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बेज़ुबा

शहर की उन गलियों से आज फिर गुज़रा , जिसने मुझे 12 साल पहले गूंगा बना दिया था। एक तो पुराना मकान उसका वो टूटा हुआ छज्जा उस पर खड़ी शरमाती लड़की जिसे देख मै हमेशा के लिये चुप हो गया। ज़ुबा हो कर भी बेज़ुबा हो गया। वो चुप खड़ीमुझे देखती और मैं दूर…

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लघुकथा : हौसलों की उड़ान

बोलते मम्मी से गले लिपट गई। मम्मी की आंखों में खुशी के आंसू निकल पड़े। उन्हें लगा कि आज उनकी मेहनत सफल हो गई। मम्मी (नविता जी) का मन अतीत की स्मृतियों में खो जाता है । अनन्या जब मात्र 10 महीने की थी तभी उसे दिमागी बुखार चढ़ जाता है। उसमे उसका अगर शरीर…

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 हिंदी दिवस (डॉ चंद्रसेन भारती)

हम भारत के वासी हैं, हिंदुस्तान हमारा है। हिंदी दिवस हिंदी भाषा, यह संकल्प हमारा है। हिंदी दिवस मनाने को, हम आगे बढ़के आए हैं, मातृभूमि की रक्षा को, संकल्पित भाव सजाए है।  आर्य वृत्त भारतखंडे, आदिकाल ने नाम दिया। इंडिया की पड़ी जरूरत क्यों, क्यों  इसमें बदलाव किया। भारत मां के बनें  प्रहरी, लोकतांत्रिक…

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खुशी की तलाश

खुशी शब्द ही खुशी का एहसास कराता है,चेहरे पर मन्द मुस्कान,मन में उमंग सीमहसूस होती है। खुशी की तो हर किसी को तलाश रहती है,खुशी तो हमारे अंदर से ही तो उपजती है बस हर परिस्थिति में अपने आप को सयंम के साथ सब्र रखते हुए मन की गहराइयों से अनुभव करना है,कुछ न कुछ…

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फिरी की घोषणायें ही बन चुकी हैं आधार

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव टनल में फंसे हैं मजदूर जिनको पन्द्रह दिनों की कवायद के बाद भी नहीं निकाला जा सका । हो सकता है कि जब तक यह आलेख छपे तब तक वे निकल जायें । ईष्वर ऐसा ही करे । पर टनल में मजदूरों के फंसने और एक लम्बी कवायद ने यह तो समझा ही…

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।। कुछ करते क्यों नहीं ।।

जनसंख्या विस्फोट को कंट्रोल करते क्यों नहीं हैं, मिल सारे नेता ऐसा कोई कानून गढ़ते क्यों नहीं हैं। प्रकृति भी देगी किसी दिन धोखा डरते क्यों नहीं हैं, हम दो हमारे दो का नारा ये सच करते क्यों नहीं हैं। कहीं अकाल सदियों से तो कहीं बरस रहा पानी। आया बुढ़ापा पता ना चला कब…

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प्रेम,love,attracfion : आशा सहाय 

मेरे घर के बरामदे मे कपड़े  सूखने के लिए टाँगीगई एक अलगनी पर एक अत्यंत छोटी सी चिरैया ने पंखों का एक छोटा सा घोंसला बना लिया अथवा यों कहूँ कि लटका लिया है।सफेद छोटे छोटे पंखों का एक आकर्षक घोंसला।आश्चर्य होता है कि कहाँ से उसने इतने छोटे छोटे पंख ढूँढे होंगे।मै चिकित्सीय कारणों…

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सुनाते रहे

खामियां, खामियां तुम गिनाते रहे। बेवजह ही हमें, तुम सुनाते रहे।। हो हमारी ख़ता, या तुम्हारी ख़ता। हर दफा ही तुम्हें, हम मनाते रहे।। माना आवाज में मेरी जादू नहीं। गीत तेरे लिए फिर भी गाते रहे।। अंधा कानून है, सुनते हम आ रहे। न्याय अंधों से हम क्यों कराते रहे। अपने महबूब को चाँद…

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जैन जागृति मंच, बाड़मेर के बैनर तले होगा आयोजित, 125 से अधिक जैन प्रतिभाओं का होगा सम्मान

बाड़मेर । 20.12.2024 । जैन जागृति मंच, बाड़मेर की ओर से जैन समाज की प्रतिभाओं को प्रोत्साहन को लेकर आयोजित होने वाला जैन प्रतिभावान मेडल सम्मान समारोह 29 दिसम्बर रविवार को श्री गुणसागर सूरी साधना भवन के पावन प्रांगण में श्री नाकोड़ा जैन तीर्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री रमेश मूथा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित…

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बुकर पुरस्कार हिंदी का वैश्विक सम्मान

      सर्वप्रथम तो मैं गर्व के साथ लेखिका गीतांजलि श्री को बुकर पुरस्कार प्राप्त होने की बधाई देती हूं, नमन करती हूं।           यह उपन्यास  “रेत समाधि “2018 में हिंदी में प्रकाशित हुआ था तब इसकी अधिक चर्चा नहीं थी किंतु 375 पेज का उपन्यास अंग्रेजी में अमेरिका में रहने वाली लेखिका अनुवादक डेजी राकवेल…

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