घुटन (कहानी) – डॉक्टर सरला ‘सिनिग्धा’
मैम मैं भी बहुत लिखती थी । किसी भी घटना को कलमबद्ध कर लिया करती थी । कुछ कहानियाँ व कविताएँ भी लिखी थीं,पर मेरे घर में कुछ भी अपना व्यक्तिगत नहीं है । मतलब ?मैं कुछ अनजान सी छेड़ते हुए बीच में बोल पड़़ी । मतलब कोई किसी की भी डायरी…
