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अखबार के रंग, चाय की चुस्कियों के संग

उर्दू भाषा का शब्द अखबार आज हर घर की जरूरत है। घर-घर में चाय की चुस्कियांँ लेकर अखबार पढ़ा जाता है। अखबार होता है, जादुई पिटारा। जो देता है हमें बारीक से बारीक खबर। समाचार, खेल, मनोरंजन, साहित्यिक, टेक्नोलॉजी सभी को समेटे होते हैं आज के अखबार। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने चाहे कितना भी कब्जा क्यों…

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वीणावादिनी नमोस्तुते

शारदे श्वेताम्बरावीणावादिनी नमोस्तुते शुभ्र मुकुट सरसिजश्वेतासनाविद्यादायिनी नमोस्तुते हस्ते पुस्तक स्फटिक माल्याशुभमति वरदे नमोस्तुते ब्रह्मा श्रीहरि रुद्र वन्दिताज्ञानदायिनी नमोस्तुते हरती तिमिर अज्ञान मूढ़तासृष्टि प्रकाशिनी नमोस्तुते पीत पुष्पमय पुलक वसंतादेवी सरस्वती नमोस्तुते | सीमा धूपरजबलपुर

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किंडरजॉय प्ले-वे स्कूल के बच्चों ने गणतंत्र दिवस मनाया

कहते हैं कि छोटे बच्चे गीली मिट्टी के सामान होते हैं , कुम्हार रूपी शिक्षक उनको जो भी आकर देंगे वही स्वरुप को प्राप्त कर लेते हैं . KINDERJOY PLAYWAY स्कूल की विशेषता है कि खेल खेल में पढाई, और संस्कार बच्चों में रोपित किये जाते हैं , यही कारण है कि देश प्रेम ,…

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स्त्री

स्त्री जब खुश होती है बर्तन माजते माजते कपड़े धोते-धोते  रोटी बेलते बेलते सब्जी में छोका लगाते लगाते  भी गुनगुनाती है कभी अकेले खामोश चारदीवारी में भी गुनगुनाती है सुबह से शाम तक  चक्की की तरफ पिसते पिसते  भी खुश होकर गुनगुनाती है वह बच्चों की भागमभाग बच्चों की फरमाइश  और रिश्ते नाते निभाते निभाते…

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सही कदम

        घर के बाहर बारिश की झड़ी लगी हुई थी और अन्दर सीमा और रमेश चाय के साथ पकौड़े खाने का आनंद ले रहे थे । बारिश में ज्यादातर लोग चाय पकौड़े का आनंद लेते हैं। बातें करते करते सीमा को अपना बचपन याद आने लगा । कैसे वह बारिश में बाहर भाग जाती थी…

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व्यंग्य : शठम् शाठयं समाचरेत्….

पंकज सीबी मिश्रा /राजनीतिक विश्लषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी जी हां  ! प्रस्तुत व्यंग्य शुद्ध मवेशी संस्कृति को इंगित करता एक आंखे खोलने वाला आलेख है जिसे पढ़कर कुछ ठौर और धिंढोर के आंखो में सूजन आ सकती है ।  कल किसी दिशा से आवाज़ आई- ‘ वोट चोर, गद्दी छोड़। वोट चोर ने इस…

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बैसाख़ पर गुलज़ार हो हर हृदय में प्रेम की शाख़

कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार, संरक्षक) प्रेम के पल्लवों से गुलज़ार हो जाए हर शाख़ नवचेतना हर रूह में उतरे तो घटित हो बैसाख़ वक्त की रफ़्तार और प्रकृति के प्रहार धीमे धीमे अपने विभिन्न रंगों से समूचे विश्व को रंग रहे हैं।वैश्विक स्वास्थ्य केवल दैहिक उपकरणों की देख-भाल का परिमाण नहीं है, बल्कि वैश्विक मानसिकता…

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वंशबेल

“विगत महीनों में जाने कितनी बार दुहराया, ‘मुझे माफ कर दो, तारिका!’ पर मन का बोझ कम नहीं होता, क्योंकि कृत्य माफी के योग्य था ही नहीं। पर जाने क्यों, पार्क की इस बेंच पर बैठते ही तुम्हारे यहीं कहीं होने का एहसास जागृत हो उठता है, क्योंकि यह बेंच हमारी पसंदीदा जगह थी, जब…

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टनल में फंसे मजदूरों को जातिवाद का फायदा क्यों नहीं मिला  …!

उत्तरकाशी  टनल में फंसे मजदूरों के जगह अगर यहीं 41 वीआईपी लोग एलीट क्लास  अथवा पिछड़े और दलित नेता टाईप के होते और वे ऐसे ही कहीं फंस जाते तो सदन के दलित नेता और मीडिया क्या करता ? पूरा देश सर पर उठा लेता।  बोलने का मतलब है सरकार से सवाल करना  मीडिया ने…

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“पांव ज़मीन पर निगाह आसमान पर” लेख संग्रह का भव्य लोकार्पण

वरिष्ठ लेखिका सविता चड्ढा के सद्य: प्रकाशित लेख संग्रह   “पांव ज़मीन पर निगाह आसमान पर”  का भव्य लोकार्पण पंजाब केसरी सभागार में पंजाब केसरी की चेयरपर्सन किरण चोपड़ा द्वारा किया गया।इस अवसर पर दिल्ली एवं दिल्ली से  दूर स्थानों से लेखक ,साहित्यकार शामिल हुए। इस अवसर पर अश्वनी कुमार, स्वामी, संपादक और श्रेष्ठ पत्रकार  पंजाब केसरी ने पधारकर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान…

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