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तू चल मैं आया ! : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा                                                                          चलो कपिल सिब्बल भी चल दिए दूसरे घर की ओर उन्हें राज्यसभा मेें जो जाना था । कुर्सी चाहिए जहां मिल जाए । नेता तो रमता जोगी बहता पानी जैसा होता है । आज यहां कल कहां उसे खुद ही नहीं मालूम होता । कुर्सी चाहिए, वे बगैर कुर्सी के नहीं रह सकते…

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास : लाल बिहारी लाल

आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद…

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लोकप्रिय,सशक्त एवं सजग प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां

जिन्होंने  दृढ़-संकल्प लिया है; नया इतिहास हमें  गढ़ना है,विकसित राष्ट्रों की सूची में,हिंदुस्तान को शीर्ष पर रखना है.प्रभु!उस नरक्ष्रेष्ठ नरेंद्र मोदी को स्वस्थ,सुखी,दीर्घायु रखना,उन्होंने जो प्रण ठान लिया है,उसे पूरा करने की शक्ति देना.130 करोड़ जनता की शुभकामनाएं हैं नरेंद्र मोदी के साथ,नरेंद्र!तुम्हें जन्मदिन मुबारक हो,भारत माँ का है आशीर्वाद.

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हरा भरा खेत

बारिश हुई झम झमाझम , मेढ़क टर्र टर्र टर्रा रहे हैं । झींगुर बजा रहे शहनाई , केंचुए मिट्टी ये खा रहे हैं ।। पहले जो पड़े हुए थे श्वेत , आज हुए हरे भरे ये खेत । कह रहा है हर्षित बादल , चल किसान अब तो चेत ।। पड़े जो अब तक विरान…

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हमारा जीवन हमारे कर्मों की आधारशिला है

This is the Universal  Truth. यह एक सार्वभौमिक सत्य है हम जो ब्रह्मांड को देते हैं वही लौटकर हमारे पास आता हैl हम जो बोते हैं हमें वहीं काटना पड़ता है lआज की इन परिस्थितियों में संत कबीर के दोहे एकदम सटीक प्रतीत हो रहे हैं …..   “करता था सो क्यों किया अब कर…

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भारत वन्दना

हे जन्मभूमि भारत वन्दन करूंगा तेरा, है कर्मभूमि भारत वन्दन  करूंगा तेरा।          तू चेतना  की  देवी          तू कर्मणा की  देवी          तू भावना की  देवी          तू साधना  की देवी हे कर्षभूमि भारत  वन्दन करूंगा तेरा, हे धर्मभूमि भारत  वन्दन करूंगा तेरा।           तू  एकता  सिखाती           तू  नेकता   दिखाती           तू  नीति  …

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राष्ट्रीय लूट प्रबन्धन में हम कितने अव्वल !

कोरोना जैसी महामारी में भी हमने जितना लूटते बना हमने लूटें कभी डॉक्टर बनकर तो कभी पुलिस बनकर , कभी व्यापारी बनकर तो कभी सस्ते गल्ले का दुकानदार बनकर । सरकारे ने भी आम जनता को लूटने में कोई कोर कसर नही छोड़ी । विश्व का सबसे बड़ा नोटतांत्रिक देश भारत बन ही गया ,जहां…

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रिश्ता आत्मा का-(चूड़ीवाला)

कहानी बहुत पुरानी है———। –मईयाँ—–मईयाँ—-। यह स्वर सुनते ही सुधा दौड़कर दरवाजे पर गयी।उसका हृदय खुशी से भर गया। दृष्टि हाथों की कलाईयों पर जा पड़ी। यह स्वर चूड़ीवाले काथा। माथे पर चूड़ियों कीटोकरी।कमर में चारखाने की रंगीन  लुंगीलपेटे वह दरवाजे पर आकर हाँक लगा रहा था।उसकी कमीज सफेद थी जिसकी पूरी बाहों को उसने…

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साहित्यिक गुरुओं , अध्यात्मिक जगद्गगुरु एवं साहित्यिक विभूतियों ने किया 11 पुस्तकों का लोकार्पण

नयी दिल्ली ( 8 जुलाई (शनिवार), गाँधी शांति प्रतिष्ठान , आई टी ओ, दिल्ली में अनुराधा प्रकाशन द्वारा पुस्तकों का लोकार्पण, काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया , आयोजन में प्रयाग पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज , प्रोफेसर (ग्रुप कैप्टेन) ओ पी शर्मा जी (महानिदेशक-महर्षि विश्विद्यालय, नॉएडा), श्री पवन…

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लुईस ब्रेल के आविष्कार ने दृष्टिबाधित दिव्यांगों की शिक्षा में क्रांति को जन्म दिया

#(विश्वब्रेलदिवसपरविशेष) भगवान द्वारा दिया गया सबसे कीमती उपहार इस रंगीन और खूबसूरत दुनिया को देखने की क्षमता है। अफसोस की बात है कि दुनिया में हर कोई इसे नहीं देख सकता। हालांकि 1829 में लुई ब्रेल ने ब्रेल का आविष्कार करके अपने अंधे समाज को एक महान उपहार दिया। हर साल 4 जनवरी को विश्व…

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