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दोहा : सास ससुर ससुराल है,

सास ससुर ससुराल है,साला सलहज दूर। आवत जावत मुह पिटे,नैन देखि मजबूर।। ननद मिताई बांध के, चलते रिस्ते नात। टूटी डोरी सांस की, झूठी सारी बात।। पाहुन घड़ी बिताय के, निकले अपने धाम। ठहरे जो पहरे पहर,बिगड़े सारे काम।। भोगे अपने भोग सब,अपने करमे हार। जीती -जाती जिंदगी,कर ली कैसे?क्षार।। साढू के घर जाइये,हाथ रहे…

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मैं कैसे पढ़ूँ?

       रोहन बड़े ही सहज भाव से पास आकर खड़ा हो गया,“मैम आप कहती तो हैं कि तुमलोग डॉक्टर, इन्जीनियर ,शिक्षक कुछ भी बन सकते हो, परंतु हमारे यहाँ तो दो जून का भोजन भी मुश्किल से बनता है, हमारे माँ-बाप हमें कहाँ से डॉक्टर और इन्जीनियर बनायेंगे? उसमें तो बहुत अधिक पैसे लगते हैं।”…

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‘सबसे पहले अपना हित’ …..???

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) महंगाई, बेरोजगारी पर विपक्ष पहले ही आँखे तरेरी किए है, उस पर एनआरसी का विरोध, जेएनयू विवाद ने और आग में घी का काम कर दिया. लोहड़ी, मकर संक्रांति और पोंगल के त्यौहार की चमक भी मानो फीके ही पड़ गए. दिल्ली में फरवरी में विधानसभा चुनावो की तारीख घोषित हो…

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जब इलाज भी बाज़ार बन जाए: भारत में स्वास्थ्य अधिकार की लड़ाई

भारत में बढ़ती निजीकरण प्रवृत्ति और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय की कमी: क्या ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ सच में न्यायालयों में लागू किया जा सकता है? जब उपचार एक सेवा नहीं, बल्कि बाज़ार की वस्तु बन जाए, तब अधिकारों की भाषा कमजोर पड़ जाती है। – डॉ सत्यवान सौरभ भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा और ढांचा…

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प्रयागराज भगदड़: प्रशासनिक लापरवाही या भक्तों का उन्माद।

एक पौराणिक शहर की सीमाओं पर विचार करना चाहिए, जिसे अपनी धार्मिक विरासत को बनाए रखते हुए आठ करोड़ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है। दस लोगों के लिए डिज़ाइन की गई जगह में सौ लोग कैसे रह सकते हैं? यह विचार करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है। इसके अलावा,…

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मनुष्य या ब्रह्माण्ड

जब वे सब अध्यात्म विशेषज्ञ,और इस विज्ञान युग कीविशिष्ट  चिंतन प्रक्रिया के अति संवेदनशील विशेषज्ञ भी ब्ह्म के एकमात्र सत्य अस्तित्ववान होने को नकार नहीं सकते। यह मानना कि वह निराकारहै , जिसका एक व्यक्तिअथवा किसी एक जीव का स्वरूप नहीं,और यह कि सम्पूर्ण ब्ह्माण्ड उसकी इच्छा से हीउसके स्वरूप को ही स्वयम में धारता…

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लौटें एक सार्वभौम संस्कृति की ओर —

यद्यपि  यह एक सार्वभौमिक विषय है , किसी स्थानविशेष से ही सम्बद्ध नही। मानवता के नाम पर कलंक समझी जाने लायक यह समस्या पुरुषों की  सबलता  के आदिकालीन अहंकार से जुड़ी है।  किन्तु आज भी सभ्यता के शिखर पर पहुँचने का दावा करनेवाला यह जगत  महिलाओं के   साथ इस प्रकार के व्यवहारों को अंजाम दे…

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गीतकार अनिल भारद्वाज काव्य कौस्तुभ सम्मान से सम्मानित

ग्वालियर,साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, नवांकुर साहित्यिक मंच सीतापुर के तत्वाधान में मध्य प्रदेश ग्वालियर के वरिष्ठ गीतकार व हिंदी सेवी साहित्यकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट को काव्य कौस्तुभ सम्मान 2024 से सम्मानित किया गया है।गीतकार अनिल भारद्वाज को यह सम्मान हिंदी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान और वरिष्ठ हिंदी सेवी साहित्यकार, एवं साहित्य सृजन के प्रति…

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राष्ट्रीयता के स्तम्भ है पण्डित दीनदयाल उपाध्याय !

जातिवाद से ऊपर उठकर पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अंत्योदय उत्थान का जो प्रयास प्रारम्भ किया आज वो सबके लिए अनुकरणीय है । उत्तर प्रदेश में जहां एक तरफ जातिवाद चरम पर है वहीं दूसरी तरफ पढ़े लिखे वर्ग का प्रतिनिधित्व भी बढ़ा है किन्तु दुखद है कि आज भी कुछ लोग जातिवाद के नाम…

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चिन्तन शिविर से  उपजे सवाल

राजनीतिक सफरनामा                                                                                                    कुशलेन्द्र श्रीवास्तव मई की तपती दुपहरी और राजस्थान की मरू भूमि पर कांग्रेस का चिन्तन शिविर आयोजित किया । कांग्रेस को वैसे भी चिन्ता और चिन्तन दोनों की आवश्यकता तो है । उनके अपने ही सदस्यों ने चिन्ता व्यक्त की और हाईकमान ने चिन्तन शिविर लगा दिया ‘‘आओ हम मिलकर चिन्तन करें’’…

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