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लघुकथा : हौसलों की उड़ान

बोलते मम्मी से गले लिपट गई। मम्मी की आंखों में खुशी के आंसू निकल पड़े। उन्हें लगा कि आज उनकी मेहनत सफल हो गई। मम्मी (नविता जी) का मन अतीत की स्मृतियों में खो जाता है । अनन्या जब मात्र 10 महीने की थी तभी उसे दिमागी बुखार चढ़ जाता है। उसमे उसका अगर शरीर…

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परियों की नन्ही शहजादी

परीलोक से परियों की नन्ही शहजादी आई,नन्हे हाथों के नन्हे पंखों से उड़ कर आई। उससे बातें करते रहना,कितना अच्छा लगता,जी भर कर देखें उसको पर,कभी नहीं जी भरता। इंद्रलोक की सबसे सुंदर सूरत लेकर आई।घर के मधुबन की क्यारी में ज्यों बसंत ऋतु आई।परीलोक से परियों की नन्ही शहजादी आई। सुंदर हीरे मोती सी…

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योगासन बनाम दामासन

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव मौसम में भले ही अभी गर्मी न आई हो पर पेट्रोल और डीजल की रोज बढ़ती कीमतों ने हाय-तौबा तो मचा ही रखी है । रोज दाम बढ़ रहे हैं । सुबह उठते ही सबसे पहिले यह पता करो कि ‘‘भैया आज पेट्रोल का भाव बिक रहा है..’’ । ऐसा तो नहीं कह…

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दिल्ली-एनसीआर में बारिश ने फिर बढ़ाई ठंड, इन राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी

दिल्ली में बुधवार रात से मौसम में आए अचानक बदलाव ने ठंड को बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में हल्की बूंदाबादी जारी है। मौसम विभाग ने गुरुवार को भी बारिश का अनुमान जताया है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी होने की भी संभावना है। पिछले कई दिनों से हो…

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तलाक है या है ये बिदाई

हरफ – हरफ हिसाब लगाकर सब ले गई थी तुम अपना| ये मेरा हुआ, ये तुम्हारा बनता है इतना। फिर भी छोड़ गई देखो सामान कितना| इतना कि हर पल, हर कदम अपने ही घर में ठोकर खाकर गिरता हूँ में| यूंकि तुम याद न आओ इसलिए आँखें मूँदें फिरता हूँ मैं। सिंगार के निशां…

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“नशा समाज को खोखला कर देता है और राष्ट्र निर्माण में सबसे बड़ी बाधा है।”

ड्रग्स की समस्या केवल एक विभाग या एजेंसी की जिम्मेदारी नहींहै,बल्कि पूरे समाज,सरकार और नागरिकों का सामूहिक दायित्व,होल ऑफ़ द गवर्नमेंट एप्रोच है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – भारत एक ऐसे युग से गुजर रहा है जहां विकास आधुनिकता और वैश्वीकरण की चुनौतियाँ समानांतर रूप से सामने खड़ी हैं। इनमें सबसे खतरनाक…

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करो मेरा उद्धार (दोहे )

1.कमल आसना शारदा, करो मेरा उद्धार। विद्वजनों में मान हो,लेखन में हो धार।। 2. विद्या दान महा दान , समझो रे नादान। किसी को शिक्षित न किया,तो कैसे विद्वान।। 3. विद्यावान बनें सभी,करें राष्ट्र निर्माण । बेटा बेटी सब पढ़ें,तब ही हो उत्थान।। 4. बेटी को पढ़ाने में क्यूँ आती है लाज । बेटा भविष्य…

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कैसे कैसे लोग

    ..दोपहर की तेज चिलचिलाती धूप में रीना बारबार पसीना पोंछती हुई रिक्शेवाले का इंतजार कर रही थी । सामने से ही बहुत सी साथी शिक्षिकाएं अपनी अपनी गाड़ियों से निकल रहीं थी पर सभी के रास्ते अलग अलग थे । तभी सामने एक गाड़ी रुकी ।      “अरे रीना जी कैसे खड़ी है ?”…

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खुदीराम बोस

(03 दिसंबर, 1889 से 11 अगस्त, 1908) प्रारंभिक जीवन :- खुदीराम बोस का जन्म 03 दिसंबर, 1889 ई. को बंगाल में मिदनापुर ज़िले के हबीबपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री त्रैलोक्य नाथ बोस और माता का नाम श्रीमती लक्ष्मीप्रिय देवी था। बालक खुदीराम के सिर से माता-पिता का साया बहुत जल्दी…

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दुष्ट दमन सदा हितकारी !

कानून और न्ययालय की देश में क्या जरूरत , जब त्वरित न्याय मौजूद है तो , ये सवाल सबके जहन में आएगा  !मेरा निजी मत है कि विकास दूबे का एनकाउंटर सही है क्योंकि वो खूंखार था और हत्यारा था किन्तु मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसो की गाड़ियां क्यो नही पलटती, भादेठी कांड वाले…

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