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राखी का पर्व

राखी  का त्योहार है प्यारा भाई बहन का रिश्ता न्यारा I राखी के धागे में बंधता भाई बहन का प्यार सारा। खुशी चहक चहक के कहती है बयार सुगंधित बहती है। मिष्ठान्न थाली में रख लाती भाई को प्रेम से खिलाती माथे ऊपर तिलक लगाती नारियल भी साथ में लाती। भाई देता है आशीष और…

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खुलेआम जनमत की खिल्ली उड़ रही है

संसद के अंदर  जब  शोर-शराबा होता है, अनर्गल ही  घात-प्रतिघात होने लगता है। मेहनती जनता की कमाई की बर्बादी पर, जनप्रतिनिधियों का  ध्यान नहीं जाता है। संसद  में  एक मिनट  के  बहस  में  व्यय, सुनते हैं उनत्तीस हजार रुपये हो जाता है। सुविधाभोगी  जननेता ईमानदारी से सोचें, खर्च होने वाला सब धन कहां से आता…

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चूनर

धानी सी चूनर पहन धरा इतराये सुंदरता पर अपने। चहुँदिशि ही शोभा है बढ़ी पूरित हों  ज्यों सारे सपने। लहराती सी हैं नदियाँ डोलें मन चंचल है खिला-खिला। जंगल वन सब मुदित लगें जीवन का मानों मंत्र मिला। चहुँदिशि ही शोभा है बढ़ी पूरित हों  ज्यों सारे सपने। नद नदियाँ सब सूख रहे थे जीव…

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अँधेरे और उजाले

गंगा के  किनारे, यूँ हीं नहीं  लगी है भीड़ साहब। लोगों  ने  पाप  किये  होंगे शायद  बेहिसाब।। और वो कहता है मुझको, आओ कभी मेरे भी द्वार। गर करते  हो मुझे से प्यार, बिना किसी दरकार।। काश! वो तो,  मेरी  हैसियत ना पूछता। अच्छा  होता,  गर  वो  मेरी  खैरियत   को  पूछता।। उनका पैग़ाम नफ़रत था,…

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खुदीराम बोस

(03 दिसंबर, 1889 से 11 अगस्त, 1908) प्रारंभिक जीवन :- खुदीराम बोस का जन्म 03 दिसंबर, 1889 ई. को बंगाल में मिदनापुर ज़िले के हबीबपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री त्रैलोक्य नाथ बोस और माता का नाम श्रीमती लक्ष्मीप्रिय देवी था। बालक खुदीराम के सिर से माता-पिता का साया बहुत जल्दी…

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15अगस्त्

रहिए सदा आप मस्त मस्त आया है पन्द्रह अगस्त यह हर साल पर आता है इसी लिए यह भारत माता है कारगिल में वीरों ने, दुश्मनों को, किया विवश और त्रस्त। आया है पन्द्रह अगस्त।।।। आओ फिर से नये भारत का करें सृजन द्वेष बुराई, जाति भावना न आने दें मन सद उपयोग करें यह…

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“धर्म ताकत या सियासत ?”

हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि चुनाव की सरगर्मी के साथ साथ धर्म के नाम पर सियासत तेज हो जाती है। सर्वधर्म समभाव का पालन करने वाले इस देश की आत्मा को हिंदू मुसलमान के नाम पर बांटने की कोशिशें रुकने का नाम नहीं लेती हैं। देश कोरोना से लड़ रहा है, कितने…

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कोख का बंटवारा

रामनरायण के दो बेटों का नाम रमेश और सुरेश है। युवा अवस्था में रामनारायण के मृत्यु होने के बाद उनकी पत्नी रमादेवी ने रामनारायण के जमा पूंजी और पूर्वजों से मिली संपत्ति से दोनों बेटों का परिवरिश किया। रमादेवी का बड़ा बेटा रमेश पढ़ लिखकर शहर में सरकारी विभाग पर बड़े बाबू के पद पर…

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सावन कजरी और झूला

वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही,पूर्वांचल के बाग झूला गीतों से चहक उठते हैं और कजरी गायन की प्रथा का पालन शुरू हो जाता है, भाद्रपद कृष्णपक्ष की तृतिया को कजरी तीज मनाई जाती है,इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और रतजगा करते हुए कजरी गायन करती हैं।कजरी मे मुख्यतः संयोग वियोग और वर्षा…

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पितृदिवस पर कनाडा से “मनस्विनी” समूह के सभी सदस्यों के सहयोग से स्वरचित पंक्तियां

न मेरी आंख ही फड़कीन ही हिचकियाँ आईंमगर फिर भी यें लगता हैंकि कोई याद करता हैं….वो ओर कोई नहीं मेरे पापा…पापा की दुलारी,थोड़ी बिगड़ी, थोड़ी प्यारीसुबह जल्दी जगाते हैं पापा,नौ बजे रात मैं बत्ती बुझाते हैसदैव याद में आतेमेरे प्यारे पापाउनकी दिलचस्प बातेंज्ञान से भरी नसीहतेंउनकी किताबों का भंडारअनुशासन में छिपा प्यारमेरे प्यारे पापापापा…

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