बुकर पुरस्कार हिंदी का वैश्विक सम्मान
सर्वप्रथम तो मैं गर्व के साथ लेखिका गीतांजलि श्री को बुकर पुरस्कार प्राप्त होने की बधाई देती हूं, नमन करती हूं। यह उपन्यास “रेत समाधि “2018 में हिंदी में प्रकाशित हुआ था तब इसकी अधिक चर्चा नहीं थी किंतु 375 पेज का उपन्यास अंग्रेजी में अमेरिका में रहने वाली लेखिका अनुवादक डेजी राकवेल…
अनुभव
वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सविता चडढा की कलम से उनका नाम डी डी त्रिपाठी अर्थात धर्म ध्वज त्रिपाठी था। वे रायबरेली के विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे । पता नहीं कहीं उन्होंने मेरी एक कहानी किसी पत्रिका में पढ़ी थी और उन्होंने उस पर प्रतिक्रिया स्वरुप अपना पत्र मुझे लिखा था । कहानी उन्हें पसंद आई थी…
मतलब के यार
चंद्र प्रकाश जी अपने मित्र रमेश की पौत्री का रिश्ता करने के लिए भागम भाग कर रहे थे। लड़का उनकी जानकारी में था। दोनों पक्षों में उनकी उठ बैठ थी। रिश्ता करने के चक्कर में कई बार उन्हें यात्रा भी करनी पड़ी। अपने घर पर भी उनको बातें सुननी पड़ती थी कि बे फालतू के…
पितृदिवस पर कनाडा से “मनस्विनी” समूह के सभी सदस्यों के सहयोग से स्वरचित पंक्तियां
न मेरी आंख ही फड़कीन ही हिचकियाँ आईंमगर फिर भी यें लगता हैंकि कोई याद करता हैं….वो ओर कोई नहीं मेरे पापा…पापा की दुलारी,थोड़ी बिगड़ी, थोड़ी प्यारीसुबह जल्दी जगाते हैं पापा,नौ बजे रात मैं बत्ती बुझाते हैसदैव याद में आतेमेरे प्यारे पापाउनकी दिलचस्प बातेंज्ञान से भरी नसीहतेंउनकी किताबों का भंडारअनुशासन में छिपा प्यारमेरे प्यारे पापापापा…
गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश करें
श्रीमती कविता मल्होत्रा (संरक्षक-स्तंभकार-उत्कर्ष मेल) गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश करें चिंतन ही जीवन का उद्देश्य करें ✍️ बुद्धि समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त करने के लिए मनुष्य उम्र भर एक प्रतियोगी की तरह अनेक रास्तों से गुज़रता है।अधिकतर रास्ते स्वार्थ सिद्धि की बुनाई से गुँथे होते हैं इसलिए गंतव्य पर न पहुँच कर बहुत से…
भारतीय साहित्य पर्यावरणीय चेतना से ओत-प्रोत है – अजिम्स मुहम्मद भारतीय साहित्य में पर्यावरण विमर्श पर कोडुंगल्लूर में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
पर्यावरण प्रदूषण या पर्यावरण में मानव के हस्तक्षेपों के कारण आजकल जो प्राकृतिक विपत्तियाँ दुनिया भर में हो रही हैं, इनसे हम सब वाकिफ़ हैं । पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का समय बीतता जा रहा है । युवा वर्ग इस गंभीर समस्या के प्रति सचेत नज़र आते हैं । भारत इस विषय में गहराई…
हॉन्गकॉन्ग को लेकर भारत ने बदले अपने सुर
चीन अपने पडोसी देशों से रिश्ते बद से बदतर करता जा रहा है, चाहे वह ताइवान हो, जापान हो या कोई और देश,वह हर किसी से उलझने का साहस करता नजर आ रहा है। अगर हॉन्गकॉन्ग की बात करे तो ये बोलना कतई गलत नही होगा कि चीन ने वहा लोक-तंत्र की हत्या कर दी…
राष्ट्र, समाज और संघ: शताब्दी की नयी दृष्टि
संघ की शताब्दी यात्रा का उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों में संतुलन, संस्कार और एकता लाना है। डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत अखंड है और हिन्दू राष्ट्र की भावना जीवन और संस्कृति में निहित है। संघ का कार्य निःस्वार्थ सेवा, शिक्षा में संस्कार और सामाजिक उत्थान पर केंद्रित…
जीवन के वृक्ष को जीवन्त रखना है,
जीवन के वृक्ष को जीवन्त रखना है, प्रेम के पानी से उसे सींचते रहना है। उसको सुखाता है नकारात्मक सोच, शुभ सोच से सदा हराभरा रखना है। अहंकार की ऊष्मा विष के समान है, जो जीवन को विषाक्त कर देता है। जो सीख लिया है दंभ को दुत्कारना, मजेदार जीवन का वह मजा लेता है।…
