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दैर-ओ-हरम में रहने वाले तू जाने क्या पीर मेरी

दैर-ओ-हरम में रहने वाले तू जाने क्या पीर मेरी जरा निकल तो दिखलाऊंगा कैसी है तदबीर मेरी दैर-ओ-हरम में………. तुझको ढूंढा सहरा-सहरा, तुझको खोजा गली-गली कहीं मिला ना तू ऐ मालिक पत्थर की सी बूत ही मिली कैसे हाल सुनाता तुझको ऐ पत्थर दिल ओ रे पीर तुझसे तो अच्छा है बालक सुनता है तहरीर…

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दोहा : सास ससुर ससुराल है,

सास ससुर ससुराल है,साला सलहज दूर। आवत जावत मुह पिटे,नैन देखि मजबूर।। ननद मिताई बांध के, चलते रिस्ते नात। टूटी डोरी सांस की, झूठी सारी बात।। पाहुन घड़ी बिताय के, निकले अपने धाम। ठहरे जो पहरे पहर,बिगड़े सारे काम।। भोगे अपने भोग सब,अपने करमे हार। जीती -जाती जिंदगी,कर ली कैसे?क्षार।। साढू के घर जाइये,हाथ रहे…

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द्वि-दिवसीयअखिल भारतीय वेद विज्ञान सम्मेलन 2023

महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की 200वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में द्विदिवसीयअखिल भारतीय वेद विज्ञान सम्मेलन 2023 द्वितीय दिवस महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की 200वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में द्विदिवसीयअखिल भारतीय वेद विज्ञान सम्मेलन 2023 का आयोजन सी सुब्रमण्यम हॉल, पूसा संस्थान; नई दिल्ली में किया जा रहा है। प्रस्तुत कार्यक्रम का आयोजन विश्ववेद परिषद्, परमार्थ…

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वारिष्ट साहित्यकार श्रीमती सविता चड्ढा की कलम से (अनुभव-4)

हम एक ही कार्यालय में काम करते थे । मैं प्रबंधक के रूप में कार्य कर रही थी और मेरी ड्यूटी थी 10:15 पर मुझे उपस्थिति  रजिस्टर चीफ के कमरे में चपरासी के हाथों भिजवाना होता था । मेरे आगे रजिस्टर होता और मैं अपनी उस मित्र की प्रतीक्षा करती रहती एक 2 मिनट  तक…

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मरणासन्न स्थिति में पड़े जीवितों को निकाला जाए

कविता मल्होत्रा (संरक्षक – स्थायी स्तंभकार) मरणासन्न स्थिति में पड़े जीवितों को निकाला जाए अब के बरस श्राद्ध कर्म में श्रद्धा का भाव डाला जाए ✍️ ये तो सच है कि माता-पिता के प्रति अपने संपूर्ण दायित्व निभाने वाली संतान को तीर्थ यात्रा पर जाने की ज़रूरत नहीं होती।अपने विस्तृत परिवार के साथ-साथ समाज के…

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डेढ़ माह का जीवन

कुश्लेन्द्र श्रीवास्तव (वारिष्ट पत्रकार एवं साहित्यकार), गाडरवारा, मध्य प्रदेश अस्पताल के जनरल वार्ड में आई तब उसकी नजर वार्ड के नए पेशेन्ट पर पड़ी थी। बेड नम्बर 8 पर एक दस साल का बालक आँख बंद किए लेटा था पास में ही एक कम उम्र की महिला बैठी थी जिसके चेहरे पर उदासी थी। उसने…

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पथ के हो राही

पथ के हो राही तुम हो पथिक थक के न हारो  थोड़ा  भी तनिक थोड़ा धीरज धर   बढ़ते जाना एक दूजे का   मनोबल बढ़ाना, आएंगी  बाधाएं हजार साहस को तुम   बनाना आधार, टेड़ी मेड़ी    होगी डगर चलते जाना    तुम हो निडर, आएगी जो भी     है रुकावट वो तो होगी   बस क्षणिक… पथ के हो राही…

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आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का स्वैच्छिक योगदान

-डॉ. प्रियंका सौरभ क्या राष्ट्र के स्वास्थ्य की देखभाल करने वाली इन महिलाओं को श्रमिक का दर्जा नहीं दिया जाएगा? आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की ज़रूरतें असाधारण नहीं हैं; उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त है। फिर भी, सरकारें उन्हें औपचारिक श्रम अधिकारों से वंचित रखती हैं…

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अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था का पंचम वार्षिक समारोह धूमधाम से सम्पन्न हुआ

दिनांक १६ अगस्त 2020 को अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था का पंचम वार्षिक समारोह ऑनलाइन लाइव काव्य प्रसारण के माध्यम से सम्पन्न हुआ। छह दिनों का यह कार्यक्रम अभिव्यक्ति मंच के लाइव पटल आगाज़ (गीत ग़ज़ल) से प्रसारित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता परम आदरणीय आशु कवि राजेश राज जी की उपस्तिथि में सभी कवियों एवं कवयित्रियों ने…

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हे राम !

हे राम! तुम आ जाओ ना । त्रेता से कलि है विषम बहुत, आकर मुक्त कराओ ना । बन्धन मे पड़ी लाखों सीताएँ , रावण से कहीं दुस्साहस वाले रावण । अब तो खड़े निज देश में , असंख्य राक्षस छिपे नर वेश में । हे राम ! तुम आ जाओ ना । पड़ने न…

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