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बिफरे जावेद मियादांद, बोले- भारत से मैच नहीं खेलेंगे तो हमारा क्रिकेट तबाह नहीं हो जाएगा

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी जावेद मियादांद भारत को लेकर बिफरे हैं। उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से वहां के क्रिकेट के विकास को अपना एजेंडा बनाने की अपील की है। उन्होंने इसी के साथ कहा है कि अगर पाकिस्तान भारत के साथ मैच नहीं खेलेगा, तो उसका क्रिकेट तबाह नहीं हो जाएगा। उन्होंने आगे…

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भाजपा का चमत्कार : सांसद को प्रदेश अध्यक्ष और  विधायक को बनाया राष्ट्रीय अध्यक्ष

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार, केराकत, जौनपुर यूपी जातिगत दबाव कहें, समीकरण कहें, पीडीए का डर कहें या रणनीति कहें पर यह भाजपा का थिंक टैंक और भाजपा की राजनीती जो ब्राह्मण – ठाकुरों  की राजनीति से चलती रही है आज दो  पिछड़े नेताओं की 2014 के बाद से सत्ता पर काबिज होने…

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आप और मैं

काश! आप पॉजिटिव एनर्जी से ड्राइव होते। तो आप आप न होते। मैं मैं न होती। शायद आज आप और मैं हम होते। काश! आप न्यूट्रल  होते। तो आप आप न होते। मैं मैं न होती । शायद आज हम हमराज होते। काश! आप  अपनों की करतूतों पर पर्दा न डालते। बल्कि मेरी ढाल बनते…

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इन केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 15 फरवरी तक रहेगा वर्क फ्राम होम, कार्मिक मंत्रालय का आदेश जारी

केंद्र सरकार ने सोमवार को अपने 50 फीसद कर्मचारियों के लिए वर्क फ्राम होम  (Work From Home, घर से काम) व्यवस्था की अवधि 15 फरवरी तक बढ़ाने का निर्देश जारी किया है। इसके तहत अवर सचिव स्तर (Under Secretary) से नीचे के 50 फीसद कर्मचारियों को घर से काम करने की छूट है। वहीं दिव्यांग…

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देवेन्द्र पाठक ‘महरूम’ की ग़ज़लें

 एक धुँआते ही न रहो सुलगके जलो दहको जलाके ख़ाक करो हर सियासती छल को  घुन गये बांस- बत्ते, धसक रहीं दीवारें वक़्त रहते बचा लो टूटते- ढहते घर को  जो आहे- दीनो- बेकुसूर कहर बरपा दे  बचा न पाओगे अपने ग़ुरूर के घर को लहू भाई का सगे भाई के लहू से ज़ुदा दे…

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दो जून की रोटी

दो जून की रोटी जहां में, मिलती सखी सबको नहीं। दिन रात बहता है पसीना, तब हाथ आ पाती कहीं। मँहगाई का आलम ये है,  बढ़ती ही देखो जाती। मजदूरी जितनी भी मिलती, पूरी वह कब हो पाती। जिनपर काम नहीं है कोई, कैसे उनका दिन कटता। दिन में भी तारे दिखते है, मुश्किल से…

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घमासान

क्यों हो रहीं हैं घुटन क्यों डर रहा हैं मन कहीं तो हो रहा हैं इंसानियत पर जुल्म घुट घुट के मार रहें हैं लोग या मर मर के जी रहे हैं लोग मासूमों के हाल बुरे हैं सपने देखने वाले सो कहां पा रहें हैं आग सैलाब की लपटों में जुलसे जा रहें हैं…

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विधाता की सुंदर रचना

तुम आज इस तरह खामोश हो, युँ उदासी का लिबास चेहरे पर क्यों डाले जाती हो भावनाओं को आहत मत होने दो उन्हें सुलगाओ नया लक्ष्य दो विकट परिस्थितियाँ बहुत आएँगी पग -पग पर पांव डगमगाऐगे तुम मत ठहरना ध्येय अटल साधे रखना माना की तुम स्त्री हो, क्यों तुम्हारा स्त्री होना कभी -कभी समाज…

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समाज के सर्वांगीण निर्माण में हिंदी भाषा एक महत्वपूर्ण टूल

हम सभी बखूबी जानते हैं कि, भारत एक बहु सांस्कृतिक और बहुभाषी देश है, लेकिन एक स्तर ऐसा भी है, जहाँ हम एकता के सूत्र में बंधे हुए है और वह है, भावनात्मक एकता का सूत्र। भारत जैसे बहु सांस्कृतिक और बहुभाषी देश को इस एकता के सूत्र में पिरोने के लिए और सुदृढ़ बनाने…

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‘जीवन’ का दुरूपयोग‌

एक तरफ तो हम कहते हैं कि जल ही जीवन है और तो वही दुसरी तरफ हम अपने दैनिक जीवन में निरंतर जल संसाधनों का दुरूपयोग कर उनका दोहन करते जा रहे हैं। जल सभी के लिए अति आवश्यक है। जैसे मानव जीव जंतु पशु पक्षी पेड़ पौधे  फसल उत्पादन आदि सभी के लिए अति…

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