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हालात की सौग़ात : आरती परीख

बिमल खिड़की के पास बैठा बाहर झाँक रहा था। हवा धीरे-धीरे परदों से खेल रही थी। आसमान पर बिखरे बादल धूप को ढक रहे थे, जैसे कोई अनकही चुप्पी घर पर फैल गई हो। लेकिन बिमल का मन इस चुप्पी से ज़्यादा भारी था— कल रात से भीतर उमड़ा तूफ़ान अब भी थमा नहीं था।…

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रजिस्टर्ड पोस्ट का अंत : भरोसे की वह मुहर अब नहीं रहेगी

विजय गर्ग डाकिए की साइकिल की घंटी, थैले से झाँकते पत्रों की उत्सुक प्रतीक्षा, और रजिस्टर्ड डाक की पावती पर हस्ताक्षर का रोमांच – ये पल भारतीयों के दिलों में एक युग की तरह अमर हैं। लेकिन अब यह युग समाप्त होने जा रहा है। भारतीय डाक विभाग ने 1 सितंबर, 2025 से अपनी 50…

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स्वतंत्रता का अधूरा आलाप

आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” — डॉ. प्रियंका सौरभ 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ दिया था।…

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प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः…..

पंकज सीबी मिश्रा  / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी सदाचारी जीवन की समग्रता ही श्री कृष्ण है। इसलिए हमारे शास्त्रों ने भगवान श्री कृष्ण को सोलह कलाओं से परिपूर्ण बताया। श्री कृष्ण होना जितना कठिन है श्री कृष्ण को समझना उससे भी कहीं अधिक कठिन है। भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था,…

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जन-गण-मन अधिनायक….. : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा आइये हम अपनी स्वतंत्रता की एक और वर्षगांठ गर्वोन्मुख मस्तक के साथ मनाएं । हमारा राष्ट, हमारा ध्वज और हमारा राष्टगान हमारी धरोहर है और हर भारतीय इस पर गर्व करता है । ‘‘जनगण मन अधिनायक’’ की मधुर स्वरलहरियां हमारे तन और मन में जोश भर रहीं हैं । हम नतमस्तक हैं अपने…

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देशप्रेम

निशि  मुझे आज ही जाना होगा , जल्दी से तैयारी करा दो ।” समर बोला।        “कैसे ,अभी कल ही तो आते हो और आज फिर जाना है ?” निशि का चेहरा उदास हो गया।    “यही तो हमारी वर्दी का कमाल है ,जब चाहे तब बुलावा आ जाता है । आखिर जिम्मेदारी भी तो…

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देश की तरक्की के लिए धन और ब्रेन, ड्रेन को रोकना जरूरी*

(राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के पांच साल) स्कूल समाजीकरण के प्राथमिक माध्यम के रूप में नागरिकों के निर्माण में पहला और सबसे महत्वपूर्ण घटक है। इवान इलिच ने अपनी पुस्तक ‘डिस्कूलिंग सोसाइटी’ (1971) में तर्क प्रस्तुत किया है कि “शिक्षा का संस्थागतकरण एक अति-संस्थागत समाज के निर्माण को गति प्रदान करता है। शिक्षा प्रणाली एक…

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भारत@79: अटूट शक्ति की ओर

“79 वर्षों की यात्रा से विश्व-नेतृत्व की दहलीज़ तक — भारत का समय अब है।” “उन्नासी वर्ष की यात्रा में भारत ने संघर्ष से सफलता, और सफलता से नेतृत्व की राह तय की है। आज हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र, उभरती अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में खड़े हैं। परंतु असली लक्ष्य अभी…

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(रिश्तों की हत्या का आधुनिक ट्रेंड) 

नौकरी लगते ही पतियों को छोड़ रही हैं आधुनिक औरतें “रोज़गार मिला, रिश्ते छूटे,जिसने पढ़ाया, वही पराया हो गया” विवाह अब त्याग और समर्पण की बजाय स्वार्थ और स्वतंत्रता की शरण में चला गया है। अनेक मामले सामने आ रहे हैं जहाँ पति ने पत्नी को पढ़ाया, नौकरी लगवाई, पर जैसे ही वह आत्मनिर्भर हुई,…

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“देवभूमि का दर्द: विकास के नाम पर विनाश”

पहाड़ों का सर्वनाश: उत्तराखंड की आखिरी चेतावनी “देवभूमि का दर्द: विकास के नाम पर विनाश” उत्तरकाशी के थराली में बादल फटने से हुई भीषण तबाही उत्तराखंड के पर्यावरणीय संकट की गंभीर चेतावनी है। विकास के नाम पर हो रही पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई, अवैज्ञानिक निर्माण और बेतरतीब पर्यटन ने पहाड़ों की सहनशीलता को खत्म कर…

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