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आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ

इस जून में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ है। भारत के इतिहास में यह एक काला धब्बा है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब मीडिया को चुप कराने के लिए हथौड़े की रणनीति का इस्तेमाल किया था। आपातकाल की घोषणा पर हस्ताक्षर होने से पहले ही, दिल्ली के अखबारों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई…

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अजूबा प्रजातंत्र है,कुहरन भरी आजादी है

ठोकर खाने पर भी संभलता नहीं बेईमान, कुछ दौलत के लिए वह बेच देता है ईमान. बेइज्जती का उसको कुछ भी परवाह नहीं, धन-पद के  पीछे-पीछे  भागता है बेलगाम. समाज में  ईमानदार आदमी का अभाव है, शुभ सलाह  मानने को कोई  नहीं तैयार है. गरीबी व बेरोजगारी  समाज में बरकरार है. खुलेआमअट्टहास यहां करता व्यभिचार…

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उम्र के पड़ाव पर रिश्तों व समाज की जरूरत

जैसा कि हम सभी जानते हैं मानव जीवन में समाज, धर्म, जाती, रिश्ते, परिवार आदि  की समय समय पर एक दूसरे की जरूरत रहती हैं।  परन्तु आज के युग में मानव जीवन की जटिलता कहो या अपने स्वार्थ के लिए समाज, धर्म, रिश्तों को  निभाने में टाल मटोल करता है, जिस से समाजों के बिखराव…

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मौन मैं और मेरे शब्द हो जाओ तुम : नमिता नमन

मौन मैं और मेरे शब्द हो जाओ तुम प्रीति का एक प्रारब्ध हो जाओ तुम एक पावन शिला मन अहिल्या सा था तुम मुझे राम जैसी छुअन से मिले  मुझको आकार साकार तुमसे मिला जैसे मीरा की भक्ति को मोहन मिले   सूक्ष्मतम मैं रहूं श्रेष्ठतम तुम रहो प्राण तक मेरे प्रतिबद्ध हो जाओ तुम…

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खुशी का गीत

गजेन्द्र अधाना जी = वन गए नाना जी। किस्मत ने खोल दिया देखो खजाना जी।       खुशियों की मिली मिठास रे ओए बल्ले बल्ले।        देखो पूरी हो गई आस रे ओए बल्ले बल्ले आप सब को मुबारक हो = स्वस्थ सुंदर बालक हो। बालक वो प्रति पालक हो = देश का अच्छा नायक हो…

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संसदीय गरिमा पर अविश्वास

(राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नोटिस।)  राज्यसभा में सभापति के खिलाफ विपक्ष खेमे ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है। भारतीय संसद के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जहां राज्यसभा में किसी सभापति के खिलाफ अविश्वास का नोटिस आया हो। दरअसल, यह मौका इसलिए सामने आया, क्योंकि सभापति के सदन में…

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मैं “कंगना ” हूं सुन लो लोगों,

(सुनीता जायसवाल फैजाबाद उत्तर प्रदेश) अबला समझने की भूल ना करनाआऊंगी कलाई में “हथकड़ी” बनकरजेवर समझने की भूल ना करना! झुक गई हूं मैं जरा सा क्योंकि,मैं अदब की परवरिश हूँमेरी झुकी पीठ को तुम ,पायदान समझने की भूल ना करना! गिरेबान खाली नहीं तुम्हारा ,दुनिया भर की करतूतों से ,मेरे पाक दामन पर तुम,उंगली…

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गांठे अंतर्मन की

जब से रेनू के देवर का रिश्ता तय हुआ था, रेनू के व्यवहार में एकदम परिवर्तन आ गया। देवरानी के लिए हो रही तैयारियों को देखकर उसके मन में जलन उत्पन्न होती। हर वक्त अपने समय की तुलना करती। घर में कलेश तक काटने लगती। उसका पति शाम को थका हारा घर आता। रेनू उसे…

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‘मजदूर-दिवस’ यही सबको सिखाता है

Doctor Sudhir Singh कर्म ही पूजा है और श्रम ही साधना है; ‘मजदूर-दिवस’ यही सबको सिखाता है. जो भी जीवन जीता हैअकर्मण्य रहकर, संपूर्ण देश के साथ वहअन्याय करता है. 1मई सबों को यह याद दिलाने आता है, सभी लोग क्ष्रमिक हैं;सब क्ष्रम-साधक हैं, संसार में जितने भी विकास कार्य हुए हैं, सबके लिए मजदूर…

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मां के चरणों में समर्पित दोहे

माता तेरे चरण में ,अर्पित मेरी जान। तेरे ही आशीष से,हो सबका कल्यान ।। कर दो माँ सब पर दया, रह ना कोई जाय। जिसे मिले तेरी दया, धन्य वही हो जाय ।। पावन माँ का धाम है,जो आये तर जाय। सब पर माँ करना कृपा,सब झोली भर जाय।। ना कोई माँ से बड़ा, उनका…

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