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‘सर्दी के दिनों में’ (कविता)

दिन छोटे, रातें लम्बी सूरज की रोशनी का कोई भरोसा नहीं, सर्द हवाओं के बीच कभी दिन में अँधेरा, तो कभी रोशनी। मौसम की इस आँख मिचौली में सर्दी के दिनों में सूरज धुँधले आसमां के किसी कोने से कभी झाँकता है सिर उठाकर, तो कभी छिप जाता है बादलों की आड़ में। ऋतु भी…

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“छोटी बेटी”

श्रीमती आहूजा की आंखें बंद होने के साथ ही सुनीता को जीवन में अंधकार नज़र आने लगा था। एक अनाथ लड़की का एकमात्र सहारा उसकी मालकिन भी अब नहीं रही थी। उनके दोनों बच्चे विदेश से वापिस आ गए थे। क्रियाक्रम होने के बाद थोड़ी देर में ही सब लोग अपने अपने घर लौट गए…

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वाराणसी के लोकप्रिय नेता है दयाशंकर मिश्र दयालु , रहते है सर्वसुलभ !

 वाराणसी को भाजपा का गण कहा जाता है क्योंकि  काशी ने ही मुरली मनोहर जोशी जैसा मजबूत संघ विचारक , सांसद  नेता और महेंद्र नाथ पांडेय जैसा जनप्रिय मंत्री दिया है । वर्तमान राजनीति में वाराणसी में विधानसभा चुनावों में एक जो सबसे चर्चित और लोकप्रिय चेहरा नजर आ रहा वो है राज्य सरकार में…

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चीफ ऑफ डिफेंस बिपिन रावत के लिए करोड़ों नतमस्तक !

सीडीएस जनरल बिपिन रावत की हेलिकॉप्टर दुर्घटना ने कई हवाई दुर्घटनाओं की याद दिला दी । ऐसी ही एक हवाई दुर्घटना में हमारे सबसे बड़े परमाणु वैज्ञानिक की मौत हुई थी और उस एक मौत से हमारा परमाणु कार्यक्रम कई वर्ष पीछे चला गया था । हम बात कर रहे हैं डॉ. होमी जहांगीर भाभा…

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तुझे वो किरदार होना पड़ेगा.

बकाया बहुत हैं मेरे सपने तुमपे,तुम्हें बेहिसाब होना पड़ेगा , रहोगे कब तक यूं दायरों में, अब तुम्हें आसमां होना पड़ेगा !! हर्फ-हर्फ लिखते रहे “क़िस्से”, जिसके हम अपनी सांसों पर , सब समेट लो संग अपने कि, अब तुम्हें किताब होना पड़ेगा !! सुनो, सरेआम शर्मसार न कर दें कहीं वो लोग, “हमारे खत”,…

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पश्चाताप

मंजू लता (राजस्थान) आज रामदीन  बहुत ही उदास बैठा था ।आज फिर उसके बेटे रमेश ने लड़ाई की।उसे घर छोड़ने को कह दिया। यह रोज की बात हो गई थी। वह बैठे-बैठे पुरानी यादों में खो गया । जब चार बेटियों के बाद बेटा रमेश हुआ था । दोनों पति पत्नी बहुत ही खुश हुए…

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हर बाधा को स्वीकार करें

हर बाधा को स्वीकार करें। लड़ कर भी उसे पार करें।।       हर बाधा को स्वीकार करें…। यूँ ज़िन्दगी कहाँ आसान निकलती हैं। कहीं शोर तो कहीं शांत ही चलती हैं।।      हर बाधा को स्वीकार करें…। संघर्ष को पार करके जो चलते हैं। फ़िर वो ही नर फलते औऱ फूलते हैं।।      हर बाधा…

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ये लाल टोपी वाले तेरा नाम तो बता !

राजनीतिक सफरनामा   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव अब उत्तर प्रदेश की राजनीति ‘टोपियों’’ पर जाकर उलझ गई है । राजनीति को तो किसी न किसी बिन्दु पर जाकर उलझना ही था सो वह टोपी पर उलझ गई । वैसे तो राजनीति को उलझने के लिए विकास नाम की चादर मिली हुई है पर यह चादर फट चुकी…

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शेष होते वर्ष के अवशेष

निर्जीव खिलौनों से बहलते थे अब तक बच्चे इस जहान के रोबोटिक शिक्षा ने योग की उम्र में भोग भरा मन में इंसान के ✍️ स्वामी विवेकानंद जी का एक कथन है कि अगर किसी देश को उन्नति की राह पर लाना है तो उस देश के बचपन को शिक्षित कर दो।कितनी गहराई है इस…

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भूलाभाई देसाई

(13 अक्टूबर, 1877 से 6 मई, 1946) प्रारंभिक जीवन :- भूलाभाई देसाई का जन्म 13 अक्टूबर, 1877 को गुजरात के वलसाड़ शहर में हुआ था। आरम्भ में उनके मामा ने ही उन्हें पढ़ाया। उसके बाद उन्होंने वलसाड़ के अवाबाई स्कूल और फिर बॉम्बे के भरदा हाई स्कूल से शिक्षा ग्रहण की। सन् 1895 में उन्होंने…

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