राजनीति का बदलता स्वरूप
-अनीता गौतम (प्रवक्ता एवं साहित्यकार) कैसा लोकतंत्र है यह कैसा प्रजातंत्र है,?? मेरी बात मानो यारों यह तो भीड तंत्र है। कि अधरों पे सिर्फ जहां जाति -धर्म का मंत्र है , खतरे में देखिए आज प्रजातंत्र है। कि तानाशाही ने दबोच रखी गर्दन संविधान की, हम सब तमाशबीन हैं ,माफिया स्वतंत्र है।,,,,,,,, ,,,,,,जी हां…
