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अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम्..!

पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी, सम्पर्क सूत्र  8808113709 महोपनिषद् 4.71 वो में एक सूक्ति है :- अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् ! उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥ जिसका आशय है कि संकीर्ण सोच वाले ही “अपना–पराया” करते हैं; उदारजन पूरी पृथ्वी को परिवार मानते हैं। आज जो लोग सांप्रदायिक राजनीति, जातिवाद…

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हंगामा करना बन गया है परिपाटी

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सांसदों और विधायकों का ससंद या विधानसभा के अंदर किया जाने वाला व्यवहार अब आम व्यक्तियों को भी अखरने लगा है । वित कुछ वर्षों से यह परिपाटी सी बनती जा रही है कि जब भी संसद का या विधानसभा का सत्र प्रारंभ होगा तब ही विपक्ष हंगामा करेगा ।…

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श्रावण में शिव भक्ति और आध्यात्मिकता

हिंदू सनातन धर्म में शिव भक्ति का विशेष  महत्त्व है । भगवान शिव को आशुतोष कहा जाता है ।वह जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं । सोमवार के दिन चंद्र देव ने भगवान शिव का पूजन कर क्षय रोग से अपने प्राण बचाए थे। सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग मंदिर इसी का प्रमाण है। इसलिए भगवान को सोमवार…

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ड्रोन की सदी

पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायु सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ज़रिए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था। दुनिया को पाकिस्तान के नापाक इरादों से भी अवगत कराया गया। यह निश्चित रूप से वायु सेना की श्रेष्ठता का एक शानदार प्रदर्शन था, लेकिन सिर्फ़ इसी से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। चीफ ऑफ…

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ग़ज़ल : आशुतोष द्विवेदी

हारी, थकी, उदास निगाहें जाग रहीं, ज़ख्म सो गए मगर कराहें जाग रहीं। अब वे रातें सपनों जैसी लगती हैं, हमें सुलाकर गोरी बाहें जाग रहीं। चिंता करते-करते चिता हो गए हम, राख में अब भी बिखरी चाहें जाग रहीं। बेदम होकर झपकी लेते पाँवों में कब से उलझी-उलझी राहें जाग रहीं। कबके उजड़े उम्मीदों…

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चौड़ाई और गहराई : आरती परीख

लघुकथा डॉक्टर ने कहा — “आपके पास बस छह महीने हैं।” रवि थोड़े दर्द के साथ, पर हल्के से मुस्कुराकर बोला — “छह महीने…? काफी हैं, जीने के लिए….” घर लौटते ही उसने अपनी टू-डू लिस्ट जला दी — वो लिस्ट; जिसमें प्रमोशन, नया घर, कार और सामाजिक प्रतिष्ठा दर्ज़ थी। अब वो हर सुबह…

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“संवाद का अभाव, संस्कारों की हार, स्कूलों में हिंसा समाज की चुप्पी का फल”

हिसार में शिक्षक जसवीर पातू की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि हमारे समाज की संवादहीनता, विफल शिक्षा व्यवस्था और गिरते नैतिक मूल्यों का कठोर प्रमाण है। आज का किशोर मोबाइल की आभासी दुनिया में जी रहा है, जबकि घर और विद्यालय दोनों में उपेक्षित है। मानसिक तनाव, संवाद की कमी और नैतिक शिक्षा…

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गुरुग्राम में सिंधी संस्कृति का भव्य उत्सव: ‘सुहिणी शाम सिंधियत जे नाम’

गुरुग्राम: श्री झूलेलाल सेवा समिति, गुरुग्राम द्वारा सिंधी संस्कृति, कला और साहित्य को समर्पित एक भव्य सांस्कृतिक संध्या “सुहिणी शाम सिंधियत जे नाम” का आयोजन 5 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह मनमोहक कार्यक्रम शनिवार शाम 5:00 बजे से रात 8:30 बजे तक अपैरल हाउस, सेक्टर 44, गुरुग्राम में आयोजित किया गया। इस आयोजन…

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“गिरते पुल, ढहती ज़िम्मेदारियाँ: बुनियादी ढांचे की सड़न और सुधार की ज़रूरत”

वडोदरा में पुल गिरना कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि भारत के जर्जर होते बुनियादी ढांचे की डरावनी सच्चाई है। पुरानी संरचनाएं, घटिया सामग्री, भ्रष्टाचार और निरीक्षण की अनुपस्थिति — यह सब मौत को दावत दे रहा है। राbजनीतिक घोषणाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन टिकाऊ निर्माण और जवाबदेही की योजनाएँ नदारद हैं। अब वक़्त है…

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नॉर्मल’ क्या है, ये सवाल खुद से पूछों, दूसरों से नहीं

हर एक मिनट का हिसाब रखती, भागदौड़ भरी वर्तमान जीवनशैली में सबसे बड़ी और लगातार उभरती हुई समस्या है हमारा स्वास्थ्य। प्रतिदिन के तनाव से उपजती और मौत के मुंह में ले जाती गंभीर बीमारियों को देखते हुए “शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्” यह संस्कृत सूक्ति बिल्कुल सही साबित होती है। जिन्हें हमारे समाज में अक्सर…

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