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लोकसभा चुनाव के लिए आप ने दिल्ली से उतारे चार उम्मीदवार

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मंत्री गोपाल राय ने बताया है कि सभी समीकरण और इंडिया अलायंस के साथ हुए गठबंधन को ध्यान में रखते हुए कैंडिडेट के नामों की घोषणा की गई है।कुलदीप कुमार को पूर्वी दिल्ली, सोमनाथ भारती को नई दिल्ली, सहीराम पहलवान को दक्षिणी दिल्ली और महाबल मिश्रा को…

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खिल उठे मानवता

श्रीमती कविता मल्होत्रा वसुदेव कुटुंब आज अपनी ही नाफ़रमानियों के कारण ख़तरे में है।कितनी अज़ीज़ रही होगी परम पिता को उसके अँश की हर एक प्रजाति जिसे उन्होंने एक उद्देश्य पूर्ण यात्रा के लिए धरती पर भेजा। प्रकृति समूची मानव जाति को निस्वार्थ सेवा का संदेश देती है लेकिन मानव औद्योगिक शिक्षा प्राप्त करके प्राकृतिक…

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अवस्था कोई भी हो व्यवस्था प्राकृतिक ही होनी चाहिए

कविता मल्होत्रा करोना काल ने ये तो साबित कर ही दिया कि शिक्षा सिर्फ़ पुस्तकों से सीखना और तथ्यों को कंठस्थ करना मात्र नहीं है।बल्कि प्रकृति के हर क़दम का अवलोकन करने की सतत प्रकिया है, जिसमें जीवन का सार छिपा है।हर मौसम,पत्तों के झड़ने,उगने बहार और इंतज़ार के सहज स्वीकार करने की क्रियाएँ सिखाता…

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मर्यादा पुरुषोत्तम राम

श्रीराम ही मेरे शक्ति के दाता दर्शन मात्र से सारे सुख पाता। जब ध्यान लगाएं हरदम तुझमें पुनीत विचार सब समाए मुझमे। श्री राम की छवि बड़ी निराली कण -कण में समाई खुशहाली। सारा जग होता तुझसे ही रोशन प्राणी पाते धन धान्य और पोषण। सांस सांस में है बसा नाम तुम्हारा मर्यादा पुरुषोत्तम राम …

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नाटिका : “मिच्छामी दुक्कडम “

पात्र परिचय: 1 नव्या एक स्कूल गर्ल। उम्र 17 वर्ष2_ नीलू कॉलेज गर्ल उम्र 18 वर्ष3_झलक कॉलेज बॉय उम्र 20 वर्ष4_ मां उम्र 50 वर्ष5 पिता उम्र 54 वर्ष 6 नाना जी (बूढ़े आदमी साधु यानी भिक्षु वेश में) उम्र 75 वर्ष7_ नानी जी (बूढ़ी महिला साध्वी वेश में श्वेतांबरी सफेद साड़ी पहने हुए, मुंह…

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मातृ भाषा

हमारी मातृ भाषा है हमारी जान है हिन्दी।सदा हम पूजते इसको हमारा मान है हिन्दी।। सुता यह देववाणी की बड़ी भाषा सभी से है।लिए भण्डार शब्दों का विपुल ये ज्ञान है हिन्दी।। करो सम्मान सब इसका उठाके शीश को अपने।सुनो हिन्दी कहो हिन्दी हमारी शान है हिन्दी।। सहज सा रूप है इसका लिए ये भाव…

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सलाह देने की आदत

हेमंत जी अपना घर बड़े मन से बनवा रहे हैं। कोई कसर न छोड़ी मकान बनवाने में। पूरी जिंदगी का ख्वाब जो पूरा हो रहा था उनका। बचपन से ही पुराने मकान में रहते हुए जिंदगी गुजर गई। अब अपने मकान का घर का सपना पूरा हो रहा था। सारा दिन मकान बनवाने की भागा…

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लघुकथा – 15 अगस्त और दादी माँ की आशाएं

          पंकज की दादी 15 अगस्त की सुबह जल्दी से ही तैयार हो गयी थी।जैसा कि उसे मालूम था कि 15 अगस्त पर सभी टीवी के समाचार चैनलों पर भारत देश के सैनिकों को दिखाया जाता है।हर बार की तरह वह भी अपने पोते पंकज की एक झलक पाने के लिए टीवी के सामने बैठ…

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रहे इस रूह की चूनर धानी

मौसम ने करवट ली और शीत ऋतु ने आगमन की सूचना दी है।लेकिन भानु काका के तेवर अब भी तीखे हैं।ग्लोबल वार्मिंग की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय मानव जाति अब भी बदन उघाड़ू परिधानों के फ़ेवर में है।समस्या के मूल में न जाकर सतही समाधान खोजना और लापरवाही से संतुष्ट हो जाना ये असँवेदनशील पीढ़ी…

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होली महापर्व

विधा:-विधाता छंद मनाते होलिका मन से, सभी त्यौहार से बढ़कर।  बनें पकवान पूजा के, गुलरियों माल घर रख कर।  बड़ी होली रखें गावों, लकडियाँ बीच में रख कर।  सुहाना फाल्गुन महीना, मनाते पूर्णिमा तिथि पर॥  जलाते पूजकर होली, सभी जन फाग गाते हैं।  जलाने घर रखी होली, वहीं से आग लाते है।  नये गेंहू भुजीं…

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