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उम्मीदों का वृक्ष

उम्मीदों की चादर में कई सपने दफ्न हो गए। जिन वृक्षो से की थी छाया की उम्मीदे,वो छाया पतझड़ आने पर खुद ही कहीं गायब हो गयी।। जीवन के गुजरते पलो में अक्सर ऐसा हुआ। शुखे मुरझाये वृक्षो से भी कई बार ठंडी हवाओं का अनुभव हुआ , शायद गिर रहे थे जो पत्ते उन्होंने…

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इन केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 15 फरवरी तक रहेगा वर्क फ्राम होम, कार्मिक मंत्रालय का आदेश जारी

केंद्र सरकार ने सोमवार को अपने 50 फीसद कर्मचारियों के लिए वर्क फ्राम होम  (Work From Home, घर से काम) व्यवस्था की अवधि 15 फरवरी तक बढ़ाने का निर्देश जारी किया है। इसके तहत अवर सचिव स्तर (Under Secretary) से नीचे के 50 फीसद कर्मचारियों को घर से काम करने की छूट है। वहीं दिव्यांग…

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पावन होली की हार्दिक शुभकामनाएं : डॉक्टर सुधीर सिंह

पावन होली की हार्दिक शुभकामनाएं,हर हिंदुस्तानी यहां  सुखी-समृद्ध रहे।सबों के मन में रहे  भाईचारे का भाव,प्रगति-पथ पर सब  सदा अग्रसर रहे। प्रेमपूर्ण परिवेश के रंग में रंग जाने से,फाग का राग दिल गाने लग जाता है।थिरकने लगता है अधर गीत सुनकर,ढोल,मृदंग पर थाप बरसने लगता है। गुलाल की खुशबू  से  भींगा माहौल,वसंत का एहसास  कराने…

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देश की समस्याओं का नीतिगत हल जरूरी !

दुर्भाग्य है कि आजकल सत्ता से असहमत होने के अधिकार से जनता को वंचित करने की लगातार कोशिश की जा रही । किसान आंदोलन के नाम पर सरकार अपने विरोधीयों को देशविरोधी साबित कर भारतीय संविधान  के असहमति और तर्क के सौंदर्य की हत्या करने एवं संविधान में दिये गये अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य के अधिकार को…

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सोच बुद्धि और विचार – आशा सहाय

मैंने अपने चिन्तन की प्रक्रिया का आरम्भ संभवतः रात्रि के आकाश के निरीक्षण से ही किया था। निश्चय ही बाल मन की जिज्ञासा के तहत ही तरह तरह के प्रश्नों को जन्म देने वाली यह क्रिया अब एक विशाल चिन्तन प्रक्रिया बन गयी है और अन्ततः क्यों ,कैसे , कौन जैसे प्रश्नों से मस्तिष्क वैसे…

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हाइकु माला

नवीन वर्ष घी, शकर, चूरमा मां का आंगन उन्मन मन ठिठुरता बदन ठंडा है चूल्हा सिकुड़ती मां आंचल में संतान स्नेह उड़ेले बीता बरस खोजता प्रतिपल खुशी के पल देव समाज प्यार भरा आंगन भरे उमंग नवीन वर्ष विद्यालयों का द्वार न रहे बंद बांह पसारे करो शुभ-आरंभ नवीन वर्ष… 2022 डॉ. नीरू मोहन ‘…

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गीत ये बन पाए हैं

गीत ये बन पाए हैं जिगर को चीर के ,बाहर ये निकाले मैंने ,फिर ये अरमान ,आंसुओं में उबाले मैंने ,तब कहीं जा के ,विरह गीत ये बन पाए हैं । इनके सीने में गम ,के तीर चुभाये मैंने ,दिल पै अपनों के दिये ,जख्म दिखाए मैंने ,तब कहीं जा के ,विरह गीत ये बन…

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खुशी का गीत

गजेन्द्र अधाना जी = वन गए नाना जी। किस्मत ने खोल दिया देखो खजाना जी।       खुशियों की मिली मिठास रे ओए बल्ले बल्ले।        देखो पूरी हो गई आस रे ओए बल्ले बल्ले आप सब को मुबारक हो = स्वस्थ सुंदर बालक हो। बालक वो प्रति पालक हो = देश का अच्छा नायक हो…

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अक्षय तृतीया (आखा तीज)

 मंजुलता वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को ‘अक्षय तृतीया’ या ‘आखातीज’ कहते हैं। ‘अक्षय’ का शाब्दिक अर्थ है- जिसका कभी नाश (क्षय) न हो अथवा जो स्थायी रहे। अक्षय तृतीया तिथि ईश्वर की तिथि है। इसी दिन नर-नारायण, परशुराम और हयग्रीव का अवतार हुआ था इसलिए इनकी जयंतियां भी अक्षय तृतीया को मनाई…

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