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घुटन (कहानी) – डॉक्टर सरला ‘सिनिग्धा’

           मैम मैं भी बहुत लिखती थी । किसी भी घटना को कलमबद्ध कर लिया करती थी । कुछ कहानियाँ व कविताएँ भी लिखी थीं,पर मेरे घर में कुछ भी अपना व्यक्तिगत नहीं है ।             मतलब ?मैं कुछ अनजान सी छेड़ते हुए बीच में बोल पड़़ी ।        मतलब कोई किसी की भी डायरी…

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आयी हैं माँ

हाथी की सवारी पर आयी हैं भवानी करने कल्याण सबकी माता रुद्राणी। चँवर डुलाओ माँ की आरती उतारो अगर कपूर संग घृत दीप जलाओ । चमके मैया के माथे मुकुट स्वर्ण का आओ जी सखी दर्शन माँ के पाओ। ममता की मूरत हैं माँ अम्बे यह मेरी आयी हैं विनती सुनने माता ब्रह्माणी। जीवन जगमग…

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हमने महंगाई, बेरोजगारी नहीं दी”: राहुल गांधी

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश में महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों का हवाला देते हुए गुरुवार को भाजपा पर तंज कसा. फेसबुक पर राहुल गांधी ने लिखा कि बीजेपी हमसे पूछती है कि हमने 70 साल में क्या किया? मेरा जवाब है कि हमने देश को महंगाई और बेरोजगारी इतनी नहीं दी,…

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सोच बुद्धि और विचार – आशा सहाय

मैंने अपने चिन्तन की प्रक्रिया का आरम्भ संभवतः रात्रि के आकाश के निरीक्षण से ही किया था। निश्चय ही बाल मन की जिज्ञासा के तहत ही तरह तरह के प्रश्नों को जन्म देने वाली यह क्रिया अब एक विशाल चिन्तन प्रक्रिया बन गयी है और अन्ततः क्यों ,कैसे , कौन जैसे प्रश्नों से मस्तिष्क वैसे…

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होइए वहीं जो राम रचि राखा !

” राम ही जाने ,राम की लीला ” यह महज एक सोच ,एक भाव नहीं अपितु पूर्ण सत्यता है । “जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्ह तैसी”  का परम भाव भी जागृत हुआ, लोगो ने 5 अगस्त को अयोध्या में जो हलचल ,जो त्योहार देखा उसमें निश्चित ही उन्हे रामराज्य नजर आया होगा…

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संतोष (लघुकथा)

    शाम होते-होते सूरज ढलने लगा। उम्मीदों के दीप बूझने लगे मगर सबको अपना-सा लगने वाला रमेश फिर कभी उन लोगों के बीच कभी नहीं लौटा जिनके लिए आधी रात को भी मुसीबत आए तो तैयार हो जाता था। गॉंव छोड़ शहर की नौकरी में ऐसा उलझा की घर बसाना ही भुल गया। गॉंव भी…

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आना होगा भारत में :  डॉक्टर चंद्रसेन शर्मा

आना होगा भारत में,  उन वीरों की माताओं को। फिर से शिवा करें पैदा, जो लिखें उन्हीं गाथाओं को।।  देश के दो नेताओं ने,  आजादी से अपधात किया।  भगतसिंह तेरे भारत को, दो हिस्सों में बांट दिया।। चले गए गोरे भारत से, अपने तखतो ताज हुए। दी भुला शहादत वीरों की, ये कुर्सी के मोहताज…

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वीआईपी कल्चर

बेटी के स्कूल का एनुअल फंक्शन था। रितिका जाना भी नहीं चाह रही थी लेकिन बेटी को प्राइस मिलना था इसलिए उसे जाना पड़ा। 6:00 से फंक्शन स्टार्ट था शाम को। इसलिए समय से ही चली गई। ऑडिटोरियम में चार लाइन कुर्सियों की वीआईपी के लिए रिजर्व कर रखी थी जिन पर सफेद कवर भी…

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अजूबा प्रजातंत्र है,कुहरन भरी आजादी है

ठोकर खाने पर भी संभलता नहीं बेईमान, कुछ दौलत के लिए वह बेच देता है ईमान. बेइज्जती का उसको कुछ भी परवाह नहीं, धन-पद के  पीछे-पीछे  भागता है बेलगाम. समाज में  ईमानदार आदमी का अभाव है, शुभ सलाह  मानने को कोई  नहीं तैयार है. गरीबी व बेरोजगारी  समाज में बरकरार है. खुलेआमअट्टहास यहां करता व्यभिचार…

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डॉ अरुणा पाठक आभा को मिला साहित्य गौरव पुरस्कार

डॉ अरुणा पाठक आभा को मिला साहित्य गौरव पुरस्कार  सुरेंद्र शर्मा जी के द्वारा सम्मान  ।      विंध्य प्रदेश रीवा से डॉ अरुणा पाठक को सुरेंद्र शर्मा के  द्वारा  दिल्ली में हिंदी भवन मैं आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया गया    टू मीडिया के संपादक आदरणीय ओम प्रजापति जी के और साथ में बेंगलुरु से पधारे हुए…

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