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चमत्कार और अंधविश्वास का फेर

                                                                          कुशलेन्द्र श्रीवास्तव  धीरेन्द्र शस्त्री और फिल्म पठान चर्चाओं में आ गई । जो चर्चाओं में आ जाता है वह फेमस हो जाता है । किसी के भी प्रसिद्ध होने के लिए यह सबसे आसान तरीका होता है । पूरी मीडिया धीरेन्द्र शास्त्री के हर क्रियाकलाप को दिखाने लगी । धीरेन्द्र शास्त्री अपनी हुकार से…

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 हिंदुस्तान हमारा ऑनलाइन  साहित्यिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन

अखिल भारतीय स्वयंसेवी संस्था सोशल ऐंड मोटिवेशनल ट्रस्ट के द्वारा दिनांक 23/1/2023 क़ो सरस्वती पूजा और गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर हिंदुस्तान हमारा ऑनलाइन  साहित्यिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।जिसमें कई राज्यों से साहित्यकार जुड़े और सोशल एंड मोटिवेशनल  ट्रस्ट, मंच देशभक्ति से ओत प्रोत हो गया. कार्यक्रम की शुरुआत मां शारदे के…

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राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग

स्वतंत्र, कानून का पालन करने वाले संस्थान आवश्यक जांच और संतुलन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मजबूत और लचीले लोकतंत्रों के लिए अंतिम आधार प्रदान करते हैं। हाल ही में, भारत में समाज के कमजोर वर्गों द्वारा विरोध की कई घटनाएं हुई हैं। इसके अलावा, असहमति के दमन की प्रकृति कानून प्रवर्तन…

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बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन। आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन।।

जीवन में सफल होने के लिए धैर्य रखना और अपने सपनों के लिए समर्पित रूप से कड़ी मेहनत करना महत्वपूर्ण है। जीवन में कुछ भी मुफ्त नहीं है, और इसलिए हमें जीवन में बड़ी चीजें हासिल करने के लिए अपने सभी प्रयास करने और अपनी सीमाओं को चरम तक पहुंचाने की जरूरत है। इसके अलावा,…

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पर्यटन ,दर्शनीय स्थलों पर जाकर सुकून महसूस करें

मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के धार जिले के विकासखंड बाग़ के समीप लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर 5 वी -7 वी सदी में निर्मित 12 बौद्ध गुफाएं है । इनकी बनावट अजंता -एलोरा ,श्रीलंका ,बौद्ध गुफा की लगभग एक समान है । गुफाओं में मूर्तियां ,लाइट रिफ्लेक्टिंग पेंटिंग आकर्षकता का केंद्र है ।यहाँ पर…

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पुराने हांडी में नया चावल पका रहें धनाढ्य नेता .!

बहुत पुराने वक्त से हम सुनते आ रहे हैं कि जनतंत्र, जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा शासन होता है। जनतंत्र में जनता होती थी, सरकार होती थी, चुनाव होते थे, नीतियां होती थी, संसद और विधायकाऐं होती थीं, जिनमें जनता द्वारा सरकार को चुना जाता था। सरकार जनता के कल्याण के…

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जोशीमठ की डरावनी तस्वीर   

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव जोश             जोशी मठ की तस्वीरें सभी को डरा रही हैं । मकानों में पड़ती दरारें और सम्पूर्ण क्षेत्र का धीरे-धीरे जमीन में धंसते जाना भय तो पैदा करेगा ही । हजारों घर इसकी चपेट में आ चुके हैं और संभव है कि यह संख्या इससे भी अधिक हो जाए । नए साल…

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स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग -प्रियंका सौरभ

मनुस्मृति या भारतीय धर्मग्रंथों को मौलिक रूप में और उसके सही भाव को समझकर पढ़ना चाहिए। विद्वानों को भी सही और मौलिक बातों को सामने लाना चाहिए। तभी लोगों की धारणा बदलेगी। दाराशिकोह उपनिषद पढ़कर भारतीय धर्मग्रंथों का भक्त बन गया था। इतिहास में उसका नाम उदार बादशाह के नाम से दर्ज है। फ्रेंच विद्वान…

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नव आंग्ल वर्ष के अवसर पर  हमारा विचारवाद   !

यूपी में रहते हुए और लगभग तीन दशकों तक कभी कभार ही इधर उधर की यात्रा करते हुए मैं‌ इस भूमि से लगभग कटा रहा। किन्तु भारत के इस बड़े राज्य इस भूमि को समझने का माध्यम-स्थल हो सकते हैं। दृष्टि होनी चाहिए। यहां के नगर न्यूयॉर्क जैसे नगर नहीं हैं। न्यूयॉर्क में अमीरी गरीबी…

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नये साल का रोचक इतिहास

लाल बिहारी लाल नव वर्ष उत्सव  मनाने की परंपरा 4000 वर्ष पहले बेबीलोन(मध्य ईराक) से शुरु हुई थी जो 21 मार्च को मनाया जाता था, पर रोम के शासक जुलियस सीजर ने ईसा से 45 ई. पूर्व जूलियन कैलेंडर की स्थापना विश्व में पहली बार की तब ईसा पूर्व इसके 1 साल पहले का वर्ष…

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