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माया मिली ना राम, बन गए आंदोलनजीवी !

खद्दर डाल कर ,दरी बिछाकर बिसलेरी का जल पीने वाले देश के परजीवियों को प्रधानमंत्री जी ने आंदोलन जीवी कह दिया । अखिलेश यादव भी खुद को रोक नहीं पाए और खुद को लपेटे में लेकर भाजपा को चन्दा जीवी कह दिया । आप के भगवंत मान ने तो टूल्ल होकर रक्तजीवी कह दिया और…

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उनका मसाज कराना :  कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

सभी की अपनी-अपनी किस्मत होती है, इसमें चिढ़ने की क्या जरूरत है । सत्येन्द्र जैन की किस्मत का ही कमाल है जिस जेल में उन्हें चक्की की रोटयां बनानी चाहिए उस जेल में वे मसाज कराते दिखाई दे रहे हैं । भाजपा वालों को इसमें चिढ़ क्यों हो रही है । अरे वो मंत्री हैं…

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भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार बन गया शिष्टाचार भुखमरी-गरीबी का गरम बाजार सरकारी योजनाओं का व्यापार लालफीताशाही का अत्याचार जनतंत्र बन गया आज मजाक, संसद में जा बैठे चोर हजार कुर्सी की खींचतान में नेताओं ने प्यारे भारत की अवाम दी मार हे! सुभाष,भगत, बिस्मिल, असफाक कब होगा भारत भू पर सच्चा उजियार फैला साम्राज्य पाश्चात्य संस्कृति का भारतीय…

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उड़ान

जीवन की मुश्किल राहों में थकना न है… सपनों की उड़ान को पंख लगाने है .. हौसले बुलंद करके मंजिल को पाना है … हौंसले बुलंद हो तो पत्थर भी पानी बन जाता …. इरादे मजबूत हो तो पत्थर भी पिघल जाते …. जीवन में कोई भी बाधा आए सभी अपने आप ही हट जाती…

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बाल गोपाल छवि अति सुंदर

मंजू लता (राजस्थान) बाल गोपाल छवि अति सुंदर,सभी का मन मोहने वाली,कमल के समान सुंदर नयन ,मुस्कान जैसे चन्द्रमा की चाँदनी,और झांकते मोती जैसे दाँत ,अति सुंदर ,अति सुंदर। माथे पर मोर पंख मुकुट ,गले में वैजयंती माला ,कानों में कुण्डल,पीताम्बर धारण कर ,पावों में पैंजनिया ,कमर पर करधनी रूनझुन करती,ठुमक ठुमक कर चलते ,बड़े…

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अभ्युत्थानम्  धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्…..

पंकज कुमार मिश्रा, मिडिया विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  महाभारत के बाद युधिष्ठिर आश्चर्य में डूब गए। धीमे स्वर में माधव से कहा – यह महाभारत क्यों हुआ ? जबकि वह स्वयं जानते थे कि श्री कृष्ण नहीं होते तो पाण्डु पुत्र भिखारी होते, जैसे 1985 से पहले कश्मीर में पंडित और 2014 से पहले…

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समाजिक भाईचारे का पर्व है होली- लाल बिहारी लाल

भारत में फागुन महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन हर्षोउल्लास के साथ मनाये जाने वाला विविध रंगों से भरा हुआ हिदुओं का एक प्रमुख त्योहार है-होली।होली का वृहद मायने ही पवित्र है। पौरानिक मान्यताओं के अनुसार फागुन माह के पूर्णिमा के दिन ही भगवान कृष्ण बाल्य काल में राक्षसणी पुतना का बध किया था…

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बरसो पहले फागुन बीत गया…..अब बुरा मान जाओ 

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  वैश्विक  युद्ध में मेरा पक्ष बस इसी बात से तय होगा कि टीएमसी  किस पक्ष में खड़ी हैं। अगर आज ममता दीदी  कह दें कि वो ईरान खामनेई गैंग से साहनुभूति अनुभूति और ताल्लुक रखती है तो कसम युसूफ पठान कि मैं कल ही फेसबूकिया कामरेड…

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भव्य कल्चरल सोसायटी द्वारा आयोजित तीसरे भव्य रंग महोत्सव का सफल आयोजन

10  अप्रैल 2022 को धर्मा स्टूडियो,ईस्ट ऑफ कैलाश नई दिल्ली में किया गया। इस रंग महोत्सव में पांच विशेष अतिथि थे श्री प्रेम भारती जी(प्रसिद्ध गीतकार और लेखक),मनमोहन शर्मा “शरण” जी(लेखक,कवि और संपादक उत्कर्ष मेल पत्रिका), सुरेन्द्र सागर जी(प्रसिद्ध कलाकार और निदेशक),दिनेश कपूर जी(लेखक और इतिहासकार )और रवि कपूर जी(सामाजिक कार्यकर्ता) इस रंग महोत्सव में…

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बेगम हज़रत महल

(तारीख अज्ञात 1820 से 07 अप्रैल, 1879) प्रारंभिक जीवन :- बेगम हज़रत महल का जन्म अवध प्रांत के फैजाबाद जिले में सन् 1820 में हुआ था। उनके बचपन का नाम मुहम्मदी खातून था। वे पेशे से गणिका थीं और जब उनके माता-पिता ने उन्हें बेचा तब वे शाही हरम में एक खावासिन के तौर पर…

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