बूढ़ा-बुजुर्ग जब वृद्धाश्रम में बस जाता है
सिर पर बोझ जब भीअसह्य हो जाता है, आदमी तुरंत उसे उतार कर रख देता है. इस भरी दुनिया में सिर्फ माता-पिता ही, संतान की जिम्मेवारी जीवन भर ढोता है. फूल समान लगता है सबों का बोझ उसे, माँ-बाप मुस्कुराकर उसे उठाता रहता है. खुद के बुढ़ापा का बोझ भूल जाता वह, गदहे की तरह…
