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मनहरण घनाक्षरी

जल का जो मीठा कूप ,अपने ही पास है तो दूजे के ही कूप से जी ,जल मत पीजिए ! देकर राजभाषा का,दर्जा जो हिंदी को बस नाम मात्र का सम्मान , आप मत कीजिए! जननी  हमारी है ये,कई भाषाओं की प्यारी गर्व से इसे जो आप , हाथों-हाथ लीजिए! छोड़िए जी आप अब ,मतभेद…

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दो पल

         मिले दो पल जीवन की आपाधापी में से…और दो मैंने चुरा लिए।        सघन गर्मी में तपते हुए प्यासे को जैसे मेघों की हल्की सी रिमझिम फ़ुहारों ने भिगो कर मन को हर्ष और संतोष प्रदान कर दिया हो…कुछ ऐसा रहा आज का प्यारा सा, दुलारा सा, मनमोहक संगीत सुनाता सा अलबेला दिन।        …

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बजट

बजट के माध्यम से बढेगी गरीबों,मजदूरों, किसानो और महिलाओ की शक्ति सभी क्षेत्रों में योजनाओं से होगी वृद्धि राष्ट्र की बढेगी आर्थिक समृद्धि । अमीरो की हाय-हाय गरीबों का सौभाग्य अतिरिक्त टैक्स चार प्रतिशत गरीबों के लिए लाएगा अनेक वित्तीय उपहार। टेक्स स्लैब में बदलाव नहीं पाँच लाख आमदनी वालो को टैक्स देने का अधिकार…

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एक झूठ

एक प्रसिद्ध पत्रिका में लिखी हुई समस्या उसे अपने एक परिचित की समस्या सी लगी।थोड़ा सा और पता करने पर उसे महसूस हुआ कि यह कहानी तो शायद उसी परिचित व्यक्ति की है । उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर अपने मायके में रह रहीं थीं ।वे उनके ही पड़ोस में रहने वाले वर्मा जी थे ।              …

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तुम कल नहीं रहे तो क्या होगा???

डा.सर्वेश कुमार मिश्र (महासचिव वैश्विक संस्कृत मंच दिल्ली प्रांत) _ खुद को महान समझते हो, बल और बुद्धि की खान समझते हो, पर सोचा है गर तुम कल नहीं रहे तो क्या होगा?? सोचा है कल का सूरज गर न सके देख तो क्या होगा?? सुनो शुक्कर की बाजार भी लगेगी शनि बाजार भी लगेगी…

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Yogi Adityanath Government 2.0: भाजपा विधायक दल की लखनऊ में 24 को बैठक, योगी आदित्यनाथ को औपचारिक रूप से चुना जाएगा विधायक दल का नेता

उत्तर प्रदेश में 18वीं विधानसभा के गठन की उलट गिनती चालू है। प्रदेश में 37 वर्ष बाद किसी भी दल की सत्ता में वापसी का रिकार्ड बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी से प्रचंड बहुमत प्राप्त किया है। भाजपा अब राज्यपाल के पास जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। भारतीय जनता पार्टी इससे पहले अपने…

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हिंदी जन के मन और मनोरंजन की सशक्त भाषा बनी है

(14 सितंबर हिंदी दिवस पर विशेष) हिंदी दिवस पर कुछ लोग कुंठा के चलते कहें या फिर इसे मनोविज्ञान का खेल कहें कि चीजों को नकारात्मक रूप से प्रस्तुत करने या फिर विरोध करने पर वे लोगों का ध्यानाकर्षित करने में कामयाब हो जाते हैं। खैर जो भी हो ये उनकी सोच है। सितंबर माह…

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विदेश भेजने की होड़ और बदलती मानसिकता

( क्या सचमुच भारत में अवसर कम हैं या हम एक भ्रम में जी रहे हैं?)  – डॉ. प्रियंका सौरभ पिछले कुछ वर्षों में भारतीय समाज में एक नई प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है—बेटे-बेटियों को विदेश भेजने की होड़। कभी पढ़ाई के नाम पर, कभी नौकरी के नाम पर, तो कभी बेहतर जीवन के सपने…

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