शुद्धिमंत्र बनें जो सदियों तक दोहराया जाएगा
कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार, संरक्षक) बालक हो या शावक सबकी पालिका एक भेदभाव इंसानी कुंठा प्रकृति का इरादा नेक ✍️ हम सभी अपनी माँ की गोद पर तो अपना स्वामित्व समझने लगते हैं लेकिन उस मातृत्व की गरिमा को बनाए रखने के सब दायित्व नज़रअंदाज़ कर देते हैं।परिवार और समाज से मिलने वाली शिक्षा को हम…
