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“धर्म ताकत या सियासत ?”

हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि चुनाव की सरगर्मी के साथ साथ धर्म के नाम पर सियासत तेज हो जाती है। सर्वधर्म समभाव का पालन करने वाले इस देश की आत्मा को हिंदू मुसलमान के नाम पर बांटने की कोशिशें रुकने का नाम नहीं लेती हैं। देश कोरोना से लड़ रहा है, कितने…

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‘जीवन’ का दुरूपयोग‌

एक तरफ तो हम कहते हैं कि जल ही जीवन है और तो वही दुसरी तरफ हम अपने दैनिक जीवन में निरंतर जल संसाधनों का दुरूपयोग कर उनका दोहन करते जा रहे हैं। जल सभी के लिए अति आवश्यक है। जैसे मानव जीव जंतु पशु पक्षी पेड़ पौधे  फसल उत्पादन आदि सभी के लिए अति…

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लोग

लोग होते हैं जो ढूँढते हैं अपनी कमी दूसरों में। हँसते हैं झूठी हँसी छिपाते हैं अपनी दोहरी शख्स़ियत करते हैं दिखावा आदमीयत का। लोग नज़र आते हैं करते हुए काना-फूसी चुगली करते ज़हर उगलते मीठी ज़बान से। लोगों की किस्मों का ही तो भरम है करें किससे प्रेम भरोसा करें किस पर झूठ ओढ़े…

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कोरोना

कोरोना ने आज करा दिया सबको ये एहसास। धन दौलत सब मिथ्या,ना रहेगा कुछ भी पास।। जीवन मे सब कर लो , अब प्रभु से ये अरदास। सबको रखना सुरक्षित,सबको अपनो के पास।। सबकुछ अब तुम त्याग दो,करो घर मे निवास। कोरोना अगर हो गया , कोई ना आयेगा पास।। आपस की दूरी बढ़ी ,…

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वक्त इंसान को मजबूर कर देता है

वक्त इंसान को मजबूर कर देता है,‘लॉकडाउन’का पालन करबाता है.समय के सामने  हर  कोई बौना है,सबों को समय झुका कर रखता है. जग में किसी से डरिए या न डरिए,वक्त से हमेशा संभल कर ही रहिए.जीवन में सदा  शुभ कर्म करते हुए,समय का सदुपयोग करना सीखिए. वक्त को जिसने भी बर्बाद किया है,उसको वक्त भी…

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गुरूकुल

श्रीमती कविता मल्होत्रा दोस्तों मित्रता दिवस की रस्म हम यूँ निभा लेते हैं निस्वार्थ प्रेम बनकर निस्वार्थता को मित्र बना लेते हैं अपने घरौंदों की जड़ें दिमाग़ में न बनाकर दिलों में बनाई जाएँ तो हर एक घर ही मंदिर हो जाए !! दिलों को अपनी ख्वाहिशों की सियासत नहीं बल्कि जीवन के परम उद्देश्य…

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दीपावली

            ” माँ आज भी ज्यादा दीये नही बिके ।”ठेले को किनारे लगाते हुए अशोक उदास होकर बोला ।     माँ ने उसे सांत्वना देते हुए कहा,” अरे कल बिक जायेंगे,क्यों परेशान हो रहा है ? देख मेरे भी दीये ज्यादा नहीं बिके हैं।”माँ बेटे को समझा तो रही थी पर मन ही मन बुरे…

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शिव समान मोहि प्रिय नही दूजा !

श्रावण माह कैलाशपति भगवान नीलकंठ के कृपा का माह माना जाता है । सड़को पर रंग बिरंगे कावड़ो से सजे कावड़ियों की यात्रा अनायास ही भक्ति भाव से ओत प्रोत कर देती है । आजकल सड़को पर नमाज और हनुमान चालीसा का मुद्दा जोर पकड़ रहा । भक्ति और श्रद्धा केवल सहज शुद्ध हृदय से…

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वर्तमान परिपेक्ष्य में साहित्यकारों की भूमिका

अक्षत श्रीवास्तव हम यथार्थवादी युग में प्रवेश कर चुके हैं । कल्पनाओं में अब हम नहीं जी सकते । सभी को हकीकत का दर्शन चाहिये । हम कल्पनाओं में नहीं जी सकते । हमारी कल्पनायें भी बेरंग हो चुकी हैं । हमें यथार्थ ही चाहिए । यथार्थ याने कड़वी दवा जिसके मीठेपन में भी कसैलापन…

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जागो वोटर जागो : सम्पादकीय

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) आज सेना दिवस (15 जनवरी) है, भारतीय सेना को सहृदयता कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए नमन करता हूँ ।कोरोना – नए वेरिएंट (ओमीक्रॉनद्ध) की बात करें तो हाँ संख्या अति शीघ्रता से बढ़ अवश्य रही है किन्तु हमें यहाँ अपनी सोच को नियंत्र्ति करना होगा । मौसम बदलना–खाँसी–जुकाम के मामले हमेशा…

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