नदी और नारी
चंचल… रोमांच से भरपूर इठलाती हिलौरे मारतीं, अनवरत… नदी और नारी जब भी बड़ीं… रोकीं गईं । वेग किया गया उनका अवरोहित,,, बाँध के बंधन चट्टानें अटका कर बीच अधर में,,, रफ्तार उनकी मिटा दी गई । बंधनों में बंध कर, कुछ रुकीं, कुछ झुकीं और बन गईं बंदी भूल अपना,,, असीम वेग, खुद का…
