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हाउसिंग फॉर ऑल 2022 का लक्ष्य पूरा करने को बने अलग से मंत्रालय : केके खंडेलवाल

-चैलेंजिस फॉर हाउसिंग फॉर ऑल 2022 में बोले हरेरा चेयरमैन-रियल एस्टेट को जनता के हितों का ध्यान रखने की सलाह-अग्रवाल वैश्य समाज की ओर से आयोजित किया गया वेबीनारगुरूग्राम, 12 जुलाई। हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेरिटी अथॉरिटी (हरेरा) के चेयरमैन डा. केके खंडेलवाल ने कहा कि हाउसिंग फॉर ऑल 2022 का लक्ष्य पूरा करने के लिए…

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(अंबेडकर जयंती विशेष)

“लोकतांत्रिक भारत: हमारा कर्तव्य, हमारी जिम्मेवारी” जनतंत्र की जान: सजग नागरिक और सतत भागीदारी लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का साझेधार भी है। भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें न्याय, समानता, संवाद, स्वच्छता, कर…

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जो बाल्कनी हमें मिली थी

जो बाल्कनी हमें मिली थी हमनें कमरा बनवा डाला। परिपूर्ण हों आशाएं छोटा एसी लगवा डाला। बहुत खुश थे हम बिटिया को नया रूम मिलेगा उसका भोला भाला चहेरा अब खुशी से झूम खिलेगा। इसी कल्पना में खोए थे इतने में बिटिया आईं कमरा उसने भी देखा पर ना वो मुस्काई। कुछ संजीदा भाव उसके…

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अखबार के रंग, चाय की चुस्कियों के संग

उर्दू भाषा का शब्द अखबार आज हर घर की जरूरत है। घर-घर में चाय की चुस्कियांँ लेकर अखबार पढ़ा जाता है। अखबार होता है, जादुई पिटारा। जो देता है हमें बारीक से बारीक खबर। समाचार, खेल, मनोरंजन, साहित्यिक, टेक्नोलॉजी सभी को समेटे होते हैं आज के अखबार। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने चाहे कितना भी कब्जा क्यों…

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जो इस देश का नागरिक है, उसे राष्ट्रगान गाना चाहिए : शाहनवाज

बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने शुक्रवार को यहां कहा कि राष्ट्रगान में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो इस राष्ट्र का नागरिक है, उसे राष्ट्र से प्रेम करना चाहिए और राष्ट्रगान को निश्चित रूप से गाना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के सहयोग कार्यक्रम में उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज…

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चुनावी पतंगों से सज चुका आसमान

राजनीतिक सफरनामा              चुनावी पतंगों से सज चुका आसमान                                                                                            कुशलेन्द्र श्रीवास्तव लोहड़ी पर्व पर पतंगबाजी होती है । पहले अपनी पतंग को हवा में ऊंचा उड़ाओ और फिर हवा में उड़ रही दूसरी पतंग को काट डालो । राजनीति में भी ऐसा ही होता है । आवश्वासनों से भरी रंगबिरंगी पतंगें आसमान में उड़ती…

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आपकी हो कृपा तो तृप्ति मिले

आपकी हो कृपा तो तृप्ति मिले शरण में आया है ये प्यासा मन चिर प्रतीक्षा पूर्ण नहीं हो रही मन चाहता नहीं दूसरा कोई धन अनवरत साधना का पथ यूँ दिखे जैसे मृग ढूँढें कस्तूरी को वन वन आपकी वो कृपा आज मुझको मिले जिसको खोजे दुनिया का हर जन सार हीन जीवन ये भी…

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बैसाख़ी के फिर मेले हों

श्रीमती कविता मल्होत्रा इतिहास गवाह है कि जहाँ रूह सहमत होती है वहीं रब की रहमत होती है।किसी भी तरह की अनहोनी का अंदेशा सबसे पहले अपनी ही रूह को होता है।ये और बात है कि मानव की चेतना अपने ही चैतन्य के इशारे को नज़रअंदाज़ कर देती है।यूँ तो मानव की पहुँच चाँद तक…

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उथल-पुथल से भरपूर रहा पखवाड़ा

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव यह पखवाड़ा बहुतउथल-पुथल वाला रहा । चुनाव भी निपटे और बहुत सारे बड़े कहे जाने वाले नेता भी निपट गए । वे चुनाव जीतकर निपट गए और बुछ चुनाव हार कर निपट गए । पर सबसे पहले तो भारत के लोकतंत्र के मंदिर में अनायास घुसने वाले तथाकथितों की कहानी…

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कहानी : रिश्तों की जड़ें

परिवार बड़ा था, घर पुश्तैनी और उसमें ज़िम्मेदारियाँ सबसे भारी। इसी भार को अपने कंधों पर उठाकर संजय ने एक दिन वह निर्णय लिया, जिसने उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दी। पुश्तैनी दुकान, बूढ़ी माँ, पत्नी और दो छोटे बच्चे, सबको पीछे छोड़कर वह विदेश चला गया। परदेश उसका सपना नहीं था, मजबूरी थी।…

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