“महाप्रलय मचाओ माँ”
बस बहुत हो चुका हलवा- पूरी कन्या पूजन भी बहुत हुआ अब नहीं सुरक्षित कहीं बेटियां सब कर रहे कर- बद्ध प्रार्थना नवरात्रों में भोग लगाने अब घर- घर मत आओ माँ कितनी निर्भया और बलि चढ़ेंगी ? आज हमें बतलाओ माँ मैया सीता तो निष्कलंक थी क्यूंकि लंका में रावण था जनक नंदिनी निष्कलंक…
