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धीरे – धीरे हम भारतीय संस्कृति को स्वयं नष्ट करते जा रहे..!

ग्रामीण क्षेत्रों में माहौल बदल रहा और अब आधुनिकता के नाम पर जो कुसंस्कृति कभी शहरों की पहचान मानी जाती थी अब गांवों में पैर पसार चुकी है । आधुनिकता के नाम पर जमकर अश्लिलिता परोसी जा रही और इसका लुत्फ घर के सभी सदस्य उठा रहें । अगर बात करें शादी विवाह में बढ़ते…

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भारत के वीर पुत्र को नमन हमारा है

जय माँ भारती , माँ भारती, जय माँ भारती….. (1)माँ भारती का लाल जब सरहद पर लड़ने जाता है।उड़ उड़ के मिट्टी बदन को चूमे दुश्मन भी थर्राता है।ऐसे भारत के वीर पुत्र को नमन हमारा है…… (2)सीना तान के माँ मस्तक पर शौर्य तिलक करती है।वीर सिपाही जब घर से विजय पताका लेके चलता…

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बलात्कार की व्यापकता

  डॉ. अवधेश कुमार अवधजब से मूलभूत आवश्यकताओं के अभाव में लोगों के मरने की समस्या खत्म हुई है, मानव जनित एक नई समस्या ने आकर समाज को घेर लिया है। मानव द्वारा मानव का बलात्कार। उम्र और लिंग को नजरअंदाज करते हुए बलात्कार। निजी और सार्वजनिक स्थलों पर बलात्कार। दुधमुहे बच्चों से लेकर मरणासन्न तक…

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कोऊ नृप होऊ, हमें का हानि……..

आजकल बड़े बैनर के अखबारों का झुकाव विज्ञापन के लिए काफ़ी हद तक सरकारों के पक्ष में रहती है। शुरुआती  दिनों में मैं ज़ब अखबार में काम नहीं  करता था और दुर्भाग्य से एक बार एक अख़बार खरीद लिया था। उसमें लिखा था सरकारी  छँटनी होनी थी वो हो चुकी थी औऱ हम कुछ ऐसे…

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इन्द्रधनुषी रंगो और उमंगों का पर्व है होली -लाल बिहारी लाल

भारत में फागुन महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन हर्षोउल्लास के साथ मनाये जाने वाला विविध रंगों से भरा हुआ हिदुओं का एक प्रमुख त्योहार है-होली।होली का वृहद मायने ही पवित्र है। पौरानिक मान्यताओं के अनुसार फागुन माह के पूर्णिमा के दिन ही भगवान कृष्ण बाल्य काल में राक्षसणी पुतना का बध किया था…

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लक्ष्मी बाई प्रशिक्षण संस्थान NGO द्वारा ऑनलाइन डान्स प्रतियोगिता का आयोजन

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में लक्ष्मी बाई प्रशिक्षण संस्थान NGO द्वारा ऑनलाइन डान्स प्रतियोगिता देशभक्ति गीतों पर बहुत सुंदर नृत्य किया इसमें 100 प्रतियोगियों ने हिस्सा लियाइस कार्यक्रम के मुख्य संयोजक डॉक्टर पवनदीप कौर स्ट्रॉबेरी किड्ज़ प्ले स्कूल की प्रधानाचार्या जी के निर्देश द्वारा चलाया गया हरमीक कौर ,नेहा शर्मा,ईशा शर्मा ,अध्यक्षा सीमा…

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आखिर क्यों बदल रहे हैं मनोभाव और टूट रहे परिवार?

भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया है. पत्थर होते हर आंगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा है. आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए है. बड़े-बुजुर्गों की…

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देश को प्लास्टिक मुक्त बनाने की कमजोर मुहिम से कैंसर का खतरा चरम पर ..!

आज विश्व में कैंसर एक लाइलाज बीमारी के रूप जानी जाती है , उसके लाइलाज होने के पीछे हम आप और बढ़ता प्लास्टिक उपयोग है । सिंगल यूज प्लास्टिक सबकी जरूरत बन चुकी है और एक सर्वे के मुताबिक विश्व का 40% कैंसर प्लास्टिक के उत्पादों, प्लास्टिक के अवयवों या प्लास्टिक के कारण विकसित होता…

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राफेल की नींबू – मिर्ची

अपने देश के भीमकाय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह  जी ने  राफेल को छोटा सा नीबू क्या चढ़ाया  बाकी कांग्रेसियो को बड़ी सी मिर्ची लग गयी । अजीब बात है कुछ ना मिले तो नीबू मिर्ची को ही राष्ट्रीय मुद्दा बना दो और फिर अंधविश्वास – अंधविश्वास करके पूरे भारतीय संस्कृति का सत्यानाश कर दो । कब…

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फर्क

बाबूजी तो भेदभाव बहुत ही करते हैं। बेटियों के लिए मरे ही जाते हैं। यहाँ सेवा हम करें, बुराई भलाई-फोड़ते हैं बेटियों से। श्यामा प्रसाद जी की बहू का रोज ही शगल था। वह जरा ही अपनी बेटी से फोन पर बात करने क्या लगते हैं बहु को पतंगे लग जाते। पत्नी के गुजर जाने…

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