Latest Updates

खुशी की तलाश

खुशी शब्द ही खुशी का एहसास कराता है,चेहरे पर मन्द मुस्कान,मन में उमंग सीमहसूस होती है। खुशी की तो हर किसी को तलाश रहती है,खुशी तो हमारे अंदर से ही तो उपजती है बस हर परिस्थिति में अपने आप को सयंम के साथ सब्र रखते हुए मन की गहराइयों से अनुभव करना है,कुछ न कुछ…

Read More

ये लाल टोपी वाले तेरा नाम तो बता !

राजनीतिक सफरनामा   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव अब उत्तर प्रदेश की राजनीति ‘टोपियों’’ पर जाकर उलझ गई है । राजनीति को तो किसी न किसी बिन्दु पर जाकर उलझना ही था सो वह टोपी पर उलझ गई । वैसे तो राजनीति को उलझने के लिए विकास नाम की चादर मिली हुई है पर यह चादर फट चुकी…

Read More

दीवाल पर टांग लिया नया कैलेण्डर

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक अलसाई सुबह के साथ नए कैलेण्डर के नए पन्ने पर अंकित नए वर्ष के उदित होते सूरज ने आंगन में अपनी रोशनी बिखेर दी है । ‘‘यह हमारा नव वर्ष नहीं है’’ के स्लोगन के बीच भी सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की भरमार है । हर साल 31 दिसम्बर…

Read More

टीबी से जुड़े इन 6 मिथकों के बारे में नहीं जानते होंगे आप!

टीबी एक जीवाणु संक्रमण है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन यह शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। लक्षणों में खूनी बलग़म के साथ खांसी, बुखार और रात को पसीना आना शामिल है। वज़न घटना भी इसका एक और आम लक्षण है। माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक टीबी का…

Read More

बुर्खा और घूँघट प्रथा —-एक सामाजिक बुराई

कभी तो देखे अपनी माँ को, जो बुर्खा मुख पर ओढ़े थी , कभी बोलती बिना जुबां के, माँ कब तू मुख खोलेगी ! क्या मेरी जवानी और बुढ़ापा तेरी तरह ही गुजरेगा , जो तेरे था साथ हुआ, क्या वो सब मुझपर बीतेगा ! कैसे गर्मी धूप में भी तू, सर ढक कर के…

Read More

स्वतंत्रता दिवस धिक्कार कर कहता है

डॉक्टर सुधीर सिंह आजाद भारत में आर्थिक आजादी नहीं, किंतु आजादी का ढिंढोरा लोग पीटते हैं। स्वतंत्रता दिवस  धिक्कार  कर कहता है, भारत में गुलाम सा  गरीब  क्यों रहते हैं? भ्रष्टाचार ने छीना है वंचितों की आजादी, गरीब कोऔर ज्यादा गरीब बना दिया है। भ्रष्टाचारियों  के रूतबा का कहना क्या? गोरखधंधेवाजों का  सम्मान बढ़ गया…

Read More

बातों ही बातों में (लघुकथा)

किस्तूरी आज बहुत चिढी़ हुई थी अपनी पडोसिन कमला  से। उसकी सारी पोलपट्टी खोल दी। वो भी बाल्कनी से। मोहल्ले के सब लोगों ने भी सुन लिया होगा। जब से  लाकडाउन  में थोडी छूट मिली है, सभी अपने घर के बाहर  कुर्सी डालकर चुगलियों का दबा  पिटारा  खोलने लगती हैं। जो उस समय  वहाँ नहीं…

Read More

भारतीय राजनीति में आज भी प्रासांगिक एव अद्वीतीय है महात्मा गांधी (पुण्य तिथि-30 जनवरी पर विशेष)

लाल बिहारी लाल भारत में सत्ता दिल्ली सलतनत से मुगल साम्राज्य फिर मुगल से जब सत्ता अंग्रैजो के हाथ में गई तो पहले अंग्रैजों का व्यापारिक उदेश्य था पर धीरे-धीरे उनका राजनैतिक रुप भी समने नजर आने लगा। और वे अपने इस कुटिल चाल में कामयाब भी हो गये । धीरे –धीरे उनके क्रिया-कलापों के…

Read More

रिश्ता

जिंदगी की राह कुछ ऐसी ही होती जब बेटी का विवाह हो नजदीक पिता की आँखे डबडबाई  रहती मानों आँसुओं का बाँध टूट रहा हो बचपन से पाला पोसा  वो अब घर छोड़ कर जाना होता है  r ये नियम तो है ही किंतु त्यौहार और घर का सूनापन भर जाता आँसू बेटी के न…

Read More

मोबाइल महिमा

विधा:-कुंडलियाॅं छंद मोबाइल लाया क्रांति, शुक्रिया खोज वाले। धन्य मूर्त रूप दाता, नेट जोड़़ने वाले॥ नेट जोड़़ने वाले, टीवी घडी़ कंप्यूटर। इसमें ही गैजेट, बुक टाॅर्च केलकुलेटर॥ कहें ‘लक्ष्य’समझाय, कलयुगी ज्ञान समाया। काग़ज़ कलम विहाय, क्रांति मोबाइल लाया॥ गूगल ज्ञान की पुतली, मोबाइल की शान। जानी अनजानी करे, समस्या समाधान॥ समस्या समाधान, निरख यूट्यूब उपदेश।…

Read More