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सोनम-राजा रघुवंशी की कथा ने हिला दिया समाज

राजनीतिक सफरनामा कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सोनम और राजा रघुवशी की कहानी ने आम लोगों को चिन्तित कर दिया है । लगातार घट रही ऐसी घटनाओं से समाज का चिन्तित होना जायज भी है । ऐसा भी अनुमान लगाया जा सकता है कि बहुत सारी ऐसी घटनायें भी होतीहोगीं जो समाज के सामने नहीं आ पा रहीं…

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पुस्तक गोष्ठी मंडल, एमिटी विश्वविद्यालय तथा अनुराधा प्रकाशन, दिल्ली द्वारा काव्योत्सव का आयोजन

पुस्तक गोष्ठी मंडल, एमिटी विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा एवं अनुराधा प्रकाशन के सयुंक्त तत्त्वावधान में ‘प्रथम संस्करण: हिंदी पखवाड़ा काव्योत्सव 2022 (14 सितम्बरसे 6 अक्तूबर)’ का समापन समारोह दिनांक 7 अक्तूबर को विश्वविद्यालय के प्रबंधन सभागार में आयोजित किया गया, साथ ही इसे ऑनलाइन ज़ूम, यूट्यूब, वफेसबुक पर प्रसारित किया गया। आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी…

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मित्रता दिवस पर सखी को समर्पित कविता

मंजू लता हे ! सखी फ़िर कब मिलेंगेयाद आती हैं तुम्हारीखोजती हैं आंखे तुम्हारी चंचलतातुम्हारे कोमल अधरों की मुस्कुराहट हे ! सखी फ़िर कब मिलेंगेखोजती हैं मेरी आंखे तुम्हारा भोलापनमेरा रूठना तुम्हारा मनानासाथ ही डेरी मिल्क गिफ्ट करना हे ! सखी फ़िर कब मिलेंगेयाद आती हैं क्लास की बातेएक दूसरे में खोकर खाली पीरियड मेंबाते…

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हर बार जीतना जरूरी नहीं है

हर बार जीतना जरूरी नहीं है कभी-कभार हार भी जाया करो। सारी बाजियों में दिमाग का काम नहीं होता, कभी दिल भी लगाया करो।। और हमें यूँ  टकटकी लगा कर ना देखते रहा करो। कभी-कभार अपनी पलकों को भी झपकाया करो।। दोस्त, तमाम उम्र किसी का साथ तुम ना दिया करो। नए पंछियों को खुद…

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मेरा गांव बदल रहा है,

अम्बरीश श्रीवास्तव मेरा गांव बदल रहा है, सोया हुआ रक्त उबल रहा है। पहले मिलजुल कर रहते थे, अब एक दूसरे को निगल रहा है ।। सुना था मकान कच्चे है पर रिश्ते पक्के होते थे गांव में । बच्चे बूढे, हारे थके श्रमिक किसान सब खुश थे छाव में ।। आज छांव छितर गई…

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नवरात्रि

नवरात्रि वर्ष में दो बार आती हैं।बसंतिक नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि। हमारा हिंदू कैलेंडर व नव वर्ष की शुरुआत नवरात्रि से होती है। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नवरात्रि प्रारंभ होती हैं जो हिंदू नव वर्ष का पहला दिन भी होता है। इस दिन सनातन धर्म के लोग नव वर्ष बड़े ही उत्साह…

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त्योहारों का सेल्फ़ी ड्रामा

(त्योहार अब दिल से नहीं, डिस्प्ले से मनाए जाते हैं — हम अब त्योहारों से ज़्यादा अपनी तस्वीरें मना रहे हैं।) अब त्योहार पूजा, मिलन और आत्मिक उल्लास का नहीं, बल्कि ‘कंटेंट’ का मौसम बन गए हैं। दीपक की लौ से ज़्यादा रोशनी अब मोबाइल की फ्लैश में दिखती है। भक्ति, व्रत और परंपराएँ अब…

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“मन के हारे हार है”

मन को कर तू शक्तिमय,ले हर मुश्किल जीत।      काँटों पर गाना सदा,तू फूलों के गीत।” मनुष्य का जीवन चक्र अनेक प्रकार की विविधताओं से भरा होता है जिसमें सुख- दु:ख,आशा-निराशा तथा जय-पराजय के अनेक रंग समाहित होते हैं । वास्तविक रूप में मनुष्य की हार और जीत उसके मन की मज़बूती पर आधारित होती…

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जन भागिदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव  है

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष (5 जून,) जन भागिदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव  है लाल बिहारी लाल नई दिल्ली । जब इस श्रृष्टि का  निर्माण हुआ तो इसे संचालित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों का एक सामंजस्य  स्थापित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों के बीच एक परस्पर संबंध का रुप प्रकृति ने…

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