नशे के मरघटघट (धूम्रपान निषेध दिवस पर)
घट रहीं सांसें सिसकती जा रही है जिंदगी, जिंदगी को विष नशीला दे रही है जिंदगी। विषैली खुशियां लपेट तन यहां पर थिरकते, निराशा के द्वीप में अनगिन युवा मन भटकते, खिलखिला कर फिर सिसकियां भर रही है जिंदगी। जिंदगी को विष नशीला दे रही है जिंदगी। पी रहे हैं सुरा को या सुरा उनको…
