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धर्मांतरण का धंधा: विदेशी फंडिंग और सामाजिक विघटन का षड्यंत्र

उत्तर प्रदेश में एटीएस ने एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें विदेशी फंडिंग के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये 40 खातों में भेजे गए। मुख्य आरोपी ‘छांगरू बाबा’ उर्फ जमशेदुद्दीन के नेतृत्व में यह गिरोह ऊंची जाति की लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपये की दर से धर्मांतरण कराता था। यह मामला…

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लघु कहानी : कुदरत का न्याय

लघु कहानी : कुदरत का न्याय Corona वायरस द्वारा मानवता के खिलाफ मचाए जा रहे तांडव ने मेरे हृदय को झकझोर कर रख दिया और मेरे अचेतन मस्तिष्क में दबी हुई एक वास्तविक एवं मार्मिक घटना को मेरे चेतन मस्तिष्क पर प्रक्षेपित कर दिया। विश्वविदयालय में एम. ए. द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं समाप्त होने पर…

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काल और उसके रहस्य : आशा सहाय

जब कब अब और तब जैसे शब्द निरर्थक हैं अगर इनके साथ काल नहीं जुड़ा हो।पूर्वोक्त शब्दों से हम काल को मापने का दम्भ भरते हैं। वस्तुतः भौतिक दृष्टि से इसे मापना अत्यंत कठिन है। यह अपनी व्यावहारिक सुविधा के लिए करना चाहते हैं ताकि दो घटनाओं के मध्य की स्थिति को हम मस्तिष्क मे…

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इंसानी रिश्ते

बड़ी मालकिन घर के  नौकर चाकरों  से बड़ा कठोर व्यवहार करती। उनको तुच्छ और हीन समझती। उनकी नजर में पैसा होना ही सबसे ज्यादा जरूरी था। पूजा पाठ के नाम पर दिखावा भी बहुत करती अम्मा। घर के नौकर बुरा नहीं मानते थे उनकी बातों का। कभी-कभी तो छूत-अछूत भी कर दिया करती थी। बरसात…

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टूटे पैर वाले पोस्टर

(राजनीतिक सफरनामा) कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सबकी अपनी-अपनी किस्मत होती है दीदी के पैर की भी अपनी ही किस्मत है । चोट खाया पैर बड़े-बड़े पोस्टर-बेनरों में पूरी आभा के साथ दिखाई देने लगा है । जहां कल तक पश्चिम बंगाल की गलियों में चुनाव चिन्ह वाले पोस्टर चमक रहे थे अब वहां टूटे हुए पैर की…

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जनता से जो वादे किये थे उन्हें पूरा नहीं किया : मनमोहन

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 14 दिसम्बर को रामलीला मैदान पर कांग्रेस की ‘भारत बचाओ रैली’ को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह साल पहले देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया है। उन्होंने आगे यह भी कहा…

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संस्मरण : यादगार बोहाग बिहू

बैशाख का महीना असम के लिए खास होता है। बैशाख जिसे असमिया में बोहाग कहते है, इस महीने में बोहाग बिहू मनाया जाता है। यह रोंगाली बिहू और भोगाली बिहू के नाम से भी जाना जाता है। गांवों में घर धन-धान्य से भरे होते है। भोग करने के साधन होते हैं और फल-फूल से भरे…

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दिल्ली धमाका से दहशत में  लोग

राजनीतिक सफरनामा दिल्ली धमाका से दहशत में  लोग :   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव दिल्ली धमाके ने दहशत का माहौल बना दिया । विगत अनेक वर्शो से दिल्ली ऐसे धमाकों से दूर थी । इससे भी ज्यादा हैरान करने वाला आतंकवादियों को वह माड्यूल है जिसमें पढ़े-लिखे डाक्टर शामिल हैं । पूरी गैंग डाक्टरों की ही है…

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बारीश कि बूंदें

मनीषा गुप्ता ‘मिशा’ छ्त पर पड़ती बारिश की बूंदे आज  जैसे  फिर राज को अतीत कि तरफ़ खींच रही थी। एक एक बुदं राज के दिल पर नश्तर कि तरह चुभ रही थी । बरसो जिन बुदों से पीछा  छुड़ा कर वो भाग रहा था आज वक्त  ने फिर उसको उसी जगह आने को मजबुर…

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” रास्तों से मंज़िल तक”

ज़िन्दगी के दामन में फूल ही फूल नहीं हैं, कांटे भी हैं। यह मालूम तो था लेकिन जाना आज ही है। ख़्वाब देखना आसान है। किन्तु उस ख़्वाब को हकीकत बनाकर ज़मीन पर उतरना मुश्किल है। मैंने हिम्मत करके यह काम अपने हाथों में ले लिया। हर कीमत पर उसे पूरा करने की चेष्टा मेरे…

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