कविता – आ देख
तेरी याद में मैं दिन-रात भुलाए बैठा हूं आ देख मैं फिर मुस्कुराए बैठा हूं। वह जो तेरी कमी थी मेरे सीने में, उसकी मजार बनाए बैठा हूं, आ देख मैं फिर मुस्कुराए बैठा हूं। जमाने की परवाह ना मुझे कल थी ना आज है मुझे तो लग रहा था तू हर हाल में मेरे…
