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दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोरखपुर में  भीम प्रसाद प्रजापति के दो काव्य कृतियों का लोकार्पण

गोरखपुर। संगम सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था तथा दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 14-12-25 दिन रविवार को महाविद्यालय सभागार में कवि श्री भीम प्रसाद प्रजापति की काव्य कृतियों ‘अनजाने पथ’ एवं ‘चाँद का बगीचा’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. रामदेव शुक्ल ने…

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वृद्धाश्रम नहीं, सम्मानाश्रम चाहिए

लेखक : विजय गर्ग समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुज़ुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। आज जब जीवन की गति तेज़ हो गई है, रिश्तों में व्यावहारिकता ने भावनाओं की जगह ले ली है, तब हमारे सामने एक दर्दनाक सच्चाई उभरकर आई है — वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या।…

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हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर महर्षि यूनिवर्सिटी में विशेष व्याख्यान और पुरस्कार वितरण

महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी, नोएडा के मीडिया विभाग में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में 16 सितम्बर को *“डिजिटल मीडिया में हिंदी की ताकत और संभावनाएँ”* विषय पर विशेष व्याख्यान और पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार, संपादक एवं प्रकाशक श्री मनमोहन शर्मा (शरण) रहे। उन्होंने अपने अनुभव साझा…

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डॉ.राहुल को हिन्दी शलाका सम्मान

साहित्य मंडल संस्था,श्रीनाथद्वारा के तत्वावधान में 13-14 फरवरी को समायोजित समारोह में “हिन्दी शलाका सम्मान” प्रदान करने की घोषणा की गई है। तदर्थ, श्रीनाथजी के नमन करते हुए संस्था के प्रधानमन्त्री श्री श्यामप्रकाश देवपुराअन्य पदाधिकारियों के प्रति  विशेष आभार। राहुल जी समकालीन हिन्दी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं। उनकी कृतियों सामाजिक चेतना…

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सामाजिक समस्याओं में उलझने की हमारी कोशिश जारी है……

पंकज सीबी मिश्रा  / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी            मनुष्य कशेरुकी समूह का रीढ़युक्त प्राणी है। मानव व्यवहार को समझना स्वयं मानव के वश में नहीं। हमारे  जीवन में जीवविज्ञान का कोई अस्तित्व नहीं केवल हम  विभाजन में विश्ववास रखते है। हमें समाज में सामाजिक प्राणी कहा भर जाता है क्योंकि हमारे  पास…

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अक्षय तृतीया: समृद्धि, पुण्य और शुभारंभ का पर्व

अक्षय तृतीया, जिसे ‘आखा तीज’ भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन पर्व है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है—जो कभी क्षय (नाश) न हो। यही कारण है कि यह दिन शुभ कार्यों, दान-पुण्य, निवेश और नए आरंभ के लिए…

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एक जन कवि – रामधारी सिंह दिनकर

(23 सितंबर, 1908-24 अप्रैल, 1974) प्राचीन काल से ही, लेखकों और कलाकारों द्वारा विपत्ति के समय मानव जाति की अदम्य भावना को रेखांकित करने के लिए वीर रस या वीर भावना को अपनाया जाता रहा है। अजेय के सामने खड़े होने के इस संघर्ष का परिणाम हर बार जीत में नहीं होता, लेकिन इसने निश्चित…

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उत्कर्ष मेल 16-30 अप्रैल (सम्पादकीय )

उत्कर्ष मेल (राष्ट्रिय पाक्षिक पत्र) 16-30 अप्रैल (सम्पादकीय )14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती के विशाल कार्यक्रम -राष्ट्रीय-प्रादेशिक एवं जिला स्तर पर सरकारी, गैरसरकारी तथा समितियों द्वारा आयोजित किए गये, जिनमें पार्टी बाजी से इतर सबने मिलजुल कर संविधान निर्माण में अहम भूमिका अदा करने वाले डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी को नमन-वंदन करते हुए ठोस लोकतन्त्र…

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भारत में वैदिक कालीन शिक्षा पद्धति

डॉ ज्योत्स्ना शर्मा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार (मो.)- 9810424170 @ j.shriji@gmail.com शिक्षा समाज और मानव विकास की आधारशिला है। जब मानव जाति के लिए शिक्षा शब्द का प्रयोग किया जाता है तब उसका अर्थ विवेक से लिया गया यानी मनुष्य की वह स्थिति जिसके अंतर्गत उसमें अंतर्निहित शक्तियों का निरंतर विकास होता है तथा उसके…

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(अंबेडकर जयंती विशेष)

“लोकतांत्रिक भारत: हमारा कर्तव्य, हमारी जिम्मेवारी” जनतंत्र की जान: सजग नागरिक और सतत भागीदारी लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का साझेधार भी है। भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें न्याय, समानता, संवाद, स्वच्छता, कर…

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