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नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल देवी के नवरात्र तब, लगते सभी फिजूल क्या हमारा समाज देवी की लिंग-संवेदनशील समझ के लिए तैयार है? नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है।  पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं। बहुत जगह कन्याओं का शोषण होता…

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प्रिवांशी होंगी राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान से सम्मानित

गंतव्य संस्थान द्वारा आयोजित 25 वें राष्ट्रीय स्त्री प्रिवांशी जी को सम्मानित किया जाएगा . यह सम्मान उनके महिला हिंदी साहित्य लेखन के कार्यो और सेवा भाव को देखते हुए  दिनांक 30 अगस्त 2025 कांस्टीट्यूशन  क्लब आफ इंडिया रफ़ी मार्ग  नई दिल्ली ,जिसमें सभी सम्मानित सदस्यों के साथ दिया जायेगा . इस सम्मान सम्मान हेतु…

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गहन मंथन और अध्ययन के बाद का सत्य !

यदि कुछ ऐतिहासिक प्रसंगों पर नजर डाले तो पुरातन समय  में बहुत सारी घटनाएं ऐसी है जिसके विषय में चिंतन , मंथन और गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है । जिसके बाद ये  पता लगता  कि काश यह ना होता तो इतिहास दूसरा होता । ऐसे ही कुछ प्रमुख घटनाओं ने हमारी भारतीय संस्कृति और…

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क्या हो गया है इन औरतों को?

“जब कोई महिला अपराध में शामिल होती है, तो समाज उसकी परवरिश, चरित्र और कोमलता पर सवाल उठाता है, जबकि पुरुष अपराधियों को अक्सर सहानुभूति या ‘दबंगई’ का जामा पहनाया जाता है।  अपराध का कोई लिंग नहीं होता और स्त्री भी इंसान है — जिसमें अच्छाई-बुराई, स्वतंत्रता और जिम्मेदारी, सब कुछ समाहित है। समाज को…

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उम्मीद के दीप

माना रात घनी है,घोर तमस से भरी है। उजियारी भौंर के सामने कई चुनौतियाँ धरी हैं। तुम सूरज पर एतबार बनाए रखना। उम्मीदों के दीपक जलाए रखना। मंजिल बहुत दूर हो,दर्द बेहिसाब हो। सबसे मेरा रश़्क हो,उजड़े हुए मेहताब हो। जुगनुओं से इल्तिफात तुम बनाए रखना। उम्मीदों के दीपक जलाए रखना। मंज़र-ए-नदीश में कष्ट इफरात…

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काले कोट, काले नोट और काले चश्मे वालों का काला षड्यंत्र

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  इंसान को जस्टिस शेखर यादव की तरह स्पष्टवादी होना चाहिए वरना तो कई लोग केवल चुनावी टिकट के लिए काला कोट पहन आतंकियों को आधी रेत बेल दिलवाने के लिए जद्दोजहद करते है और अब जजों को महाभियोग की धमकी दें रहे। खैर जस्टिस शेखर…

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कभी भी करो-ना तेरा-मेरा

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी पिछले काफ़ी समय से ये जुमला जनमानस की मानसिक अवस्था की सटीक अभिव्यक्ति बना हुआ है।जिसका एकमात्र कारण है – “मैं और मेरी खुशी”! लगभग हर व्यक्ति मैं-मेरी के कोरोना से ग्रस्त है, जिसके चलते,परस्पर भेदभाव की प्रतिस्पर्धा बाज़ारों से अब हर दिल…

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( हास्य कविता ) मेरे पति

1 जब जब बीमार मैं पड़ती हूँ पति मेरे प्रेम पूर्वक रूबाब मुझे दिखाते है ख्याल नही रखती अपना सैर भी तेरी बंद है दूर मैं तुमसे रहता हूँ फ्रिक तुम्हारी करता हूँ नौकरी छोडूँ , घर बैठूँ बोलो , तुम क्या कहती हो 2      जब जब बीमार मैं पड़ती है पति मेरे  , दोस्त…

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धंधा है सब : मुर्ख को गद्दी और चालाक को हड्डी

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी जीवन में अंतस आनंद के निमित्त दो चीजों को कभी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए प्रथम  के कण को और द्वितीय आनंद के क्षण को। यथावादी कहते है आधुनिक समय में प्रेमत्व का कोई मोल नहीं अपितु अपनत्व के मॉल ही मॉल है जहाँ पैसे…

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दो-दो हिन्दुस्तान

लाज तिरंगें की रहे, बस इतना अरमान ।मरते दम तक मैं रखूँ, दिल में हिन्दुस्तान ।।●●●बच पाए कैसे भला, अपना हिन्दुस्तान ।बेच रहे हैं खेत को, आये रोज किसान ।।●●●आधा भूखा है मरे, आधा ले पकवान ।एक देश में देखिये, दो-दो हिन्दुस्तान ।।●●●सरहद पर जांबाज़ जब, जागे सारी रात ।सो पाते हम चैन से, रह…

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