साहित्य
बारहमासी वसंत होगा
कविता मल्होत्रा (संरक्षक) किसी को नज़ारे पसंद आते है तो कोई हरियाली का तलबगार है ख़ुशियाँ बाँटकर जग को ख़ुशी देना प्रकृति के दिव्य कारोबार का आधार है ✍️ वसंत ऋतु अपने आगमन के साथ-साथ जीवन दर्शन का एक बहुत ख़ूबसूरत संकेत भी लेकर आती है।हर तरफ़ रंग बिरँगे फूल देखकर किसका मन खुश नहीं…
मेरा भारत महान
पारमिता षड़ंगीले जा…. तुझे लेना हैसिर को मेरे … कितने बारशहिद होने के लिए, में तोआऊंगा बार-बार, गोलि खाई छाति मेंनौ महीने की गर्भवती स्त्रीन मुझे कोई दुःख थान उसकी आंखों में आंसू थींगर्भ में बेटा मेरा ,सलाम मुद्रा में तैर रहा था कल वो पिताअपने बेटे को कन्धे में लियाआंखें तो आंसुओं में भरा…
गणतंत्र भारतीयम कार्यक्रम संपन्न
नृत्यालय एवं जी वि क्रियेटिव आर्ट्स हैदराबाद , के तत्वाधन मे ” गणतंत्र भारतीयम ” औनलाइन कार्यक्रम 25 जनवरी 2022 को पूरे उत्साह के साथ मनाया गया जिसमे गायन, वादन तथा नृत्य तीनो के माध्यम से माँ भारती का वंदन किया गया l इस अवसर पर कोमली शंकर, यशस्वी, सत्य शारदा, तनिमा, साहिती, जानकी, वि. निवेदिता,…
रूपाली डोले के संचालन में सजा हृदयांगन संस्था मुंबई का रंगारंग कार्यक्रम
गणतंत्र दिवस के अवसर पर सजी बच्चो और किशोरो की महफिल गूगल मीट पर ।। ढाई घंटे चले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संभाली देहरादून से आदरणीया डा0 विद्युत प्रभा चतुर्वेदी मंजू जी ने एवं कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी इंदौर से रूपाली जी डोले ने ।। संस्था ने उन्हे *हृदयांगन उत्कृष्ट मंच संयोजिका सम्मान 2022…
मेरा हिन्दुस्तान
आसमान से ऊंचे कद का भारत मां का गौरवशीशे पे जिसके कश्मीर और दिल में सुन्दर वैभवजनजन के होठों पे खिलती वीरो की गाथा होकदमों में गंगा हो – लहराता तिरंगा हो पाँच तत्व से बन जाती है इसकी शौर्य कहानीअग्नि जल पृथ्वी आकाश और हवा अभिमानीभगत सुभाष गांधी के संग लक्ष्मी की गाथा होकदमों…
भारत के वीर पुत्र को नमन हमारा है
जय माँ भारती , माँ भारती, जय माँ भारती….. (1)माँ भारती का लाल जब सरहद पर लड़ने जाता है।उड़ उड़ के मिट्टी बदन को चूमे दुश्मन भी थर्राता है।ऐसे भारत के वीर पुत्र को नमन हमारा है…… (2)सीना तान के माँ मस्तक पर शौर्य तिलक करती है।वीर सिपाही जब घर से विजय पताका लेके चलता…
दो-दो हिन्दुस्तान
लाज तिरंगें की रहे, बस इतना अरमान ।मरते दम तक मैं रखूँ, दिल में हिन्दुस्तान ।।●●●बच पाए कैसे भला, अपना हिन्दुस्तान ।बेच रहे हैं खेत को, आये रोज किसान ।।●●●आधा भूखा है मरे, आधा ले पकवान ।एक देश में देखिये, दो-दो हिन्दुस्तान ।।●●●सरहद पर जांबाज़ जब, जागे सारी रात ।सो पाते हम चैन से, रह…
गण और तंत्र की बढ़ती दूरी
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सर्वजन हिताय, सर्वजन रक्षाय और सर्वजन सुखाय की भावना से निहित एक सार्वभौमिक संविधान की छाया के तले बहुभाषी, बहुजातीय, बहुधर्मावलंबियों का समूह स्वच्छन्दता और निर्भीकता के साथ जीवनयापन कर रहा हो वह गणतंत्र अपनी माधुर्य मुस्कान के साथ अपना 73 वां दिवस मनाने जा रहा है । स्तुत्य तो होगा ही ।…
