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स्वाधीन भारत बनाम रक्ष्य वचन पर्व

थाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधालो राखी। इस राखी में छुपी हुई  है, अरमानों की  साखी।। चंदन रोरी अक्षत मिसरी, आकुल कच्चे-धागे। अगर नहीं आए तो  समझो, हम हैं बहुत अभागे।। क्या सरहद से एक दिवस की,छुट्टी ना मिल पायी? अथवा कोई और वजह है, मुझे बता दो भाई ? अब आँखों को चैन नहीं…

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हिन्दी फैल रही दुनिया में

हिन्दी हिन्दुस्तान की ही, रही नहीं अब भाषा फैल रही है दुनिया में, बन जन-जन की आशा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. आजादी में फर्ज निभाया, बनके जैसे फौजी दसों दिशा के लोग बने थे, अजब मनमौजी बनी देश की भाषा यह, दुनिया की अभिलाषा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. दुनिया में हिन्दी बिना अब,…

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।। हमारा तंत्र ।।

                                          समाज में राजतंत्र के बाद प्रजातंत्र आया। लेकिन प्रजातंत्र के साथ साथ राजतंत्र भी उसी के समानांतर चलता रहा है। लेकिन समाज को यह दिखता नहीं केवल महसूस होता है।यह राजतंत्र राजाओं से भी क्रुर व्यवस्थाओं में पनपा है ,और पनप रहा है।इस राजतंत्र को आज गुंडातंत्र, आतंकवाद,आदि नामों से कहा जाने लगा है।…

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राष्ट्रीय ब्राह्मण महासम्मेलन 9 जनवरी को आयोजित होगा

अखिल भारतवर्षीय श्रीचौरासिया ब्राह्मण महासभा के आह्वान पर देश के विभिन्न क्षेत्रों मे कार्यरत राष्ट्रीय ब्राह्मण संगठनों के सानिध्य में राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रीय ब्राह्मण महासम्मेलन 9 जनवरी 2022 को दिल्ली-कर्नाटक संघ सभागार, राव तुलाराम मार्ग, (मोतीबाग मेट्रो स्टेशन के नीचे ) में आयोजित होगाआज दिनाक 13 दिसम्बर 2021 को यहाँ उक्त जानकारी…

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“एक पेड़ मां के नाम लगाएं…” : पीएम मोदी

‘मन की बात’ नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के बाद किये गए पहले ‘मन की बात’ रेडियो प्रोग्राम के 111वें एपिसोड में कहा कि मैंने कहा था, चुनाव नतीजों के बाद फिर मिलूंगा, उम्‍मीद करता हूं कि आप सब अच्‍छे होंगे. मैंने विदा लिया था, फिर मिलने के लिए. इस बीच मुझे…

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पिता (कविता-8)

बाप के ही अंश होते राम,श्याम,कंस होते धर्म का ये भाव है की उन्हें न बिसारिए। दोनों हाथ जोड़कर गर्दनें को मोड़कर सामने से पैर छूके स्वयं को उबारिए। जहाँ कहीं आप   फँसें देख चार लोग  हँसे पुरखों की बात मान पिता को पुकारिए। नीति,रीति,ज्ञान लेके मान व सम्मान लेके लोकहितकारी बन पिताजी को तारिए।।…

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यूं तो जरा भी देर न लगी

भावनाओं को कविता का रूप दिया, लेकिन आज क्यों शब्द भी थम से गए, जब से प्रभु श्री राम का नाम लिया। कितनी पवित्र होगी वो स्याही, जो लिखेगी मेरे प्रभु श्री राम का नाम, उस कागज में भी जान आ जाएगी, जिसमें रघुवर के होंगे गुणगान। राम नाम जपता ये जग सारा, पर राम…

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बालकथा – बापू के जन्मदिन

राजू एक नवी कक्षा का छात्र है और अपने घर के पास ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ता है।राजू बचपन से ही पढ़ने बहुत होशियार विद्यार्थी है।लेकिन उसके दिमाग की सारी अच्छाइयां उसके गणित के अध्यापक के सामने खत्म हो जाती हैं। वह लगातार अपने गणित के अध्यापक के हाथों डांट खाता रहता है और…

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आठवाँ सुख

आज अमृता की शादी है। पापा को अपनी लाडली की विदाई का सोचते ही उदासी हो आई।चौबीस वर्ष उसके आँगन में रही बुलबुल फुर्र हो जाएगी। पत्नी सुशीला डायबिटीज से इतनी परेशान रहती थी थकावट व घबराहट से तरबतर उसका ज्यादा समय बिस्तर पर ही गुजरता था,ऐसे में पहले पढ़ाई व बाद में नौकरी में…

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अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच द्वारा विश्व के सबसे बड़े वर्चुअल आनलाइन भारत को जाने कार्यक्रम

अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच द्वारा विश्व के सबसे बड़े वर्चुअल आनलाइन भारत को जाने कार्यक्रम में शिखा पोरवाल वैकुंवर कनाडा से संचालन करेंगीं। डाँ शिल्पा शिप्री जी भी उनके साथ संचालन की बागडोर सम्हालेंगी। विश्व के श्रेष्ठतम कवि संचालकों को संचालन का दायित्व सौंपा गया हैं।कार्यक्रम का संयोजन डॉ. ममता सैनी तंज़ानिया कर रही है…

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