद होता है। पैक्डनेस ही ओपन सोसाइटी है , अपनी पॉलिटिक्स है अपना रहन सहन है ।ओपन सोसाइटी में अभिव्यक्ति का खुलापन किसी मुखौटे को लगा कर ही पाया जाता है ताजा उदाहरण विधानसभा में अखिलेश यादव जी है । मुखौटा लगाने और उसे ही वास्तविक चरित्र…

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राम का नया स्कूल

          राम एक नवी कक्षा का विद्यार्थी है और हमेशा से पढ़ने लिखने में बहुत ही अच्छे दिमाग का रहा है।आठवी कक्षा तक उसकी अटेंडेंस हमेशा पूरी रहती थी और उसकी पिछली कक्षा आठवीं में तो उसकी अटेंडेंस लगभग 97% थी।          इससे उसकी टीचर भी उससे बहुत…

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तुझे वो किरदार होना पड़ेगा.

बकाया बहुत हैं मेरे सपने तुमपे,तुम्हें बेहिसाब होना पड़ेगा , रहोगे कब तक यूं दायरों में, अब तुम्हें आसमां होना पड़ेगा !! हर्फ-हर्फ लिखते रहे “क़िस्से”, जिसके हम अपनी सांसों पर , सब समेट लो संग अपने कि, अब तुम्हें किताब होना पड़ेगा !! सुनो, सरेआम शर्मसार न कर दें कहीं वो लोग, “हमारे खत”,…

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स्त्री

स्त्री जब खुश होती है बर्तन माजते माजते कपड़े धोते-धोते  रोटी बेलते बेलते सब्जी में छोका लगाते लगाते  भी गुनगुनाती है कभी अकेले खामोश चारदीवारी में भी गुनगुनाती है सुबह से शाम तक  चक्की की तरफ पिसते पिसते  भी खुश होकर गुनगुनाती है वह बच्चों की भागमभाग बच्चों की फरमाइश  और रिश्ते नाते निभाते निभाते…

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होली में मचो है धमाल

होरी में मचो है धमाल कान्हा नगरी में, उड़ रयो देखो गुलाल, कान्हा नगरी में, मस्ती देखो ब्रज में छाए -2 गोपी-ग्वालवाल रंग लगाएँ  -2 अंबर भी देखो भयो लाल कान्हा नगरी  में, होली में मचो है धमाल ——— राधे श्याम के रंग में रंग जाओ -2 राधे-राधे मिल सब गाओ  -2 बड़ो नटखट  यशोदा…

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खिल उठे मानवता

श्रीमती कविता मल्होत्रा वसुदेव कुटुंब आज अपनी ही नाफ़रमानियों के कारण ख़तरे में है।कितनी अज़ीज़ रही होगी परम पिता को उसके अँश की हर एक प्रजाति जिसे उन्होंने एक उद्देश्य पूर्ण यात्रा के लिए धरती पर भेजा। प्रकृति समूची मानव जाति को निस्वार्थ सेवा का संदेश देती है लेकिन मानव औद्योगिक शिक्षा प्राप्त करके प्राकृतिक…

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“दुकानदारी”

सज्जन सिंह शहर में कोई    बड़ा नाम तो नहीं था लेकिन विश्वास का नाम था। उनकी एक छोटी सी दुकान हुआ करती थी। खूब चलती थी। कोई सामान शहर की बड़ी से बड़ी दुकान पर नहीं मिलता तो सज्जन सिंह की दुकान पर मिल जाता। यही वजह थी कि सारा शहर उन्हे जनता था। सज्जन…

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‘पुष्प’-‘मधुप’ जयपुर में ग्लोबल एक्सेलेंसी अवार्ड – 2023 से हुए सम्मानित

नई दिल्ली – श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष के रूप में कार्यरत प्रतिष्ठित व्यंग्यकार एवं कवि प्रो. रवि शर्मा ‘मधुप’ एवं वरिष्ठ हिंदी शिक्षिका एवं प्रख्यात बाल साहित्यकार डॉ. सुधा शर्मा ‘पुष्प’ को जयपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मैत्री सम्मेलन और ग्लोबल एक्सेलेंसी अवार्ड – 2023 में…

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आंधे की माक्खी राम उड़ावै

हमारी बोलचाल, प्यार, उलाहनों और कहावतों में रचे बसे है श्रीराम    — डॉo सत्यवान सौरभ,   राम-राम जी। हरियाणा में किसी राह चलते अनजान को भी ये ‘देसी नमस्ते’ करने का चलन है। यह दिखाता है कि गीता और महाभारत की धरती माने जाने वाले हरियाणा के जनमानस में श्रीकृष्ण से ज्यादा श्रीराम रचे-बसे हैं।…

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