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संपादक मनमोहन शर्मा ‘शरण’ होंगे सम्मानित

हिन्दी की विश्व-प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था साहित्य-मंडल श्रीनाथद्वारा, राजस्थान के त्रिदवसीय (14 -16 सितम्बर 2022) राष्ट्रीय आयोजन में “उत्कर्ष मेल” (पाक्षिक पत्र) के सम्पादक श्री मनमोहन शर्मा ‘शरण’ को “सम्पादक रत्न” सम्मान  प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। शर्मा जी उत्कर्ष मेल पाक्षिक पत्र का सम्पादन 12 वर्षों से नयी दिल्ली से नियमित  रूप…

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ताटक छ्न्द : राम

राम नाम सबसे ही प्यारा, कहते सारे ज्ञानी हैं। जो भूला मूरख कहलाया, वही बड़ा अज्ञानी है। राम नाम की डोरी पकड़ो, मिलता सहज सहारा है। हाथ पकड़ कर जो भी रखते,भव से पार उतारा है। माया की नगरी यह दुनिया, लालच ने भरमाया है। चार दिनों का जीवन पाया, नहीं समझ क्यों पाया है।…

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ग़ज़ल : डा. अफ़रोज़ आलम- कुवैत

अत्तार के मस्कन में ये कैसी उदासी है सोने की मुक़ाबिल में हर सम्त ही मिट्टी है तू साहब-ए-क़ुदरत है तू अपना करम रखना सहरा की तरफ़ माइल हालात की कश्ती है रौशन है दरख़्शाँ है ये दौर ब-ज़ाहिर तो मज़दूर के बस में तो बस रीढ़ की हड्डी है लम्हों की तआ’क़ुब में सदियों…

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रश्मि श्रीधर की 2 कविता एवं परिचय

1 क्या खोया ,क्या पाया अतीत के पन्नों को जब पलटा मैंने….तब देखा ,क्या खोया,क्या पाया….धोती-कुर्ता को छोड़,जींस-टाप क्या पहन लिया….चरण स्पर्श को छोड़,हाय-बाय को अपना लिया….दादी-नानी के रिश्तों को भुला दिया,व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर को अपना लिया…अतीत के…..अपने ही घर को मकान बना दिया,नयी दुनिया को अपना मुकाम बना लिया,समय को सपनों की दुनिया में…

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राजभाषा – हिंदी

बड़ी ही सरल है हिन्दी की परिभाषायह है भारत वर्ष की राजभाषासंस्कृत की है यह बेटी प्यारीशासन और प्रशासन की है राजदुलारीसंविधान में इसका दर्जा है बड़ा ही ऊंचासम्मान करता इसका भारत समूचासितम्बर माह में होता इसका बहुत ही महिमा मंडननहीं कर सकता कोई भी इस बात का खंडनसुर, तुलसी, निराला और दिनकर सरीखे सरस्वती…

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चौड़ाई और गहराई : आरती परीख

लघुकथा डॉक्टर ने कहा — “आपके पास बस छह महीने हैं।” रवि थोड़े दर्द के साथ, पर हल्के से मुस्कुराकर बोला — “छह महीने…? काफी हैं, जीने के लिए….” घर लौटते ही उसने अपनी टू-डू लिस्ट जला दी — वो लिस्ट; जिसमें प्रमोशन, नया घर, कार और सामाजिक प्रतिष्ठा दर्ज़ थी। अब वो हर सुबह…

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“अपने पराए”

विपत्ति के समय ही मनुष्य के चरित्र की पहचान होती है। कौन अपना है और कौन पराया है, इसका पता मुसीबत में ही लगता है। इस घटना के जो मुख्य पात्र हैं वो आज नहीं हैं। परन्तु घटना से मिली एक सीख आज भी मुझे याद है। दादाजी के गुजर जाने के बाद की घटना…

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व्यंग्य – कैशलेश होकर ये कहां आ गए हम….

मोबाइल आया घड़ी का ज़माना गया, लैपटॉप आया टेलीविजन का जमाना गया, एंड्राइड फोन आया रेडिओ का जमाना गया और अब तो हद ही हो गई ऑनलाइन पैमेंट आया बेचारे पर्स का जमाना गया। अति मॉडर्न दिखने के चक्कर में युवा वर्ग अपने पास कैश नहीं रखता। जो रखते भी हैं उनके पास खुल्ले पैसे…

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महकता गुलाब

तुम्हारे कांटे भी तुमको बचा न पाएंगे, इतना मत महको लोग तोड़ के ले जाएंगे। प्यारी सूरत पै तुम्हारी न रहम खाएंगे, तुम्हारे अश्क किसी को नजर न आएंगे, तुम्हारा सीना छेद गूंथ लेंगे माला में, तुम्हारे घाव जरा भी नहीं सहलाएंगे। तुम्हारे दर्दे दिल को देव पर चढ़ायेंगे। इतना मत महको लोग तोड़ के…

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आर्यसमाज के महान वटवृक्ष :स्वामी दयानंद सरस्वती

दयानंद सरस्वती, जिन्हें स्वामी दयानंद सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय दार्शनिक और समाज सुधारक थे, जिन्हें “आर्य समाज” नामक एक सामाजिक सुधार आंदोलन के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। 19वीं सदी का समय सामाजिक, राष्ट्रीय चेतना व पुनर्जागरण की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं उपादेय काल रहा है।…

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