गहन मंथन और अध्ययन के बाद का सत्य !
यदि कुछ ऐतिहासिक प्रसंगों पर नजर डाले तो पुरातन समय में बहुत सारी घटनाएं ऐसी है जिसके विषय में चिंतन , मंथन और गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है । जिसके बाद ये पता लगता कि काश यह ना होता तो इतिहास दूसरा होता । ऐसे ही कुछ प्रमुख घटनाओं ने हमारी भारतीय संस्कृति और…
चीन को जवाब
गिरगिट सा रंग बदलने लगा है कोई, हाथ मिला कर मुकर जाता है कोई दोस्ती मे हमारी नहीं है ऐसी फितरत हर बार दोस्ती मे गद्दारी करता है कोई ये मत सोच लेना की कोरोना वायरस बनाकर तुमने दुनियाँ मे धाक जमाई है ! अभी तक तुमको मिला नहीं बाप कोई अभी तो तुम्हारी वो…
समरथ को नहीं दोष गुसांई
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव रावण की ऊंचाई और बढ़ा दी गई है । रावण तो हर साल ऊंचा होता जा रहा है, उसे जितना भी ऊंचा हम बनाते जा रहे हैं उतना ही रावणीय कृत्य भी बढ़ता जा रहा है । हम तो रावण के पुतले का दहन इस विचार के साथ करते हैं कि रावण…
रहे इस रूह की चूनर धानी
मौसम ने करवट ली और शीत ऋतु ने आगमन की सूचना दी है।लेकिन भानु काका के तेवर अब भी तीखे हैं।ग्लोबल वार्मिंग की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय मानव जाति अब भी बदन उघाड़ू परिधानों के फ़ेवर में है।समस्या के मूल में न जाकर सतही समाधान खोजना और लापरवाही से संतुष्ट हो जाना ये असँवेदनशील पीढ़ी…
संकीर्ण सोच से सजी व्यवस्था में
डॉक्टर सुधीर सिंह संकीर्ण सोच से सजी व्यवस्था में, इंसान से ज्यादा शैतान ही है यहां। कुछ व्यक्ति कहे तो कोई बात नहीं, यह तो यहां के समूह का है कहना। प्रश्न की गंभीरता ने जोर देकर कहा, जरा इस सच्चाई का पता तो लगा। गौर से देखा तब घर-घर काआंगन, लग गया कुछ तो …
गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’
(26 अक्टूबर, 1890 से 25 मार्च, 1931) प्रारंभिक जीवन :- गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’ का जन्म 26 अक्टूबर, 1890 को इलाहाबाद के अतरसुइया मुहल्ले में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम जयनारायण था जो हथगाँव, (फतेहपुर, उत्तर प्रदेश) के निवासी थे। उनके पिता एक गरीब और धार्मिक प्रवित्ति पर अपने उसूलों के…
साहित्य वो कला है जो आत्मा से परमात्मा को मिलाती है तीरथ सिंह रावत
साहित्य कला भारतीय संस्कृति को समर्पित उत्तराखंड की जिया साहित्य कुटुंब संस्था की ओर से राष्ट्रवादी कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि देव भूमि मैं देश के अलग-अलग हिस्सों से कलम कारों को बुलाकर साहित्य और सम्मान समारोह आयोजित करना एक बड़ी बात है और देव भूमि की…
कर ऊर्ध्व चेतना जाग्रत मन
ब्रह्माण्ड रूपिणी भाव और चेतना स्वरूपिणी असुरत्व नाशिणी है अनादिकाल से संकल्पित तू दानव प्रकृति को मुक्ति दे देवत्व भाव से अग जग भर मन को प्रकाश ते भर दे माँ। था घनान्धकार था रुका काल गति बाधित थी सरिताएँ नही प्रवाहित थी संचरित नही वायु थी कहीं जीवत्व नहीं पोषित था कहीं अंधकार नष्ट…
