कविता और कहानी
मातृभाषा सम्मानित हो, तो आत्मनिर्भर भारत हो
धरती से अंबर तक आजकल हर कोई वसंती रंग में रंगा हुआ है, साथ ही इन दिनों हमारे देश की लगभग चार पीढ़ियों पर गुलाबी रंग का मदिर अहसास भी छाया हुआ है।मान्यता है कि वैलेंटाइन दिवस के माध्यम से पूरे विश्व में निःस्वार्थ प्रेम का संदेश दिया जाता है।लेकिन प्रेम के व्यापक स्वरूप को…
ये शायर तो….. नहीं
हम जब भी कोई शायर के बारे में सोचते हैं तो एक कोमल हृदय का नाजुक से तेवर वाला या वाली तस्वीर सामने आती हैं।एक नर्म दिल आदमी जिसके दिल में एक प्यार की शमां जलती हैं जो खुद तो रोशन होती हैं लेकिन औरो को भी रोशन करने का काम करती हैं।वे एक नाजुक…
मुझे भी याद कर लेना
विधा – गीत मेरे आँगन का सावन जब लिये बरसात आयेगा इस फुलवारी में आकर के गुलो गुलशन महकायेगा मैं तुझको याद करूंगी तुम्हारे दर पर आँधी की जब होंगी दस्तक बेशुमार दबाकर सारी हलचल तुम मुझे बस गुनगुना लेना मुझे भी याद कर लेना जो तेरी याद सताएगी नींद बैरन हो जाएगी डसेगी नागन…
भारत के वीर पुत्र को नमन हमारा है……
जय माँ भारती , माँ भारती, जय माँ भारती….. (1) माँ भारती का लाल जब सरहद पर लड़ने जाता है। उड़ उड़ के मिट्टी बदन को चूमे दुश्मन भी थर्राता है। ऐसे भारत के वीर पुत्र को नमन हमारा है…… (2) सीना तान के माँ मस्तक पर शौर्य तिलक करती है। वीर सिपाही जब…
बारहमासी वसंत होगा
कविता मल्होत्रा (संरक्षक) किसी को नज़ारे पसंद आते है तो कोई हरियाली का तलबगार है ख़ुशियाँ बाँटकर जग को ख़ुशी देना प्रकृति के दिव्य कारोबार का आधार है ✍️ वसंत ऋतु अपने आगमन के साथ-साथ जीवन दर्शन का एक बहुत ख़ूबसूरत संकेत भी लेकर आती है।हर तरफ़ रंग बिरँगे फूल देखकर किसका मन खुश नहीं…
कैसे भूलूं तुझे ए मां
छुटपन में आता न था खाना न ही चलना और बैठना पैदा हुए तो एहसास न था जीने का आगाज न था तूने ही संभाला था तूने ही संवारा था बड़े होने की व्यथा बड़ी सज़ा बड़ी कड़ी थी दुःख की तपती धूप थी तब तुम ही तो छांव शीत थी लिखी थी किस्मत रब…
