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पनाह : उज्जवला  साखलकर

ये ठहरी आखिर महानगरी मुम्बई की सड़क , जहाँ दिन हो या रात हर समय गाड़ियों और लोगों का महापुर जमा रहता है I हर कोई अपनी धुन में, बस जल्दी गंतव्य तक पहुँचने की होड़ I आज भी  पूरी की पूरी सड़क कार, टैक्सी, बस और टू-व्हीलर से भरी हुई थी और इसमें सावित्री…

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व्यंग्य – कैशलेश होकर ये कहां आ गए हम….

मोबाइल आया घड़ी का ज़माना गया, लैपटॉप आया टेलीविजन का जमाना गया, एंड्राइड फोन आया रेडिओ का जमाना गया और अब तो हद ही हो गई ऑनलाइन पैमेंट आया बेचारे पर्स का जमाना गया। अति मॉडर्न दिखने के चक्कर में युवा वर्ग अपने पास कैश नहीं रखता। जो रखते भी हैं उनके पास खुल्ले पैसे…

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पहले सौ टेस्‍ट मैचों में केवल 10 जीत सका था भारत, बांग्‍लादेश से भी बदतर थी परफॉर्मेंस

भारतीय टेस्ट टीम के खिलाड़ियों का मौजूदा फॉर्म कमाल का है। भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आज से टेस्ट सीरीज का पहला मैच न्यूलैंड्स में खेलना है। इस दौरे पर भारतीय कप्तान विराट कोहली से फैंस को काफी उम्मीदें हैं। बल्लेबाजी में भारत का दारोमदार चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली के ऊपर सबसे ज्यादा…

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भारत का विरोधी दुस्साहस से पहले सौ बार सोचेगा : राजनाथ

एयर पॉवर इन नो वॉर, नो पीस सिनेरियो’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के 40 जवानों को याद किया और बालाकोट हवाई हमला करने वाले जवानों को सलाम किया।      ‘सेंटर फॉर एयर पॉवर स्टडीज’ में उन्होंने कहा, ‘‘हमें जो काम मिला है यदि उसके लिए हमें तैयार रहना…

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सिद्ध बहुत तन की गुफा  (दोहे)

साधे तो सधता सभी, योग बड़ा विज्ञान | मन की इच्छा पूर्ण हो, आ जाये संज्ञान || मन की आंखें खोल तो, देख जगह संसार | वरना सब कुछ सो रहा, जो तेरा अधिकार || सांसों में है भेद सब, सब सांसों का सार | भार समर्पित भाव यह, जीवन का आधार || योग चेतन…

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आज के दिन ही उगा था हिंदी मीडिया का सूरज

(हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दी का सफर) 19 वीं सदी के कलकत्ता की चहल-पहल भरी गलियों में, घोड़ों की गाड़ियों के शोर और ताज़ी चाय की खुशबू के बीच, एक शांत क्रांति आकार ले रही थी। 30 मई, 1826 को उदंत मार्तंड नामक एक मामूली साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू हुआ था-जिसका अर्थ है “उगता हुआ…

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आज का पत्रकार

पत्रकारिता को बेशर्मो ने जाने क्या बना दिया। चमचागिरी ने सभी को आज बहुत गिरा दिया।। वो पत्रकार जो आज बहुत चिल्ला रहे है। ना जाने किस नेता की कमर सहला रहे है।। बहुत  ही  पाक  पेशा  होता  है  पत्रकार  का, चंद रुपयों की चाहत में उस पर दाग लगा रहे है। बहुत समय लगता…

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गीतकार अनिल भारद्वाज काव्य कौस्तुभ सम्मान से सम्मानित

ग्वालियर,साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, नवांकुर साहित्यिक मंच सीतापुर के तत्वाधान में मध्य प्रदेश ग्वालियर के वरिष्ठ गीतकार व हिंदी सेवी साहित्यकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट को काव्य कौस्तुभ सम्मान 2024 से सम्मानित किया गया है।गीतकार अनिल भारद्वाज को यह सम्मान हिंदी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान और वरिष्ठ हिंदी सेवी साहित्यकार, एवं साहित्य सृजन के प्रति…

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फ़िट इँडिया-हिट इँडिया

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होए माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होए कबीर जी के दोहे में धैर्यशीलता का कितना खूबसूरत सँदेश छिपा है।बात केवल इतनी सी है कि किसी भी सोच विचार के बीज को बो देने भर से फ़सल के इँतज़ार में हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाने भर…

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उम्मीद के दीप

माना रात घनी है,घोर तमस से भरी है। उजियारी भौंर के सामने कई चुनौतियाँ धरी हैं। तुम सूरज पर एतबार बनाए रखना। उम्मीदों के दीपक जलाए रखना। मंजिल बहुत दूर हो,दर्द बेहिसाब हो। सबसे मेरा रश़्क हो,उजड़े हुए मेहताब हो। जुगनुओं से इल्तिफात तुम बनाए रखना। उम्मीदों के दीपक जलाए रखना। मंज़र-ए-नदीश में कष्ट इफरात…

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