धोबीघाट
एक अँधेरी गुफामें खिंची जा रही है वह—घिरनी की तरह घूमती हुई।घोर अँधेरा—आँखें फाड़ फाड़कर देखने की कोशिश कर रही है वह-,पर कुछ दीखता नहीं –काला –गहरा अँधेरा बस।घूमता हुआ शरीर जैसे तिनके तिनके हो बिखर जाएगा—कितना लम्बा अँधेरा है—एक किरण ही रोशनी की दिख जाए गर! और –और –अचानक जैसे रोशनी का विस्फोट है…
नेता बने अभिनेता
संगीता अग्रवाल (आगरा, उत्तर प्रदेश) नेता बने अभिनेता वोटों के दिन जब हैं आए नेता भी अभिनेता बन जाए झूठे-झूठे सपने दिखाए टूटी हुई सड़कें बनबाएं बिजली पानी वो दिलबाएं झूठे सबको भाषण सुनवाएं बच्चों के स्कूल खुलबाएं सबको लैपटॉप फ्री बँटबाएं अस्पतालों को खुलवाएं बिन पैसे उपचार करवाएं सबको नए रोजगार दिलाएं जनता पर…
धारा 370 हुई नौ दो ग्यारह , कश्मीर वासियों की होगी पोबारह
सभी देशवासियों को स्वतंत्र्ता दिवस एवं रक्षा बंधन की पावन शुभकामनाएँ । शायद इस बाद स्वतंत्र्ता के एहसास में वृद्धि अवश्य हुई है । एक तरफ तो ‘तीन तलाक’ बिल पास होने से मुस्लिम बहनों की मानसिक गुलामी की जंजीरें टूटी हैं । वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘मोदी–2’ सरकार ने…
स्वतंत्रता संग्राम में गांधी जी का योगदान
लाल बिहारी लाल भारत में मुगल साम्राज्य से जब सता अंग्रैजों के हाथ में गई तो पहले अंग्रैजों का भारत में आना व्यापारिक उदेश्य था पर धीरे-धीरे उनका राजनैतिक रुप भी सामने नजर आने लगा। और वे अपने इस कुटिल चाल में कामयाब भी हो गये । उन्होंने धीरे –धीरे अपने पैर पसारने लगे…
हमें अन्याय, असहिष्णुता और भेदभाव के विरूद्ध खड़ा होना होगा : सोनिया
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण किया। इसके बाद उन्होंने एक बयान जारी कर सभी लोगों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी जिसमे उन्होंने कहा कि अन्याय, असहिष्णुता और भेदभाव के खिलाफ सभी को खड़ा होना होगा। सोनिया ने कहा, ‘‘भारत जैसे देश में कट्टरता, अंधविश्वास, संप्रदायवाद, अतिवाद, नस्लवाद, असहिष्णुता या अन्याय…
हम पूरे समर्पण के साथ सेवारत हैं : PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लालकिले के प्राचीर से राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए कहा, देशवासियों ने जो काम दिया, हम उसे पूरा कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि सत्तर साल में अनुच्छेद 370 को हटाया नहीं गया, लेकिन उनकी सरकार ने 70 दिन के भीतर उसे समाप्त कर दिया।…
राखी के दोहे
धागा यद्यपि सूत का,पर दृढ़ औ’ मजबूत । बहिन-सहोदर नेह का,बन जाता जो दूत ।। पर्वों का यह पर्व है,जिसमें रक्षा,नेह । अंतर्मन उल्लास में,होती पुलकित देह ।। धागा बस इक माध्यम,पलता है विश्वास । जिसमें रहती निष्कपट,मीठी-सी इक आस ।। बचपन की यादें लिये,बिखरे मंगल गान । सम्बंधों में है सजा,संस्कार का मान ।।…
मँद न होने पाए लौ आज़ादी के हुस्न ओ जमाल की प्रीत की डोर से बँधी रहे कलाई हर माँ के लाल की
मँद न होने पाए लौ आज़ादी के हुस्न ओ जमाल की प्रीत की डोर से बँधी रहे कलाई हर माँ के लाल की वो कितना खूबसूरत नज़ारा होगा जब समस्त भारत बिना किसी भेदभाव के एकता की डोर से बँधा हर लम्हा आज़ादी का जश्न मनाएगा।लेकिन क्या एैसा सँभव है? जी हाँ अगर शिव जी…
