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गीत और ग़ज़ल को ऑक्सीजन देने वाला वट वृक्ष चला गया

सज्जनता, विनम्रता, सरलता और बड़प्पन सिखाना है तो डॉ. कुंअर बेचैन से सीखें। इतना बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद भी कोई अहम नहीं पला। गीत के शलाका पुरुष और ग़ज़ल के उस्ताद डॉ. कुंअर बेचैन अति विशिष्ट श्रेणी में आते थे। वे अत्यंत विद्वान और सतत् विचारशील थे। मैंने, उनके कवि सम्मेलनों के उनके…

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पृथ्वी का मौन

आज बैठी हूँ मैं उदास लिखने जा रही हूँ कुछ खास इस महामारी के चलते लोग नहीं हैं आसपास किसी ने नहीं सोचा था कि कोर्इ समय ऐसा आयेगा, इन्सान इन्सान से मिलने के बाद पछितायेगा। कैसे हैं आज के समय के फसाने, लोग ही लोगों को लगे हैं डराने। क्या यह हमारी गलती है…

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इतिहास बदलते बदलते भूगोल बदल डाला,

इतिहास बदलते बदलते भूगोल बदल डाला, मोदी व शाह की जोड़ी ने माहौल बदल डाला। कुछ सिरफिरे आज भी हैं गद्दारी पे आमादा, साहस भरे कदम ने उन्हें बेनकाब कर डाला। आज देश की जीत हुयी है, राष्ट्रवादी विचारों नें काश्मीर फ़तह किया है, ये भारत मां की विजय हुयी है, आजादी के बाद से…

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करोना को सोच के खुद को ना भूले !

अति बौद्धिकवाद एजेंडा धारी दर्शन भी आतंक का ही रूप स्वरूप है। मात्र आलोचना या वादी प्रतिवादी को ही विद्वता नहीं कहते । इसके लिए आदमी के पास व्यवहारिक ज्ञान के साथ सम्यक व्यवहार होना नितांत अनिवार्य है। अब समय आ गया है ,  मजदूरों का रोना रोना बंद कर दीजिये  , मजदूर घर पहुंच…

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हिमालय परिवार द्वारा भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन

(नई दिल्ली) 7अगस्त आजादी के 75वें अमृत महोत्सव के शुभ अवसर पर हिमालय परिवार ने एक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन संस्था के पहाड़गंज स्थित मुख्य कार्यालय से लेकर रानी झांसी रोड तक किया! जिसमें संस्था के सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया! कार्यक्रम में संस्था के संरक्षक इंद्रेश कुमार जी ने देशभक्ति से…

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दो पल

         मिले दो पल जीवन की आपाधापी में से…और दो मैंने चुरा लिए।        सघन गर्मी में तपते हुए प्यासे को जैसे मेघों की हल्की सी रिमझिम फ़ुहारों ने भिगो कर मन को हर्ष और संतोष प्रदान कर दिया हो…कुछ ऐसा रहा आज का प्यारा सा, दुलारा सा, मनमोहक संगीत सुनाता सा अलबेला दिन।        …

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क्यों संदिग्ध है अकादमी पुरस्कारों की वार्षिक गतिविधियां ?

पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों, कलाकारों और अपने लोगों को प्रस्तुत करने के लिए विशेष साहित्यकार, पुरोधा कलाकार, साहित्य ऋषि जैसी कई श्रेणियां बनी है। जिसके तहत विभिन्न अकादमियां एक दूसरे के अध्यक्षों को पुरस्कृत कर रही है और निर्णायकों को भी सम्मान दिलवा रही है। इन पुरस्कारों में पारदर्शिता का…

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बाल कविता – स्कूटी की सवारी

नई स्कूटी लेकर आया राजू भालू, उसका दोस्त चिम्पू बंदर है बहुत चालू। मीठी बातो से राजू को बहकाता, रोज उसकी स्कूटी मजे से चलाता।। एक दिन चिम्पू का चौराहे पर कटा चालान, बिन हैलमेट पहने स्कूटी चलाता सीना तान, करी बहुत मिन्नते मिट्ठू तोता हवलदार की, पर फिर भी तोते ने उसकी बात ना…

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मत बहाओ खून

मत  बहाओ  खून  मनुता का,    अये सभ्य  मानवो! रो- रोकर  है  पूछती  तुमसे   मनुजता      आज  है। तुम  थे  बहुविकसित, बुद्धि – विवेकयुक्त भलेमानस कहां  पायी  ऐसी  पशुता,    कैसा   यह  समाज   है? धांय-धांय, सांय-सांय  करते  गिर  रहे  बारूद- गोले टूट- टूटकर  के  ढह  रही  हैं    बहुमंजिली   इमारतें बन गए  वीरान   शहर  जो   कलतक   थे   आबाद नहीं…

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अजूबा प्रजातंत्र है,कुहरन भरी आजादी है

ठोकर खाने पर भी संभलता नहीं बेईमान, कुछ दौलत के लिए वह बेच देता है ईमान. बेइज्जती का उसको कुछ भी परवाह नहीं, धन-पद के  पीछे-पीछे  भागता है बेलगाम. समाज में  ईमानदार आदमी का अभाव है, शुभ सलाह  मानने को कोई  नहीं तैयार है. गरीबी व बेरोजगारी  समाज में बरकरार है. खुलेआमअट्टहास यहां करता व्यभिचार…

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