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मोबाइल महिमा

विधा:-कुंडलियाॅं छंद मोबाइल लाया क्रांति, शुक्रिया खोज वाले। धन्य मूर्त रूप दाता, नेट जोड़़ने वाले॥ नेट जोड़़ने वाले, टीवी घडी़ कंप्यूटर। इसमें ही गैजेट, बुक टाॅर्च केलकुलेटर॥ कहें ‘लक्ष्य’समझाय, कलयुगी ज्ञान समाया। काग़ज़ कलम विहाय, क्रांति मोबाइल लाया॥ गूगल ज्ञान की पुतली, मोबाइल की शान। जानी अनजानी करे, समस्या समाधान॥ समस्या समाधान, निरख यूट्यूब उपदेश।…

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हिंदी वर्ण प्रकृति के संग

अमलतास खिला सुवर्ण सा आम बौर भर आये इमली की खटास ईख मिठास मन लुभाये उड़े परिंदे लहरा पंख ऊँचाई नील गगन छू आये ऋतु वसंत जीवन में उर्जा भर लाये | एकाग्रता से विद्याध्ययन एश्वर्यता राष्ट्र समृद्ध बनाये ओजस्वी मन सुसंस्कृति और सुज्ञान बढ़ाये अंशुमान क्षितिज पर अ: अवनि जगमगाये | कुमुदनी कनेर कंद…

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साईकिल

           इलाहाबाद का नैनी इलाका कभी बंजर जमीन था जहां उपज के नाम पर कुछ भी नहीं था लोग  सब्जी तथा फूलों का व्यवसाय करके अपना घर चलाते थे।उन‌ खाली जमीनों पर करीब सत्तर के दशक में कुछ पूंजीपतियों की नजर पड़ी और उन्होंने उसे खरीदकर उनपर अपनी-अपनी फैक्ट्रियां बनानी चालू कर दीं। इससे दो फायदा…

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मसखरे

मसखरे हो चले हों लोग जहाँ के मसखरेपन में ही हो जब सिंहासन और मजाक में ही उड़ा दी जाती हों जहाँ लोगों की समस्याएं दोनों तरफ से नहीं हो किसी को भी जन-पीड़ा से कोई सरोकार की जाती हों जब मीठी-मीठी बातें दोनों छोर से और पिटवाई जाती हों उन्हीं से तालियाँ और नचाया…

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सभ्य असभ्य इसी धरती पर।

डॉक्टर चंद्रसेन भारती सभ्य असभ्य इसी धरती पर। देव धनुज रहते आऐ। रावण से सब घृना करते  राम नाम सुन हर्साऐ। धरती से ही सोना उपजे, कोयला खान नजर आए। मंथन से कोलाहल निकला, अमृत वही नजर आए। संस्कार मिलते हे घर से, गली गलियारे मिलें नहीं। कागा धन ना हरे किसी का, कोयल किसको…

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    अग्नि नैया

कहानी (डोली शाह)        नीलिमा मेरी बचपन की बहुत अच्छी सहेली थी। आधा किलोमीटर की दूरी पर घर होने के कारण हमारा प्रायः एक बार मिलना हो ही जाता था । सौभाग्य से उसका विवाह भी मेरी ही कॉलोनी के  सीमेंट फैक्ट्री के मेनेजर से हो गया , जिससे दोनों की दोस्ती और भी घनिष्ठ…

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बाल मजदूरी

माँ शारदे को सादर नमन बिषय:-बाल मजदूरी विधा:-काव्य सृजन तुम्हें गमगीन कर देंगे, गरीबों के ये आशियाने। थामकर दिल वहाँ जाना, मिलेंगे त्रस्त दीवाने।॥ ना होंगे पात्र भंडारण, अभावों से भरा जीवन। जरूरतें भी नहीं ज्यादा, ख्वाबों से विमुख मन॥ बडा़ परिवार एक कारण, अशिक्षा से भरा दामन। व्यस्त रहते भरण पोषण, दीनता इनका आभूषण॥…

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एरोप्लेन और मैं

एरोप्लेन उड़ा मैं बैठी विंडो सीट बाहर देखा सागर चला मेरे साथ चलता गया साथ साथ फिर रुकने लगा थकने लगा चला  गया कहीं  पीछे। बस मेरा एरोप्लेन ही चलता गया। एरोप्लेन और मैं आज एरोप्लेन उड़ा मैं विंडो सीट बैठी। बाहर देखा मेरे साथ मेरा शहर चला। कुछ दूर चला । फिर रुकने लगा।…

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रिश्तो में सामंजस्य

निहारिका की शादी खूब धूमधाम से हुई। वह बहुत खुश है। ससुराल में उसे खूब अच्छा लाड प्यार मिल रहा है। पग फेरे (गौने) की रस्म के लिए आज वह मायके आई हुई है। सुबह से ही चहक रही है। सभी को अपने ससुराल के किस्से बताने में लगी हुई है। शाम को उसके ससुराल…

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अब नहीं रही

घुमंतु परिवार में भीख के रोजगार में, वह चलने से लाचार टांगें  अब नहीं रहीं। रीते घड़े की पहेलियां दाना खोजती उंगलियां,  वह पेट की पीड़ाएं अब नहीं रहीं। दिन में लकड़ी बीनना रात के लिए सहेजना,  वो आग तापती रातें  अब नहीं रहीं। कलुआ कई दिनों से आया नहीं शहर से,  वो बेटे को…

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