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“महाप्रलय मचाओ माँ”

बस बहुत हो चुका हलवा- पूरी कन्या पूजन भी बहुत हुआ अब नहीं सुरक्षित कहीं बेटियां सब कर रहे कर- बद्ध प्रार्थना  नवरात्रों में भोग लगाने अब घर- घर मत आओ माँ कितनी निर्भया और बलि चढ़ेंगी ? आज हमें बतलाओ  माँ मैया सीता तो  निष्कलंक थी क्यूंकि लंका में  रावण था जनक नंदिनी निष्कलंक…

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बच्चों को दे स्वच्छ वातावरण, ताकि खुलकर बोल सके

घर में कोई शादी हो या पूजन – पाठ, या कोई भी अन्य आयोजन, खर्च और रिश्तेदारों की फिकर से इतर इन आयोजनों का सबसे अधिक आनंद इस घर के बच्चे ही उठाते हैं। जिन्हें न खर्च की फिक्र होती है न ही रिश्तेदारों के नखरे झेलने की, वह तो अपनी ही मौज में मस्त…

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भारतीय सभ्यता सबसे प्राचीन और निरंतर विशाल विस्तार वाली : एनएसए डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार को कहा कि भारतीय सभ्यता “विशाल विस्तार” वाली सबसे पुरानी और निरंतर सभ्यताओं में से एक है। भारतीय इतिहास के बारे में कुछ सवाल थे, मगर किसी ने सवाल नहीं उठाया, यहां तक कि देश के निंदक ने भी नहीं। डोभाल ने नई दिल्ली में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन…

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खिड़की

चुपके चुपके बिना पदचाप पैर पसार रही अजब बीमारी  इसको नहीं किसी का भी डर क़ाबू कर ली है दुनिया सारी जीव जंतु तो घूम रहे खुले में  मानव क़ैद हुआ घर के भीतर अब इनको भी समझ में आया आज़ादी और पिंजरे में अंतर मोटर ट्रक भी न धुंआ उड़ाते ख़त्म ही हो गया…

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उम्मीद के दीप

माना रात घनी है,घोर तमस से भरी है। उजियारी भौंर के सामने कई चुनौतियाँ धरी हैं। तुम सूरज पर एतबार बनाए रखना। उम्मीदों के दीपक जलाए रखना। मंजिल बहुत दूर हो,दर्द बेहिसाब हो। सबसे मेरा रश़्क हो,उजड़े हुए मेहताब हो। जुगनुओं से इल्तिफात तुम बनाए रखना। उम्मीदों के दीपक जलाए रखना। मंज़र-ए-नदीश में कष्ट इफरात…

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काश मैं मोबाइल होती

“काम बहुत था यार आज, बुरी तरह से थक गया हूँ।” – सोफे पर अपना बैग रखते हुए अजीत ने कहा।  “अजीत जल्दी से फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं चाय बना देती हूँ।”  “ठीक है, मधु! ” कहते हुए अजीत बाथरूम में चला गया। अजीत के फ्रेश होकर हॉल में आते ही माधुरी चाय-पकौड़े…

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भांग धतूरा

असुरों ने सर्वदा की देवों से लड़ाई एकता समुद्र मंथन ने दोनों में कराई। देवी लक्ष्मी विलुप्त हुई क्षीर सागर में समुद्र मंथन किया गया था लक्ष्मी पाने। सागर मंथन से उत्पन्न हुआ जो विष दृष्टि बचाने को इसे पी गए थे शिव। महादेव का गला नीला हो गया शिव ने विष गले में ही…

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कौन बने शिव ?

बस्ती में अजीब सन्नाटा मरघट में कोलाहल ऐसा क्यों हो रहा जानकर भी हम सब अनजाने सद्ग्रन्थों को धरा ताक पर कर्म करें मनमाने यही दुराग्रह विष समाज में जगह-जगह पर फैला दिन-प्रतिदिन होता जाता है मानवअधिक विषैला झुलसातीं नित विष-ज्वालाएँ मानवता के तरु को कौन बने शिव? जो पी डाले सामाजिक हालाहल सभी व्यस्त…

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‘जीवन’ का दुरूपयोग‌

एक तरफ तो हम कहते हैं कि जल ही जीवन है और तो वही दुसरी तरफ हम अपने दैनिक जीवन में निरंतर जल संसाधनों का दुरूपयोग कर उनका दोहन करते जा रहे हैं। जल सभी के लिए अति आवश्यक है। जैसे मानव जीव जंतु पशु पक्षी पेड़ पौधे  फसल उत्पादन आदि सभी के लिए अति…

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जय हिंद जय भारत

कविता मल्होत्रा माँ शारदे को नमन और भारत माता का वँदन करते हुए, आध्यात्मिक समिधा की आहुति के साथ, निस्वार्थ प्रेम का आचमन, हर रूह के जीवन यज्ञ को सफल बनाए, इसी शुभकामना के साथ,इस लेख का आरँभ करती हूँ। शीत ऋतु की विदाई के साथ बसँत के आगमन की दस्तक समूचे वातावरण में नवसृजन…

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