मैं भी एक इंसान हूँ, बस पुरुष हूँ
माँ,कभी एक पल को ठहरकर सोचना,तेरा बेटा भी एक इंसान है…हाँ, वो बेटा जिसे तूने बचपन में गिरने से पहले पकड़ लिया था,पर अब जब वो टूट रहा है… तो कोई नहीं देखता। आजकल ज़माना बदल गया है,अब हर पुरुष या तो अपराधी है या अपराधी घोषित कर दिया गया है।समाज में एक ऐसा तबका…
