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शिकायत समोसे वाले की

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक आम व्यक्ति ने एक समोसे वाले की शिकायत सी.एम. हेल्पलाइन पर कर दी ‘‘बताइए साहब ये समोसे वाला समोसे घर ले जाने के लिए पैकेट में तो समोसे रख देता है पर उसके साथ प्लेट नहीं देता हम समोसों को खायेंगें कैसे ? जबकि उसकी दुकान पर समोसा खाओ…

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बूढ़े नहीं,भूतपूर्व नौजवान

साठ वर्ष से ऊपर के हो गए तो क्या हुआ!अपने को बूढ़ा तो नहीं समझते न!समझना भी नहीं है। क्या कहा-लोग कहते हैं, लोगों की परवाह मत करो,लोगों का काम है कहना।अरे!रिटायर्ड ही तो हुए हो,टायर्ड तो नहीं।टायर्ड होना भी नहीं है,जो काम स्वयं कर सकते हो,वह स्वयं करना ही है।बार बार पत्नी को हर…

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दोहा गीतिका

जीवन  में  हो  सादगी, ऊंचे  रहे  विचार सफर जिन्दगी का कठिन,नही मानना हार अच्छी चीजों को चुनो,अपनाओ सद्भाव अच्छा बनने के लिए,खुद में करो सुधार झूठ,कपट,दुर्भावना, द्वेष फेंक दो दूर अवगुण सारे त्याग दो,हो अच्छा व्यवहार संस्कार के फूल से, महके सकल जहान संचित गुण का कोष हो,गुण का हो विस्तार मोह माया अन्धियार है,करे…

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लोक आस्था का महा पर्व-छठ व्रत

             लाल बिहारी लाल         छठ मईया की महिमा,जाने सकल जहान। “लाल पावे” जे  पूजे, सदा करी कल्याण।।                                         (लाल बिहारी लाल) सृष्टी की देवी प्रकृति नें खुद को 6 बागों में बांट रखा है। इनके छठे अंश को मातृदेवी के रुप में पूजा जाता है। ये ब्रम्हा की मानस पुत्री हैं। छठ व्रत यानी इनकी…

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आधुनिक समाज में मंचों से साहित्य थूकना सरल

   पंकज कुमार मिश्रा, व्यंग्यकार एवं राजनीतिक विश्लेषक जौनपुर यूपी कहते है  जिस आधुनिक  युग में तुलसी शब्द सुन कर बड़े बड़े कवियों को ‘तुलसी पान मसाला’  याद आता हो, उस युग में एक बड़े धार्मिक आयोजन के बैनर पर रजनीगंधा गुटका का विज्ञापन देखना बुरा क्यों है ? प्रायोजक चाहता है ‘सईंया’ ‘पियवा’ से…

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संतोष (लघुकथा)

    शाम होते-होते सूरज ढलने लगा। उम्मीदों के दीप बूझने लगे मगर सबको अपना-सा लगने वाला रमेश फिर कभी उन लोगों के बीच कभी नहीं लौटा जिनके लिए आधी रात को भी मुसीबत आए तो तैयार हो जाता था। गॉंव छोड़ शहर की नौकरी में ऐसा उलझा की घर बसाना ही भुल गया। गॉंव भी…

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जलना ही है तो सूरज की तरह जलो

जलना ही है तो सुरज की तरह जलो।रौशनी की तरह चमकोगे। जलना ही है तो जलते दिये की तरह जलो।रौशनी की तरह अंधेरे में भी चमकोगे। इंसान को देखकर इंसान से मत जलो।जल्द ही पतन होगा तुम्हारा। न पछताबे से कुछ हासिल होगा।न ही पैर किसी के खिंचने से। किसी से जलने से शून्य में…

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असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद

लाल बिहारी लाल गुदरी के लाल देशरत्न डा.राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसम्बर 1884 को बिहार के तत्कालिन सारण जिला (अब सीवान)के जीरादेई गांव में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता महादेव सहाय हथुआ रियासत के दीवन थे। अपने पाँच भाई-बहनों में वे सबसे छोटे थे इसलिए पूरे परिवार में सबके लाडले थे।…

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गीतकार अनिल भारद्वाज नेपाल संस्था द्वारा मानद उपाधि सम्मानित

मार्च 8, लुंबिनी,नेपाल की सु-विख्यात साहित्यिक संस्था ” शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउन्डेशन नेपाल ” द्वारा नेपाल राष्ट में ,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित “अंतरराष्ट्रीय महिला शक्ति कविता प्रतियोगिता २०२४ ” में शामिल चार देशों नेपाल, भारत, यू एस तथा तंजानिया के रचनाकारों में से मध्य प्रदेश ग्वालियर के वरिष्ठ गीतकार व हिंदी…

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यूक्रेन युद्ध के तीन साल और हाल फिलहाल

तीन साल पहले, रूस ने यूक्रेन के खिलाफ एक भाईचारे वाला ‘विशेष सैन्य अभियान’ शुरू किया, जिसने 1945 के बाद से सबसे खूनी यूरोपीय युद्ध को जन्म दिया। रूस की लाल रेखाओं की याद दिलाने के लिए योजनाबद्ध संघर्ष एक भीषण युद्ध में बदल गया। यूक्रेन जो  एक लचीला और पश्चिमी समर्थन से लैस देश…

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