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विवाह के बदलते रूप  : डॉ. विजय गर्ग 

माज में समय के साथ कई रीति-रिवाजों और परंपराओं में बदलाव आते रहते हैं। विवाह भी एक ऐसा संस्कार है जो न केवल दो व्यक्तियों को जोड़ता है, बल्कि दो परिवारों और सामाजिक संबंधों को भी जोड़ता है। लेकिन आधुनिक युग में विवाह का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पुराने समय की शादी पहले…

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पूजहि विप्र सकल गुण हीना । शुद्र न पूजहु वेद प्रवीणा ।।

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक़ एवं पत्रकार जौनपुर, यूपी  रामचरित मानस में बाबा तुलसीदास कहते है कि पूजहि विप्र सकल गुण हीना । शुद्र न पूजहु वेद प्रवीणा ।। औऱ वही मनु स्मृति कहती है कि-  अष्टापाद्यं तु शूद्रस्य स्तेये भवति किल्बिषम्। षोडशैव तु  वैश्यस्य  द्वात्रिंशत्क्षत्रियस्य च॥ ब्राह्मणस्य  चतुःषष्टिः पूर्णं वापि शतं भवेत्। द्विगुणा …

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प्रधान मंत्री जी की ललाट पर चिंता की रेखाएं

Doctor Sudhir Singh प्रधानमंत्री जी की ललाट पर चिंता की रेखाएं,130करोड़ जनता की परेशानी बयां करती हैं,दूरदर्शी राष्ट्रनायक  चुनौतियों से घबराता नहीं,खतरों से खेल लेने की उनकीआदत हो गई है. दुनिया के लिए ‘कोरोना’आज गंभीर खतरा है,धर्म-जातिऔर सरहद से उसका नहीं वास्ता है.जाल में वह फंसाता हैअमीर-गरीब सबको ही,असावधान इंसान का ही वह शिकार करता…

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आधुनिक समाज में मंचों से साहित्य थूकना सरल

   पंकज कुमार मिश्रा, व्यंग्यकार एवं राजनीतिक विश्लेषक जौनपुर यूपी कहते है  जिस आधुनिक  युग में तुलसी शब्द सुन कर बड़े बड़े कवियों को ‘तुलसी पान मसाला’  याद आता हो, उस युग में एक बड़े धार्मिक आयोजन के बैनर पर रजनीगंधा गुटका का विज्ञापन देखना बुरा क्यों है ? प्रायोजक चाहता है ‘सईंया’ ‘पियवा’ से…

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बातों से बात नहीं बनती साहेब : सम्पादकीय

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ श्रीकृष्ण जगत के मीत हैं,  ज्ञान भक्ति देते सदा, भक्त गा रहे गीत हैं जी हाँ मित्रे, 30 अगस्त को पूरे भारत में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व श्रद्धापूर्वक  मनाया है । आज पूरे विश्व में जो चुनौति भरा माहौल निर्मित हुआ है उसमें अपने कर्म को ज्ञानमय चिंतन–भक्तिमय भाव और कर्ममय व्यवहार की…

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जाने से पहले

जाने से पहले करना ऐसा, जनजीवन तेरा नमन करें। कुछ ऐसा कर जाना साथी, दुनिया हरदम गुणगान करे। राम और कृष्ण की ये धरती, निशि दिन तुझको नमन करे। आदर्शों पर तेरे नित चलकर, अपने देश का गौरव वहन करें। जो मान और सम्मान बढाये , कर्मों का ऐसा ही चलन रहे। उठा रहे सदा…

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नशे की जद में भामाशाह की नगरी

” लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है “ आज में जिस विषय पर लिख रहा हूँ उस विषय पर बशीर बद्र साहब की यह पंक्तियां एकदम सटीक बैठती नजर आती हैं माफ करना आज में जो लिख रहा हूँ वो शायद आपको बुरा लग सकता है?…

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माँ

।।माँ की महिमा कौन बखाने ।। गंगा जल सम पावन  ममता प्रेमसुधा रस साने । सुखद तृप्ति अनवरत  प्रदात्री   माँ को कहते साधु सयाने।। माँ की महि,,,,,,,।। जगकल्याणी सृजन है जग की   सृष्टा ईश्वर की माता । सब रस में पावनता भरती  सहती कष्ट न मन उकताता।। सुत के हित मे सब दुख…

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वर्तमान परिवेश में कबीर पंथ अति प्रासंगिक

(कबीर जयंती के अवसर पर) डॉ नीरू मोहन ‘ वागीश्वरी ‘ यह तो घर प्रेम का, खाला का घर नाही ।सिर उतारे भूंई धरे , तब पैठे घर माही ।।कबीर जी के समाज पशुओं का झुंड नहीं है उसके दो तत्व हैं रागात्मकता और सहचेतना अर्थात मानव समाज में रागात्मक रूप से एक अतः संबंध…

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बातों से कब बात बनी है….(सम्पादकीय) मनमोहन शर्मा ‘शरण’

अगस्त माह में अनेक त्यौहार–पर्व हैं जिनके द्वारा सांस्कृतिक, संस्कारिक, आ/यात्मिक एवं राष्ट्रीय मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है ।रक्षा–बंधन, जहां भाई–बहन के प्यार–विश्वास और संकल्प की खुश्बू आती है तो वहीं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आ/यात्मिक चिंतन का महापर्व आएगा जिसमें जीवन जीने की कला हम जानते हैं । 15 अगस्त राष्ट्रीय चिंतन एवं देशभक्ति…

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