Latest Updates

 बिहार चुनावःः रेबड़ियों के भरोसे

राजनीतिक सफरनामा : बिहार चुनावःः रेबड़ियों के भरोसे — कुशलेन्द्र श्रीवास्तव बिहार चुनाव अपने रंग मे रंगा चुके है । एक तरफ दीपावली और छठ जैसे महापर्व चल रहे थे वहीं दूसरी ओर नेता सारा कामकाज छोड़कर चुनाव में लगे थे । पांच साल के लिए मेहनत होती है यह ‘‘कर लो भैया आपको, माई…

Read More

प्रेम की संपूर्णता–डॉ शिप्रा मिश्रा

            प्रेम में ऊब-डूब मत देना गुलाब जो मुरझा जाएँ किताबों में रखे सुषमा सौंदर्य मौलिकता सब भूल जाएँ देना इत्र में भीगे गुलाबी पत्र जिसे नोटबुक में पढ़ा जा सके नजरें बचाकर जब जहाँ जैसे जी चाहे रखा जा सके सहेजकर उन तमाम प्रेमी युगल के लिए जानते हैं जो प्रेम की मौन मूक…

Read More

मैं कैसे पढ़ूँ?

       रोहन बड़े ही सहज भाव से पास आकर खड़ा हो गया,“मैम आप कहती तो हैं कि तुमलोग डॉक्टर, इन्जीनियर ,शिक्षक कुछ भी बन सकते हो, परंतु हमारे यहाँ तो दो जून का भोजन भी मुश्किल से बनता है, हमारे माँ-बाप हमें कहाँ से डॉक्टर और इन्जीनियर बनायेंगे? उसमें तो बहुत अधिक पैसे लगते हैं।”…

Read More

काल और उसके रहस्य : आशा सहाय

जब कब अब और तब जैसे शब्द निरर्थक हैं अगर इनके साथ काल नहीं जुड़ा हो।पूर्वोक्त शब्दों से हम काल को मापने का दम्भ भरते हैं। वस्तुतः भौतिक दृष्टि से इसे मापना अत्यंत कठिन है। यह अपनी व्यावहारिक सुविधा के लिए करना चाहते हैं ताकि दो घटनाओं के मध्य की स्थिति को हम मस्तिष्क मे…

Read More