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व्यंग्य :: कोरोना काल की शादी

कोरोना काल में मैं दावतों को तरस गया था।वैसे एक साल में लगभग बीस दावतों का आनंद ले लेता था । जिस दिन दावत होती थी, उस दिन मेरे चेहरे पर रौनक आ जाती थी । दिन भर व्यंजनों के सपनों में खोया रहता था। उस दिन मैं कुछ भी नही खाता था। शाम को…

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संतोष (लघुकथा)

    शाम होते-होते सूरज ढलने लगा। उम्मीदों के दीप बूझने लगे मगर सबको अपना-सा लगने वाला रमेश फिर कभी उन लोगों के बीच कभी नहीं लौटा जिनके लिए आधी रात को भी मुसीबत आए तो तैयार हो जाता था। गॉंव छोड़ शहर की नौकरी में ऐसा उलझा की घर बसाना ही भुल गया। गॉंव भी…

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हे माई अब तो कर दो बेड़ा पार

                                                                                                                 कुशलेन्द्र श्रीवास्तव माई विराज गई हैं, चेत्र नवरात्र प्रारंभ हो गए हैं । माई तो कष्टों को हरने वाली हैं, माई तो शत्रुओं का संहार करने वाली हैं । अभी तो मार्च ही निकला है पर देखो धरती कितनी तपने लगी है अभी से, माई से गुहार लगायेगें अब, हमने तो अपने पार्यावरण को…

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अद्यतन इतिहास से गवाही मांगता सनातन धर्म..!

एक सम्प्रदाय चौदह सौ वर्ष में अठावन देशों में दूसरा दो हजार वर्षो में पिचासी देशों में फेल हो गया लेकिन सत्य,अहिंसा,वसुधैव कुटुम्ब कम,सर्वधर्म समभाव,नारी तू नारायणी और सबका साथ सबका विकास की बात करने वाला सनातन जो असल धर्म है फैलने की बात तो दूर दुनिया नहीं तो कम से कम भारत के ही…

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सही जीवन शैली अपनाकर एचआईवी संक्रमण से बचा जा सकता है

1 दिसंबर विश्व एड्स दिवस के अवसर पर विशेष डॉ मनोज कुमार तिवारी वरिष्ठ परामर्शदाता ए आर टी सेंटर, एस एस हास्पिटल, आई एम एस, बीएचयू, वाराणसी एचआईवी की पहचान के चार दशक बाद भी यह एक विश्वव्यापी समस्या बना हुआ है। एचआईवी वायरस मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को  कमजोर करता है जब…

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भारत को कोरोना से मुक्त रखना है

संकट से पुरुषार्थी घबड़ाता नहीं है, उससे ही संकट डरने लग जाता है। विपत्ति को सामने देखकर धैर्यवान, उससे निपटने की  तैयारी करता है। आजकल ‘कोरोना’  कड़ी चुनौती है, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सबको डरा रहा है। घर में बंद पर  अलग-अलग रह कर, कैदी साआदमी जीवन बिता रहा है। हरेक इंसान सिर्फ संयम से काम ले, कैसा…

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मैं कैसे पढ़ूँ?

       रोहन बड़े ही सहज भाव से पास आकर खड़ा हो गया,“मैम आप कहती तो हैं कि तुमलोग डॉक्टर, इन्जीनियर ,शिक्षक कुछ भी बन सकते हो, परंतु हमारे यहाँ तो दो जून का भोजन भी मुश्किल से बनता है, हमारे माँ-बाप हमें कहाँ से डॉक्टर और इन्जीनियर बनायेंगे? उसमें तो बहुत अधिक पैसे लगते हैं।”…

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योग जीने का विज्ञान

योग नहीं साधारण नाम है, योग तो जीने का ज्ञान है। भौतिक अध्यात्मिक भाव, आत्मिक हो या मानसिक। योग एकता का संदेश है, चेतना को करता एक है। भावनाओं का संतुलन करे,  तालमेल बनाए मदद करे। बाहरी हो चाहे आंतरिक, दोनों तरह से पहुंचाता लाभ। मांसपेशियां और नसों को, कहता सद्भाव में कार्य करो।  दिमांग…

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राष्ट्रीय एकता दिवस

सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत के लोह पुरुष के नाम से जाना जाते हैं ।सरदार वल्लभ भाई पटेल जी भारत के पहले उपराष्ट्रपति और गृहमंत्री थे। उन्हीं के जन्मदिवस  के उपलक्ष में प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।  भारत को राष्ट्र बनाने में सरदार जी की…

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शिक्षित वर्ग में जातीय पूर्वाग्रह का स्थायित्व

संविधान ने समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों को स्थापित किया, परंतु भारतीय समाज में जाति चेतना अभी भी गहराई से विद्यमान है। शिक्षित और शहरी वर्गों में यह चेतना प्रत्यक्ष भेदभाव के बजाय सूक्ष्म रूपों में प्रकट होती है—जैसे रोजगार, विवाह और सामाजिक नेटवर्क में। आर्थिक प्रगति और आधुनिकता ने जाति को कमजोर किया…

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